आरईएस की लापरवाही से 80 स्कूल भवन अधूरे
शिक्षाऔर ट्राइबल विभाग के अधीन लगभग 80 स्कूल भवनों का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) द्वारा कराया जा रहा है। विभाग की ढिलाई के कारण दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी काम पूरे नहीं हुए हैं। ये भवन प्राइमरी मिडिल स्कूलों के लिए बनने हैं। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से एक ओर जहां विद्यार्थियों को भवन नहीं मिल पा रहे हैं वहीं देर के कारण निर्माण की लागत बढ़ गई है, जिसके बाद आरईएस ने शिक्षा ट्राइबल विभाग से अतिरिक्त फंड मांगा है। लागत बढ़ गई इसलिए आरईएस ने निर्माण कार्य बंद भी कर दिया है। स्कूलों के भवन निर्माण की प्रमुख एजेंसी आरईएस का काम बिल्कुल ढीला है। पिछले चार सालों में शिक्षा ट्राइबल विभाग ने लगभग 80 स्कूल भवनों के लिए आरईएस को डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी थी, लेकिन कछुआ गति से काम करने के कारण ना तो इनका निर्माण पूरा हो सका और ना ही दोनों विभागों ने इसमें कोई तत्परता दिखाई। जिससे निर्माण के लिए दी गई राशि में से आरईएस भी 73 लाख रुपए खर्च नहीं कर सका। अब स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इनका निर्माण पूरा होने का इंतजार है वहीं निर्माण की लागत बढ़ जाने के कारण 56 भवनों के लिए आरईएस ने अपने हाथ खींच लिए हैं और दोबारा से एस्टीमेट बनाकर शिक्षा विभाग से अतिरिक्त फंड मांगा है।
लागतबढ़ने से नुकसान -सालों पहलेस्वीकृत हुए इन भवनों के निर्माण के लिए जो राशि जारी की गई थी उसकी लागत अब भवन निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ जाने से बढ़ गई है। इस कारण अब शासन को भी अतिरिक्त खर्च करना होगा।
कहीं शासकीय भवनों में लेंटर नहीं ढला, तो कहीं दीवारों पर नहीं हुआ प्लास्टर।
4 भवनों का प्रस्ताव निरस्त
शिक्षाविभाग द्वारा आरईएस को सौंपे गए स्कूल भवनों के काम में से कुछ में तो जनपद स्तर पर जमीन भी मुहैया नहीं कराई जा सकी। जिससे खरसिया के नहरपाली और जबलपुर गांव के भवन का प्रस्ताव वापस कर दिया। वहीं 2 भवनों का जमीन विवाद के कारण काम शुरू नहीं किया जा सका और इसकी राशि शिक्षा विभाग को वापस कर दी गई।