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निगम में सरकार बनाने भाजपा और कांग्रेस में रस्साकशी शुरू
रायगढ़|नवंबर केमध्य में नगर निगम के चुनाव संभावित हैं। नगर सरकार का मुखिया महापौर, 48 पार्षदों और इनमें से ही एक सभापति के पदों पर परचम लहराने भाजपा कांग्रेस पार्टी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। महापौर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने के बाद दोनों ही प्रमुख दलों में मजबूत प्रत्याशी के नाम पर माथापच्ची शुरू हो गई है। वार्डों में पार्षदों के लिए आरक्षण 15 सितंबर को होने की संभावना है।
रायगढ़ में नगर निगम दोनों ही दलों के संगठन के लिए एक अबूझ पहेली है। पार्टी लाइन से ऊपर अपने निहितार्थों के तहत नेता रणनीति बनाते हैं। दोनों ही दलों के पार्षदों की जुगलबंदी कई बार पार्टी की दिलचस्पी पर भारी दिखाई देती है। इससे निबटना भी भाजपा कांग्रेस के संगठन पदाधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगा। कांग्रेस ने वर्ष 2004 के चुनाव में महापौर की सीट पर कब्जा किया। जेठूराम मनहर चुनाव जीते और नगर सरकार के मुखिया बने। फिर 2009 के चुनाव में मुह की खाई, जनता ने भाजपा के महेंद्र चौहथा को कमान सौंपी। कांग्रेस में यहां से बिखराव शुरू हुआ। एक बार महापौर रहे मनहर को पार्टी से निष्कासित भी किया गया। 2008 के विधानसभा चुनाव में रायगढ़ से कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस संगठन के लिहाज से कई गुटों में बंट गई। नगर विकास को लेकर तो वर्तमान कांग्रेसी पार्षद अपनी ठोस उपस्थिति दर्ज करा सके और ही निगम की भाजपा सरकार पर मुद्दों को लेकर हमला कर सके। रविवार को जिला प्रभारी कृष्ण कुमार यादव और सह प्रभारी सचिव विवेक वाजपेयी रायगढ़ रहे हैं। ये कांग्रेसी पदाधिकारियों से मंत्रणा करेंगे। महापौर पार्षदों को टिकट बांटने को लेकर उत्साही कांग्रेस के नए पदाधिकारियों में जोगी गुट का दबदबा है। पौने दो लाख की आबादी वाले शहर में नगर अध्यक्ष पद के लिए भी जोगी गुट के एक नेता का नाम सामने रहा है। नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष नगेंद्र नेगी और कांग्रेस का बड़ा धड़ा जेठूराम मनहर को महापौर पद का प्रत्याशी बनाने में लगा है वहीं पूर्व शहर अध्यक्ष खुशीराम मल्होत्रा का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है।
जिले में बिखरी हुई कांग्रेस पार्टी के लिए नगर निगम चुनाव बहुत बड़ी चुनौती होगा। जिले के साथ ही शहर में पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली भाजपा में महापौर के पद को लेकर कई नाम उभरे हैं। महापौर महेंद्र चौहथा जहां अपनी