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आरटीओ जवान की मौत पुलिस की सीमा विवाद में उलझा

6 वर्ष पहले
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पुलिसविभाग के सीमा विवाद में आरटीआे जवान की मौत का मामला विवादो में फंस गया। कोतरा रोड टीआई ने मामले को जूट मिल का बताते हुए पहले केस डायरी लेने से इनकार कर दिया। राजस्व नक्शे की छानबीन के बाद उसे अपने क्षेत्र का होना स्वीकारा।

23 जनवरी की सुबह कोसमनारा के पास आरटीओ की अघोषित बैरियर के पास उड़नदस्ता परिवहन विभाग के एक हेड कांस्टेबल की संदिग्ध मौत हो गई थी। अस्पताल की सूचना पर कोतवाली पुलिस शून्य में मर्ग कायम किया था। शुक्रवार को नगर कोतवाल ने केस डायरी कोतरा रोड टीआई को भेजा, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए डायरी लेने से इनकार कर दिया कि उक्त घटनास्थल जूट मिल चौकी क्षेत्र का है। कोतवाली टीआई अरूण नेताम ने कोतरा रोड जूट मिल चौकी प्रभारी अमित पाटले ने राजस्व विभाग के आरआई को नक्शा लेकर बुलवाया।

जहां नक्शा देखने के बाद कोतरा रोड टीआई ने गोलमोल जवाब देते हुए थाना क्षेत्र में स्वीकार करते हुए केस डायरी ले ली। कोतरा रोड पुलिस पहले भी कई मामलों को क्षेत्र में नहीं आने की बात कह कर कई मामले टाल चुकी हैं। चार महीने भर पहले कोतरा रोड रेलवे क्रासिंग के समीप एक महिला की ट्रेन से कट कर मौत हो गई थी। रेलवे ने कोतरा रोड पुलिस को सूचना दी मगर क्षेत्र में नहीं आने की बात कहते हुए कोतवाली पुलिस को सूचना देने कहा। कोसमनारा बाबा धाम के समीप ही आरटीओ विभाग की अघोषित बैरियर है। जहां सिर्फ बाहरी लोगों से काम लिया जाता है, बल्कि टोकन सिस्टम से भारी वाहनों को चलने की छूट दी जाती है। जिन वाहन चालकों के पास टोकन नहीं होता उनसे अवैध शुल्क भी लिए जाते हैं। दैनिक भास्कर द्वारा इसका खुलासा तीन महीने पहले किया गया था। जिसके बाद यह अघोषित बैरियर कुछ दिनों के लिए बंद जरूर हो गया मगर पुराने ढर्रे पर फिर से चल पड़ा है। बहरहाल इसी अघोषित जगह पर हेड कांस्टेबल की संदिग्ध मौत से कई सवालों को जन्म दे रहा हैं। बहरहाल पुलिस जांच उपरांत ही मामले की पूरी वास्तविकता सामने आएगी।

कैसे होता है थाना क्षेत्रों का सीमांकन

थानोंका सीमांकन तहसील, पंचायत और वार्ड के आधार पर किया जाता हैं। इसके लिए पुलिस विभाग राजस्व विभाग से जानकारी लेता हैं। इसके बाद एसपी और जिला कलेक्टर आबादी के अनुसार थाना सीमांकन को लेकर एसपी के माध्यम से राज्य शासन को भेजा जाता है। जिसमें सहमति मिलने पर राजपत्र में जारी होता है। राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद गांवों क्षेत्रों का सीमांकन कर उसे संबंधित थाना क्षेत्रों में शामिल किया जाता हैं। टीआई कौशल्या को कोतरा रोड की कमान संभालते डेढ़ साल से अधिक समय हो चुका हैं। बावजूद वे अपने थाना क्षेत्र से वाकिफ नहीं है या जानबूझकर काम से पीछे भागने के लिए इंकार कर रही थी ये तो वे ही बता सकती हैं।

घटना स्थल पर सीएमा तय करते कोतरारोड जूट मिल के टीआई।