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डेंजर पाइंट-1 चक्रपथ और मरीन ड्राइव सड़कों का खतरनाक मिलन

7 वर्ष पहले
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रायगढ़| सर्किट हाउस,हेमुकालानी चौक, कलेक्टोरेट, जिला पंचायत को आपस में जोड़ने वाली मरीन ड्राइव फेज 1व तथा चक्रपथ की सड़क जहां मिलती है वह एक डेंजर पाइंट है, जहां हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नई सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामियां और उस पर यातायात के दबाव को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए हैं जिस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
A.1 2 नंबर की रेखाएं पुराने मरीन ड्राइव कलेक्टोरेट मार्ग से हेमुकालानी मार्ग जाने वाले ट्रैफिक को दर्शा रहे हैं। ग्राफिक्स में दिखाए गए पाइंट पर वाहनों के टकराने का खतरा है। वहीं 3 4 नंबर की रेखाएं मरीन ड्राइव फेज1-2 को आते-जाते वाहनों को दर्शा रहा है। यहां वाहनों की रफ्तार को नियंत्रित करने के उपाय नहीं होने के कारण कभी भी हादसा हो सकता है।

ट्रैफिक नियमों के जानकार मानते हैं कि मरीन ड्राइव फेज 1व2 के साथ चक्रपथ मार्ग का संगम तिराहा है। यहां ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाने चाहिए और स्पीड ब्रेकर बनाए जाने चाहिए ताकि अच्छी सीधी सड़क पर वाहनों की स्पीड धीमी हो जाए। यहां आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। सड़क का सुपर एलिवेशन सही नहीं होने के कारण दो बार वाहन केलो नदी में जा गिरे हैं।

B. फोटो में लाल रेखा का हिस्सा सड़क का केलो नदी वाला छोर है और गुलाबी रेखा वाला हिस्सा सड़क के अंदर का हिस्सा है। शहर के एक युवा आर्किटेक्ट के अनुसार लाल रेखा से दर्शाया गया सड़क के छोर की ऊंचाई ज्यादा और गुलाबी रेखा वाले छोर की ऊंचाई थोड़ी कम होनी चाहिए। इसे सुपर एलिवेशन कहते हैं, जिसमें खामी वाहन को अिनयंत्रित करती है। (ग्राफिक्स :चंद्रमणी मेहर)

''मरीन ड्राइव-चक्रपथ तिराहे पर आप ही कोई सलाह दीजिए कि क्या किया जाना चाहिए। इस मामले को इतनी गंभीरता से नहीं सोचा गया है। दुर्घटना हो इस बात पर कोशिश की जाएगी और सड़क सुरक्षा के उपायों पर जानकारों से चर्चा कर कुछ उपाय हम जरूर करेंगे ताकि लोग सुरक्षित रहें।'' प्रमोद शुक्ला, नगरनिगम कमिश्नर।
इंजीनियरों की अनदेखी वाहन चालकों पर पड़ सकती है भारी।