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तो नेट सेट क्वालिफाइड स्टूडेंट्स नहीं बन पाएंगे असिस्टेंट प्रोफेसर

7 वर्ष पहले
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रायगढ़। राज्यलोक सेवा आयोग की ढुलमुल नीति के कारण नेट और सेट क्वालिफाई कर चुके अनेक विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। नेट सेट की परीक्षा पास करने के लिए की जाने वाली मेहनत का एक उद्देश्य होता है असिस्टेंट प्रोफेसर बनना, लेकिन बारहवीं में 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी पीएससी द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सकेंगे। हालही में छत्तीसगढ़ पीएससी ने सहायक प्राध्यापक के 966 रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है।
दरअसल सेट या नेट की तैयारी करने या क्वालिफाइंग एग्जाम देने वालों को यह नहीं बताया गया था कि यदि 12वीं की परीक्षा में उन्होंने 50 से कम फीसद अंक प्राप्त किए हैं तो वे असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयन परीक्षा नहीं दे पाएंगे। प्रतियोगिता परीक्षाओं में आमतौर पर पहले तय होता है कि इसमें शामिल होने वालों की पात्रता शर्तें क्या होंगी,
लेकिन पीएससी ने अचानक ऐसा फरमान जारी कर सेट नेट क्वालिफाइ कर चुके अनेक अभ्यर्थियों के सामने समस्या खड़ी कर दी है। ऐसे सभी लोग अपने कैरियर को लेकर काफी चिंतित है। पीजी के बाद नेट और सेट क्वालिफाई करने का एकमात्र उद्देश्य एकेडमिक क्षेत्र से जुड़ना था। पीएससी के इस कदम से रायगढ़ जिले के एेसे कई विद्यार्थी प्रभावित होंगे जिन्होंने सेट नेट क्वालिफाई किया है या जो पीएचडी हैं।

इनके सामने सब छोटे
''जबकेंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ने इन्हें नेशनल राज्य स्तर पर क्वालिफाई कर दिया है। इसके बावजूद राज्य लोक सेवा आयोग की ओर से इस प्रकार के निर्णय से काफी लोगों का भविष्य दांव पर लग जाएगा।'' अबरार हुसैन, शिक्षा विद्रायगढ़

लोकसेवा आयोग की है गलती
''वर्तमान में मैं हरिद्वार के विद्यापीठ में संस्कृत की प्रोफेसर हूं, मैं अपनी छत्तीसगढ़ राज्य में सेवा देना चाहती हूं, पर राज्य लोक सेवा आयोग की गलती के आगे कुछ कर नहीं कर पा रही हूं।'' डॉ ककेश्वरी पटेल, परीक्षार्थी सारंगढ़
कौन है जिम्मेदार
हालही में दिसंबर 2013 को हुए सेट की परीक्षा में परीक्षार्थियों से 12 वीं के परिणाम नहीं पूछे गए और ना ही नेशनल स्तर पर होने वाली नेट परीक्षा में पूछा गया। यदि यह पहले तय होता तो ये लोग इसके लिए समय बर्बाद नहीं करते। अभ्यर्थियों का मानना है कि लापरवाही के लिए राज्य शासन ही जिम्मेदार है।

बिहार- मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं
शिक्षाविदोंके अनुसार बिहार और मध्य प्रदेश में सेट और नेट क्वालिफाइड छात्रों के लिए यह नियम लागू नहीं किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में राज्य लोक सेवा आयोग की इस चूक या मनमानी के कारण अनेक विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

परफेक्ट पर 12वीं में 49 प्रतिशत
इसकेपद इंतजार पिछले दाे सालों से कर रही सारंगढ़ की डॉ ककेश्वरी पटेल की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। इसने इस परीक्षा के लिए संस्कृत से पीएचडी नेशनल स्तर की पात्रता प्राप्त करने नेट की परीक्षा पास कर ली है। इसके अलावा यू-जी में 60 फीसदी पीजी में 68 फीसदी अंक प्राप्त किए। अबतक वह 10 नेशनल इंटरनेशनल स्तर के कांफ्रेंस में भाग लिया है। तीन रिसर्च पेपर पब्लिश हो चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश 12 वीं की परीक्षा में उन्हें मात्र 49 फीसदी अंक मिले थे इसलिए वह पीएससी द्वारा आयोजित की जा रही चयन परीक्षा से वंचित हो जाएंगी।
पीएससी ने फंसाया | राज्य के सैकड़ों स्टूडेंट्स का भविष्य अंधकार में , असिस्टेंट प्रोफेसर चयन परीक्षा में 12 वीं में 50 फीसदी से ज्यादा अंक जरूरी ।