सारे नियम तोड़कर करा रहे बाल मजदूरी
कई स्थानों पर देखा जा सकता है बच्चों को काम करते
भास्करन्यूज | जशपुरनगर
जिलामुख्यालय में श्रम विभाग की कार्यप्रणाली बेहद सुस्त है। विभागीय अधिकारी जिला मुख्यालय में बाल श्रमिकों की मौजूदगी को ही नकारते रहे हैं। जबकि जिला मुख्यालय में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को घर, होटल, दुकान, ढाबा आदि स्थानों में कार्य कराया जा रहा है।
हकीकत यह है कि शहर में ऐसे बच्चों को पढ़ाने वाली एक भी स्कूल संचालित नहीं है। बाल श्रम के बारे मे जिला श्रम विभाग द्वारा लगातार इनकार किया जाता है और एक भी बाल श्रमिक के नहीं कार्यरत होने की बात की जाती है। पर शहर में कई बच्चे ऐसे हैं, जो मजदूरी कर रहे हैं। बाल श्रमिकों से कार्य लिए जाने वाले लोगों के खिलाफ श्रम विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं करने से जिला मुख्यालय सहित कई स्थानों में बाल श्रमिक आसानी से देखे जा सकते हैं। बाल मजदूरी के बारे में लेबर लाॅ में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा मजदूरी को बाल मजदूरी माना गया है, इसके लिए बाल मजदूरों से मजदूरी कराने वाले लोगों के खिलाफ जुर्माना और सजा का प्रावधान है। पुरानी बस्ती सरना टोली, डीपा टोली, पनचक्की अटल आवास ऐसे इलाके हैं, जहां निचले तबके के लोगों को रहना होता है। इन इलाकों के दर्जनों बच्चे परिवार को आर्थिक मदद देने के नाम पर 7 से 10 वर्ष की आयु से ही मोहल्ले एवं आस-पड़ोस के वार्ड के व्यापारी उनसे कार्य कराते हैं। हालांकि वे प्रतिष्ठानों मे एक भी बाल मजदूर नहीं होने की सूचना तो लगवा देते है, पर दर्जनों बाल मजदूर प्रशासन की संवेदनशीलता को ठेंगा दिखाते हैं।
प्रश्न- बाल श्रम कानून के अनुसार बाल श्रमिक किसे माना जाता है
एक्सपर्ट - बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 की धारा 2 के अनुसार किसी भी दुकान वर्कशॉप, फार्म हाउस, होटल भोजनालय, टॉकीज या अन्य स्थान पर कार्यरत 16 वर्ष से काम उम्र का बालक बालिका बाल श्रमिक माने जाते है।
प्रश्न- बाल श्रम के लिए कानून क्या कहता है।
एक्सपर्ट - श्रमिक विधि के अनुसार यदि किसी बेसहारा श्रमिक को नौकरी पर रखना ही पड़े, तो नियोक्ता उसकी पूरी सूचना श्रम विभाग को देगा। इसके साथ ही उस बच्चे से 3 घंटे से ज्यादा समय मजदूरी या काम एवं इस दौरान 1 घंटे का विश्राम देना होगा। किसी भी स्थिति में बच्चे से शाम 7 बजे के बाद तथा सुबह 8 बजे से पहले काम नहीं लिया जाना है।
प्रश्न-कहां कहां बाल श्रमिकों को रखना ज्यादा खतरनाक है
एक्सपर्ट - विधि के अनुसार जिस स्थानों में बच्चों के स्वास्थ्य पर बुुरा असर पड़े, उन स्थानों में बच्चों से काम कराना पूरी तरह से निषेध है, जैसे कांच गलाने वाले कारखाने चमड़ा उद्योग आदि।
प्रश्न- सामान्य व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है या नहीं।
एक्सपर्ट- बाल श्रम देखे जाने पर कोई भी व्यक्ति पुलिस, लेबर इंस्पेक्टर या सीधे श्रम न्यायालय को शिकायत कर सकता है।
प्रश्न- कार्रवाई कौन करता है।
एक्सपर्ट- बाल श्रम को रोकने के लिए विधि ने श्रम निरीक्षक को अधिकृत किया है, वे स्वयं जांच कर नियोक्ता को नोटिस देते हैं। उसके बाद वे श्रम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर सकते है।
प्रश्न- सजा का क्या प्रावधान है।
एक्सपर्ट- बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन आधि नियम 1986 की धारा 14 के अनुसार बाल श्रम करवाने वाले नियोक्ता को 3 माह से 1 वर्ष तक का कारावास या 10 हजार से 20 हजार तक का जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
Q & A-सूरज चौरसिया, अधिवक्ता
जिले में श्रम विभाग नहीं होने से होती है लोगों को परेशानी
जिलेमें श्रम विभाग नहीं होने के कारण यहां के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाल श्रम के संबंध में यदि किसी को कोई शिकायत दर्ज करना होता है तो उन्हें रायगढ़ जिले का सहारा लेना पड़ता है।जिले में श्रम विभाग का के कोई अधिकारी कर्मचारी के नहीं रहने के कारण ही जिले में अब तक एक भी बालश्रम के मामले सामने नहीं अाए हैं और ही प्रशासन इस पर कोई ध्यान देता है।हालांकि सभी व्यवसायिक संस्थानों में बाकायदा बालश्रमिकों से काम नहीं लेने का बोर्ड चस्पा है।उसके बाद कई जगह बालश्रमिक कार्यरत हैं।