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7 वर्ष पहले
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होगया है, लेकिन इसकी उपलब्धता अभी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। ऐसे में व्यापारियों उपभोक्ता दोनों के लिए यह ट्रेनिंग काफी उपयोगी साबित होगी। भास्कर ने अभियान के दौरान कई नए विकल्प भी शासन को सुझाए। इस पर शासन ने प्रदेश के सभी निगम आयुक्तों को कागज के बैग जूट के थैले लोगों तक पहुंचाने के लिए महिलाओं को पहले प्रशिक्षित करने इसके बाद उन्हें लोन उपलब्ध करा कर उनकी आय बढ़ाने के अलावा पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए। इसी कड़ी में रायगढ़ नगर निगम द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। करीब पांच सौ से छह सौ घंटे तक इन्हें निशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी। निगम द्वारा कागज के बैग और जूट के थैले के लिए दी जाने वाली ट्रेनिंग का लाभ लेने के लिए शहर की महिलाएं महिला समूह निगम के राजस्व विभाग में पहुंच कर अपना पंजीयन करा सकती है। पंजीयन सुबह 10 से लेकर शाम 5 बजे तक किया जा रहा है। पंजीयन कराने के लिए किसी भी प्रकार की योग्यता कागजात की आवश्यकता नहीं है।

खाद्यविभाग राशन...

मेंडाली जानी है। भास्कर ने गुरुवार को अगले महीने से दाल नहीं मिलने की जानकारी दी थी जिसके बाद खाद्य विभाग भी हरकत में आया था। हाला कि इस संबंध में अभी खाद्य विभाग को संचालनालय से कोई लिखित आदेश तो नहीं मिला है लेकिन जिले में बंटने वाली करीब 4 करोड़ की सरकारी दाल के बदले हितग्राहियों को कैसे पैसे दिए जाएंगे। इसका जवाब खाद्य विभाग के पास नहीं है। जबकि दिसंबर महीने में संचालनालय से आए आदेश के तहत 7 फरवरी तक जिले के सभी राशनकार्ड धारियों का बैंक रिकार्ड खाद्य विभाग की वेबसाइड में अपलोड करना था लेकिन अब तक जिले में 42 फीसदी लोगों के ही बैंक रिकार्ड अपलोड हो सके हैं। खाद्य विभाग के मुताबिक जिले के 771 राशन दुकानों में से अब तक 1 लाख 72 हजार 976 राशनकार्ड धारियों ने ही अपने बैंक खाते सबमिट किए हैं।

डेढ़माह में तीसरी बार....

भीडाउन लाइन क्लियर नहीं हो सकी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रेनों में ओवर लोडिंग और ट्रैक दुरुस्त नहीं होने की वजह से रेल हादसे बढ़ते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बीते डेढ़ माह में मालगाड़ी की पटरी से उतरने की तीसरी बड़ी घटना सामने आई है। इसके बावजूद रेलवे खामियों के सुधार के लिए बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा है। इस तरह की घटनाओं में तुरंत राहत पहुंचाने वाली रिलीफ ट्रेन की सुविधा रायगढ़ में नहीं है। इस वजह से ट्रैक क्लियर कराने में अधिक समय लगता है। इसके लिए बिलासपुर और झारसुगड़ा दाेनों तरफ से एक-एक रिलीफ ट्रेन मंगाई जाती हैं, ताकि जल्द से जल्द से ट्रैक क्लियर कराया जा सके, लेकिन बावजूद इसके ट्रैक क्लियर कराने में रेलवे को 14 से 20 घंटे का समय लग जाता है, जबकि पैसेंजर ट्रेनों के लिए यह सुविधा यहां मौजूद है।

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