रायगढ़। बुधवार को निगम सरकार ने सामान्य सभा में अपना आखिरी बजट पेश किया। सभाकक्ष में वित्त प्रभारी ने चालू वित्तीय वर्ष का बजट अौर चार प्रमुख एजेंडे पेश किए। बनाए गए प्रस्तावों में एक भी जनहित से जुड़ा मुद्दा नहीं था। सभा में इन मुद्दों पर जमकर बहस हुई। अंतत: थोड़े विरोध के बाद और पार्षदों के सुझावों पर विचार करने के आश्वासन पर बजट पास किया जा सका। खर्राघाट पर हाल ही जेएसपीएल द्वारा सीएसआर के तहत बनाए गए पुल का नामकरण सावित्री जिंदल के नाम से किए जाने का शुरू से ही विरोध हुआ। इस संबंध में आज प्रस्ताव सामान्य सभा में रखा गया था। इस पर पार्षदों ने महापौर सभापति का विरोध किया। आज सामान्य सभा में भी पार्षदों ने नामकरण का विरोध किया जिसके बाद वोटिंग कराई गई, 19 विरोध में और मात्र 9 समर्थन में मिले वोट के बाद प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया।
जेएसपीएल द्वारा लगभग 8 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर सीएसआर के तहत केलो नदी खर्राघाट पर पुल बनाया गया था। इसका लोकार्पण 22 जून को सीएम डॉ. रमन सिंह द्वारा किया गया था। निगम में सामान्य सभा की अनुमति के बगैर इस पुल का नामकरण किया गया था जिसका जमकर विरोध हुआ था। लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान बिलासपुर कमिश्नर सोनमणी वोरा ने भी नामकरण पर असहमति जताई थी और और पत्र जारी कर विधिवत नामकरण कराने के लिए कहा था।
इस पर निगम सामान्य सभा कक्ष की बैठक में प्रस्ताव रखा गया तो पार्षदों ने बवाल मचाया। पार्षदों ने विरोध करते हुए कहा कि सीएसआर के मद से बनाए गए पुल का नामकरण यूं ही किसी के नाम पर नहीं किया जा सकता। कुछ पार्षदों ने निगम के अधिकारियों पर जेएसपीएल की मदद का आरोप भी लगा दिया।
भाजपा, कांग्रेस निर्दलीय पार्षदों द्वारा नामकरण का विरोध किया जिसके बाद वोटिंग कराई गई और प्रस्ताव धराशायी हो गया। इसके समर्थन में महापौर सभापति समेत सिर्फ 9 पार्षद ही सामने आए। कुछ लोग बाहर निकल गए।
वहींकुछ पार्षद वोटिंग के दौरान सदन से बाहर चले गए।
ये प्रस्ताव किए गए निरस्त : बैठक में पांच एजेंडा शामिल किया गया था। इसमें निगम स्वामित्व के 26 दुकानों के ऊपर प्रथम तल निर्माण करने की अनुमति मांगी गई। इस पर पार्षदों ने जमकर विरोध जताया। कहा कि ऊपरी तल में दुकान निर्माण होने से ट्रैफिक की समस्या अधिक होगी। वर्तमान में जहां जहां निगम द्वारा ऊपरी तल में दुकान बनाई गई है, वहां पार्किंग की व्यवस्था है ही नहीं। लिहाजा यहां भी पार्किंग का कोई अस्तित्व नहीं है। इस पर कांग्रेस, बीजेपी सभी दलों के पार्षदों ने इसका विरोध किया।
