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अब भ्रष्ट शासकीय कर्मचारियों की शिकायत करें ऑनलाइन

7 वर्ष पहले
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रायगढ़। भ्रष्ट कर्मचारियों की शिकायत अब ऑनलाइन की जा सकेगी। छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने अपने काम-काज में पारदर्शिता लाने के लिए नई वेबसाइट तैयार कर ली है। यह वेबसाइट आवेदक सहित अन्य लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार यह वेबसाइट राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के सहयोग से तैयार की गई है। इस वेबसाइट में एक साफ्टवेयर के जरिए आयोग को प्राप्त होने वाली शिकायतों को दर्ज किया जाता है। इससे प्रकरणों को खोजना और समस्त जानकारी संकलित करना आसान हो गया है।
इसमें लोक आयोग के कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने से काम-काज में गुणवत्ता भी आएगी। वेबसाइट में प्रकरण की स्थिति के बारे में कभी भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अंतिम कार्रवाई विवरण को भी प्रकरण क्रमांक के आधार पर आसानी से खोज सकते हैं।
आयोग की वेबसाइट पर सुनवाई तिथि के सभी प्रकरणों की (कॉजलिस्ट) भी देखी जा सकती है। आवेदन की प्राप्ति और प्रकरण के पंजीयन की जानकारी आवेदक को एसएमएस के जरिए दी जाएगी। इसके अलावा सुनवाई के बाद भी प्रकरण की स्थिति के बारे में आवेदक को एसएमएस के जरिए सूचित किया जाता है।

दो तरीके से शिकायत : वेबसाइटमें शिकायत के दो फार्मेट लोड किया गया है, जिसमें सुविधानुसार शिकायत की जा सकती है।

क्यों बना लोक आयोग : प्रशासनिक सुधार आयोग ने अक्टूबर 1966 में प्रशासन के अपेक्षित मापदंडों में ईमानदारी और क्षमता की कमी के संबंध में उपचार पेश किए। तथ्यों के विश्लेषण के बाद भारतीय नागरिकों को उपरोक्त समस्याओं के निदान के लिए उपलब्ध व्यवस्था और उसके स्थान पर नई व्यवस्था प्रस्तुत करने पर भी विचार किया गया। तात्कालिक समय में उपलब्ध संस्थाएं जैसे - संसद, प्रशासन तथा न्यायपालिका लोगों की पहुंच के बाहर थीं।
आयोग ने पाया कि कार्यपालिक आवश्यकताओं के कारण बहुत से मामले उत्पन्न होते हैं, जो व्यक्ति विशेष के साथ अन्याय करते हैं, जिसके विरुद्ध कोई सहायता उपलब्ध नहीं है। इससे निपटने के लिए लोक आयोग गठन की पर जोर दिया गया। मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक सुधार आयोग ने मप्र लोकायुक्त और उप लोकायुक्त अधिनियम प्रभावशील किया। छग राज्य के गठन के बाद भी इस अधिनियम को लागू रखा। बाद में छग शासन ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पृथक लोकायुक्त अधिनियम बनाया, जो कि वर्ष 2002 में अधिनियम क्रमांक 30 के रूप में लागू हुआ।
ई व्यवस्था| लोक आयोग ने बनाई अपनी वेबसाइट, पीड़ित को प्रकरण की जानकारी दी जाएगी एसएमएस से।