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शिक्षा का व्यवसायीकरण देश के लिए खतरा: आनंद

6 वर्ष पहले
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केन्द्रऔर राज्य की सुस्ती की वजह से देश में शिक्षा के हालात दिनों-दिन खस्ता होती जा रही है। देश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गुणवत्ता और भवन जैसी अवसंरचना की स्थिति काफी दयनीय है स्कूल बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच खाई के कारण देश भर में कोचिंग संस्थानों की बाढ़ गई है और इससे शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा मिल रहा। यह शिक्षा की दुकानदारी को बढ़ा रही है यह बात सुपर -30 के संस्थापक आनंद कुमार ने जिंदल गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कही

उन्होंने कहा इस खाई को पाटने की जरूरत है, जिसमें पहले तो आईआईटी, एम्स जैसे संस्थानों की प्रतियोगी परीक्षाओं में गरीब तबके के बच्चे भी चयनित हो पाए। इसके लिए परीक्षा पाठ्यक्रम का स्तर बारहवीं बोर्ड के आधार पर होना चाहिए ताकि बच्चे अपनी खुद की पढ़ाई से इन संस्थानों में प्रवेश पा सके। इसके साथ परीक्षा में चयन का पैमाना बच्चों के स्वभाविक ज्ञान हो कि नंबर

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के प्रशिक्षण और योग्यता पर केन्द्र राज्य सरकारों को गंभीरता से ध्यान देना होगा कामचलाऊ अस्थायी शिक्षकों की भर्ती बंद हो और योग्य शिक्षकों की बहाली की जाए, जबकि योग्य शिक्षकों की आवश्यकता पर आजकल चर्चा ही नहीं हो रही है नवोदय स्कूलों की स्थिति को भी तत्काल सुधारने की जरूरत है

जिले भर से आए स्टूडेंट्स की क्लास लेते आनंद कुमार।

रायगढ़ में अपार संभावनाएं

शहरके बच्चों में शिक्षा की भूख बहुत ज्यादा है। उत्सुकतावश बच्चे सेमिनार में शिक्षा और करियर को लेकर ढेरों प्रश्न कर रहे। ये प्रश् सफलता पाने की ललक को दर्शाता है। बस जरूरत है एक भविष्योन्मुखी सकारात्मक प्रयास की प्रयास प्रशासनिक से लेकर व्यक्तिगत हर स्तर पर होना चाहिए ताकि बच्चों की प्रतिभा को तराशा जा सके। इसके लिए एक बेहतर शिक्षक और पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाए। आनंद कुमार ने सुपर -30 के संबंध में बताया कि यह एक संकल्पना है। इसमें गरीब बच्चे जिनमें पढ़ाई के प्रति लगन प्रतिभा हाेती है की मदद की जाती है। गरीब बच्चों को राह दिखाने के लिए दो स्तरों पर काम करने की योजना है पहला तो ऑनलाइन तरीके से कम खर्चे में बच्चों को पढ़ाया जाए। ताकि बच्चे एक जैसे माहौल में रहकर एक- दूसरे के दर्द को समझकर साथ आगे बढ़े। दूसरा रास्ता ऑनलाइन के जरिए मिले पैसे से अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षित किया जाए।

इंटरव्यू