लंग्स कैंसर का इलाज करने मेकाहारा में टीम तैयार

5 वर्ष पहले
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प्रदेश में रायगढ़ अव्वल स्थान पर। आधुनिक उपकरणों से किया जा रहा है अपडेट।

हेल्थ रिपोर्टर | रायगढ़

लंग्स कैंसर व श्वांस संबंधी समस्याओं के लिए मेडिकल कॉलेज की टीम पूरी तरह तैयार है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्पाइरोमेट्री, सीबी नॉट और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप समेत 16 बिस्तर वाले वार्ड की भी व्यवस्था की गई है। गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू में तीन बिस्तर अलग से रखे गए हैं, ताकि ऐसे मरीजों का विशेष ध्यान रखा जा सके और डायग्नोसिस से ही उनका उपचार किया जा सके।

प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक श्वास संबंधी बीमारियों के लिए रायगढ़ पूरे प्रदेश में अव्वल है। स्पाइरोमेट्री विंग के विशेषज्ञ बताते हैं कि वायु प्रदूषण अधिक होने के कारण अन्य शहरों की तुलना में रायगढ़ जिला अधिक खतरनाक है।

पॉल्यूशन की मॉनिटरिंग करने वाली एंजेसियों ने अन्य शहरों में इसकी आंशका 2-3% बताई है, वहीं यह रायगढ़ में 5-8% है, जो कि सामान्य पांच प्रतिशत ज्यादा है। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर फोकस कर रही है। पिछले एक साल में मेडिकल कॉलेज द्वारा जिला अस्पताल को अपने अधिकार क्षेत्र में लेने के बाद यहां कई सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की गई है।

मेडिकल कॉलेज ने जिले की स्वास्थ्य संबंधी मिलने वाले मरीजों की अधिकता को लेकर स्पाइरोमेट्री विंग भी शुरू की है। जहां कुशल डॉक्टरों की टीम के साथ-साथ आधुनिक उपकरण भी लगाए गए हैं। जिससे जांच बेहद आसान बन गया है।

18 से 20 मरीज मिले लंग्स कैंसर से पीड़ित
उपकरणों से जांच के बाद शहर भीतर 18 से 20 मरीज लंग्स कैंसर से पीड़ित पाए गए हैं। प्रारंभिक स्टेज वाले मरीजों को डायग्नोसिस से उपचारित किया जा रहा है। वहीं दूसरे और तीसरे स्टेज वाले मरीजों को रायपुर कीमो व रेडियो थैरेपी के लिए रेफर किया गया है। निजी अस्पतालों में इसके उपचार बहुत ज्यादा महंगे हैं।

उद्योगों में 10 फीसदी पीड़ित
स्वास्थ्य विभाग के जांच रिपोर्ट के अनुसार उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं आैर बच्चों में इसकी संभावना 8-10% बढ़ जाती है। इसके अलावा 40 साल से अधिक उम्र वालों में भी श्वसन क्रिया और फेफड़े प्रभावित हो जाते है। वहीं 10-20 साल तक नियमित सिगरेट पीने वालों में लंग्स कैंसर की आशंका काफी अधिक होती है।

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