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14 साल में गुमशुदा 71 बच्चों में से 56 को ढ़ूंढा, 15 का नहीं लगा सके पता

7 वर्ष पहले
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बच्चों को बेचने के मामले कम, प्रेम प्रसंग के ज्यादा

भास्करन्यूज|रायगढ़

जिलेमें पिछले 14 वर्षों में 71 नाबालिग लापता हुए। मानव तस्करी या नाबालिगों को ले जाकर दूसरे प्रदेश में बेच देने के मामले की अब हवा निकल रही है। एसपी द्वारा गठित टीम ने अब तक 56 को ढूंढ लिया गया।

इसमें एक भी प्लेसमेंट एजेंसियों में बेचने का मामला सामने नहीं आया। ये नाबालिग लड़कियां हैं जो प्रेमियों के साथ घर छोड़ कर चली गईं और नहीं होने पर परिजन ने थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी। जब पुलिस की टीम पकड़ कर लाई है तो कोई दो बच्चों की मां है तो किसी के तीन बच्चे हो चुके हैं, लेकिन अब इनके पति को जेल की हवा खाने पड़ रही है, क्योंकि मामला नाबालिग को ले भागने का था। ग्रामीणों को दिल्ली में बेचे जाने के तीन मामले ही सामने आए हैं लेकिन पुलिस की गहन छानबीन में भी पीड़ितों का पता नहीं चल सका।

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ शासन को देश में सबसे अधिक नाबालिगों के गुमशुदा होने के मामले में जमकर लताड़ लगाई। इसके बाद सरकार गंभीर हुई और जिले के एसपी को टीम गठित कर 5 दिसंबर तक ढूंढ निकालने के निर्देश दिए गए। एसपी राहुल भगत ने 30 सदस्यों की 13 टीम गठित कर 22 नवंबर से इन्हें डयूटी पर लगाया गया था। जो 71 में से 56 को ढूंढ निकाला है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो अंदेशा जताया था, वैसा जिले में नहीं हुआ। सुको ने नाबालिग लड़कियों को प्लेसमेंट एजेंसी में बेच देने की आशंका जताई थी, जबकि रायगढ़ जिले में महज 3 लड़कियों को ही प्लेसमेंट एजेंसी में बेचने का मामला सामने आया है। हालांकि इन्हें एसपी की गठित टीम बरामद करने में नाकाम है। 85 प्रतिशत मामला प्रेम प्रसंग का निकला। गृह विभाग 5 दिसंबर तक का समय रखा था। इस तिथि तक जितने मिले है उनकी रिपोर्ट पुलिस विभाग ने पीएचक्यू को भेज दिया है। अब जो शेष बेच गए है। उन्हें आगे के निर्देश के बाद पतासाजी किया जाएगा। फिलहाल एसपी राहुल भगत की गठित टीम देश के दूसरे राज्यों में तकरीबन दो सप्ताह तक डेरा डालने के बाद अब धीरे धीरे वापस लौट रही है।