रायगढ़ । नगर विस्तार के साथ-साथ प्रतिदिन प्रति ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ है। तीन सालों रेलवे की आमदनी भी दुगुनी हो गई। आमदनी में इतनी बढ़ोतरी होने के बावजूद रायगढ़ में कई ट्रेनों का स्टापेज अब तक नहीं दिया गया। इससे लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वर्तमान में रायगढ़ रेलवे स्टेशन से होकर 74 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें मात्र 40 एक्सप्रेस और 12 पैसेंजर है, जिनका स्टापेज रायगढ़ स्टेशन पर दिया गया है। 22 ऐसी ट्रेनें स्टापेज होने की वजह से थ्रू-आउट यहां से गुजर जाती है। इनमें कुछ प्रमुख सुपरफास्ट ट्रेनों के स्टापेज का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड में काफी समय से लंबित है।
इनमें अप डाउन दोनों रूट की ट्रेनें शामिल है। ट्रेनों के स्टापेज की मांग पर हर बार रेलवे का एक ही रटा-रुटाया जवाब मिलता है कि यात्री किराया कम मिल रहा है। लेकिन पिछले चार साल के रिकार्ड पर नजर डाले तो 2011 के बाद रेलवे को प्रति ट्रेन आय में लगातार वृद्धि हुई है। 2011 में प्रति ट्रेन 149 यात्री यात्रा करते थे, जिनसे किराए के रूप में 11 हजार 2 सौ रुपए मिलते थे। 2013 में जहां यात्री संख्या बढ़कर 249 हो गई वहीं प्रति ट्रेन 22 हजार 7 सौ रुपए की कमाई हो रही है।
2014 में यात्री किराए में 14 फीसदी की बढ़ोत्तरी करने के बाद आमदनी में काफी इजाफा हुआ है। बीते तीन सालों में नगर का काफी विस्तार हुआ है। बहुत से प्लांट स्थापित हुए। इसमें काम करने के लिए दूसरे प्रदेशों से कर्मचारी और अफसर आए। इससे यात्रियाें की संख्या में इजाफा हुआ। इसके बावजूद भी ट्रेनों का स्टापेज नहीं देने से शहरवासी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
कम दूरी के यात्री अधिक- प्राप्तडाटा के अनुसार 2013 में 150 किलो मीटर सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 94 है। 500 किलो मीटर से ऊपर सफर करने वालो की संख्या 48 इनसे आमदनी13 हजार रुपए है। इसके अलावा 500 किलोमीटर से कम दूरी की सफर करने वालो की संख्या 65 है। प्रति ट्रेन 4 हजार रुपए किराया मिल रहा है।
रेलवे स्टेशन को क्लास का दर्जा दिया गया है, पर दर्जे के हिसाब से सुविधाएं नहीं दी गई। बारिश में प्लेटफार्म के शेड से पानी टपकता है। कई डिस्प्ले बोर्ड बंद पड़े हैं। टीवी में ट्रेनों की टाइमिंग नहीं बताई जा रही। पीने की पानी की जगह पीक दान बन गई है। स्टेशन के बाहर बारिश के बाद जल भराव की समस्या बनी हुई है।