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ट्रस्ट की धर्मशालाओं का बुरा हाल सामाजिक का हो रहा सही उपयोग
शहरमें सेठ महाजनों ने जनसुविधा की भावना के साथ धर्मशालाओं का निर्माण कराया, ताकि मुसाफिरों को सस्ते में ठहरने की भरपूर सुविधा मिल सके, लेकिन वर्तमान में इनका पालन महज चंद धर्मशालाओं के माध्यम से ही किया जा रहा, तो कुछ ने लोकप्रियता को आधार बनाकर इनका व्यवसायीकरण कर दिया है। वर्तमान में स्थानीय अग्रवाल समाज द्वारा संचालित पंचायती धर्मशाला इसके लिए निशुल्क सेवा देने से भी पीछे नहीं है, लेकिन ट्रस्ट की बूजी स्वयं की रतेरिया धर्मशाला में खुलेआम व्यवसायी अपनी दुकान चला रहे हैं। समाज कल्याण के लिए पूरे शहर में सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट के माध्यम से कई प्रकार की सेवा संस्थाएं चलाई जा रही है। वही शादी ब्याह अन्य सामजिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए भवन का व्यवसायीकरण कर दोहरा लाभ लिया जा रहा है।
पंचायतीधर्मशाला स्टेशन चौक
स्टेशनचौक स्थित पंचायती धर्मशाला अग्रवाल समाज के लोगों की ओर से संचालित की जा रही है। भवन में कुल 45 कमरे हैं। जो शुरुआत में साधारण थे, आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए समाज के लोगों ने पूरे भवन का कायाकल्प कर दिया है। इस धर्मशाला में गर्म पानी की कॉमन टीवी, कमरों की साफ सफाई के साथ सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। धर्मशाला में एक साथ दो शादियां हो सके ऐसी व्यवस्था है। वही इनके द्वारा दशकर्म, स्वास्थ्य संबंधी शिविर बाहर से जरूरतंमद लोगों को निशुल्क सेवा भी देती है। साथ ही मृत्यु के बाद अस्थि रखने की संपूर्ण व्यवस्था धर्मशाला में की गई है। प्रतिमाह धर्मशाला का कुल खर्च 40 से 50 हजार रुपए है, जबकि व्यवस्थापकों द्वारा शादी में महज पहले तल का चार हजार दूसरे तल का आठ हजार रुपए लिए जाते हैं। मुसाफिरों के लिए यहां 100 से 150 रुपए मामूली किराए पर कमरे भी उपलब्ध होते हैं।
बूजीभवन, बूजी भवन चौक
सेठकिरोड़ीमल ट्रस्ट का योगदान शहर में सार्वजनिक हित के प्रतिष्ठानों के लिए कम नहीं है। स्कूल, कालेज, सरकारी भवनों में अनेक भवन ट्रस्ट द्वारा बनवाए गए हैं। ट्रस्ट के आधिपत्य की ही एक धर्मशाला है बूजी भवन धर्मशाला, लेकिन यहां अब लोगों को तो सामाजिक कार्यों के लिए जगह मिलती है और ही मुसाफिरों को कमरा। 11 माह पहले भवन का उपयोग शादी ब्याह जैसे अनेक कार्यक्रमों में उपयोग किया जाता था, जिसका किराया महज दाे हजार रुपए प्रतिदिन निर्धारित था। भवन में कुल 12 कमरे हैं। पहले तल मेें तीन कमर