पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • वार्ड आरक्षण के बाद बढ़ेगी सरगर्मी

वार्ड आरक्षण के बाद बढ़ेगी सरगर्मी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रायगढ़|नगर निगममें महापौर की सीट का आरक्षण होने के बाद अब बारी वार्डों के आरक्षण की है। 24 सितंबर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सा वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगा और किस वार्ड पर ओबीसी, एससी या अन्य वर्गों के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। आज मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर हुई बैठक के बाद अब आरक्षण को अंतिम रूप दिया जाना है।

40 से 48 वार्ड होने के बाद अब नगर निगम का चुनाव दिलचस्प होगा। परिसीमन पर जमकर विवाद हुआ है। वोटरों की असंगत संख्या पर उठे विवाद के बाद भी राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी परिसीमन की रिपोर्ट में अब कोई सुधार संभव नहीं है। अब विभिन्न वर्गों के मतदाताओं की संख्या के आधार पर वार्डों में आरक्षण होगा। एक बार तय हो जाए कि कौन सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित है उसके बाद निगम चुनाव का माहौल दिखने लगेगा। अपने-अपने आकाओं के पास इच्छुक कार्यकर्ता हाजिरी लगाने लगे हैं। भैया ओबीसी हुआ तो इस बार मुझे आशीर्वाद चाहिए जैसे जुमले पार्टी पदाधिकारियों जनप्रतिनिधियों के घरों दफ्तरों में सुनाई देने लगे हैं। वार्ड का चुनाव विधानसभा या लोकसभा से कम पेचीदा नहीं होता। इन चुनाव में पार्टी के निर्देशों, अनुशासन का असर थोड़ा बहुत तो दिखता है।

एक प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने सैंकड़ों कार्यकर्ता दिन रात मेहनत करते हैं लेकिन नगर निगम के चुनाव में दायरा छोटा होता है और वोटरों की कम संख्या पर प्रभाव जमाने वाले दो तीन लोग तो होते ही हैं। ज्यादातर कार्यकर्ता अपने वार्डों पर या तो प्रत्याशी होते हैं या फिर उनके परिजन या मित्र मैदान पर होते हैं। इसलिए पार्टी गौण हो जाती है फोकस अपनी या अपनों की जीत पर होता है। सूत्रों की मानें तो आरक्षण में बहुत बड़ा उलटफेर नहीं होगा, फिर भी कुछ वार्डों में दिग्गज पार्षदों को मुश्किल हो सकती है। सुभाष पांडेय, जयंत ठेठवार, अनूप रतेरिया, अरूण कातोरे, अरूण गुरुजी, दीपेश सोलंकी, के या तो वार्ड बदले जा सकते हैं या फिर वार्डों के परिसीमन या आरक्षण के कारण ये पार्षद दूसरे वार्डों से भाग्य आजमाएंगे। महापौर की सीट के लिए भी राह आसान नहीं होगी। रायगढ़ शहर के पॉश व्यवसायिक इलाकों में विकास कार्य सौंदर्यीकरण दिख रहे हैं पर पुरानी बस्ती और रायगढ़ के भीतर हिस्से में लोग बुनियादी सुविधाओं से दूर रहे हैं।