ये प्रस्ताव हुए पास : निगमका पुनरीक्षित आय व्यय वर्ष 13/14 एवं अनुमानित आय व्यय 14/15 की स्वीकृति सामान्य सभा की बैठक में पास किया गया। वहीं निगम स्वामित्व के 18 दुकानों का नामांतरण करने का मामला एमआईसी द्वारा प्रस्तावित को सामान्य सभा बैठक में पास किया गया। वहीं दो साल पहले 12 गांव निगम क्षेत्र में शामिल हुए थे। इनमें विकास कार्य भी नहीं हुआ। बावजूद टैक्स लिया गया था। नेता प्रतिपक्ष ने ग्रामीण को टैक्स में छूट देने का मुद्दा रखा। इस पर सामान्य सभा की बैठक में निर्णय लिया गया है कि जो टैक्स वसूल किया गया है उसे इस साल के टैक्स वसूली में समायोजन किया जाएगा।
9.लंबित योजना राजनीति के कारण अधर में
राजनीति चरम पर होने की वजह से कुछ प्रमुख विकास कार्य अधर में लटका हुआ है। इसमें प्रमुख रुप से संजय मार्केट का निर्माण, बस टर्मिनल का निर्माण, सिटी बस योजना,
विवाह स्थल का निर्माण कार्य, गांधी गंज के सामने पार्किंग व्यवस्था सह काम्पलेक्स निर्माण, विभिन्न स्थानों में काम्पलेक्स निर्माण सहित अन्य विकास कार्य अधर में लटका हुआ है। इनमें से कुछ निर्माण कार्याे का खाका चार साल पहले तैयार किया गया था। मगर राजनीति के भेंट चढ़ गया है।
10. धूमधाम से चलाई गई थी सिटी बस
वैसे पिछले साल धूमधाम से शहर में सिटी बस चलाई गई थी। लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर करीब एक दर्जन बसें कुछ दिन चलाई गई। मगर शहर की कुछ संकरी सड़कों के अलावा यात्रियों की कमी और भारी विरोध के कारण यह योजना भी धराशायी हो गई। अब इसे पुन चलाने की योजना बनाई गई है।
11. सीएसआर से गार्डन का निर्माण विरोधाभास
इतवारी बाजार में गार्डन का निर्माण सीएसआर राशि से किया जाना है। लेकिन इस पर विरोधाभास है। आधे पार्षद सहमति दे रहे हैं तो आधे इस पर असहमत है। इसकी वजह से इसका निर्माण भी खटाई में है।
12. चांदनी चौक को जाम से मिलेेगी निजात
वर्षाे पुरानी बनी चांदनी चौक के पास ही एक और ब्रिज बनाने का प्रस्ताव निगम प्रशासन द्वारा रखा गया है। ऐसे में इसके निर्माण से वर्तमान पुलिया की संकरी होने के कारण रोजाना बार बार चौक पुल के पास जाम लग जाता है। साथ ही कभी भी इसके धराशायी होने की संभावना बनी है। लिहाजा इससे चांदनी चौक वासियों के साथ आसपास के लोगों को राहत मिलेगी।
महापौर ने विधायक को बुलाया पर उनके बैठने के स्थान को लेकर करनी पड़ी माथापच्ची।
बजट की खानापूर्ति : वैसे तो नगर निगम में हर 90 दिनों के बाद सामान्य सभा की बैठक होती है। मगर रायगढ़ निगम प्रशासन में नगरीय निकाय का नियम कहा चलता है। बजट में रखे गए प्रस्तावों में ज्यादातर को शासन ने या ताे स्वीकृत कर दिया है या विभिन्न नगर निगमों के लिए सरकार द्वारा बनाई गई योजना को इस बजट में प्रस्तावित किया गया। विपक्षी पार्षदों समेत ज्यादातर लोगों का मानना है कि निगम की सामान्य सभा में रखा गया बजट सरकार द्वारा पूरी की गई औपचारिकता है।
नामकरण का विरोध : खर्राघाट में जिंदल कंपनी द्वारा सीएसआर मद से बनाए गए पुल नामकरण का विरोध पार्षद नेता प्रतिपक्ष जयंत ठेठवार, रामकृष्ण खटर्जी, नवधा बाई, पदमा रात्रे, सुख बाई, संजना शर्मा, लता साहू, योगेश्वरी यादव, आसिया बानो, मुक्ति नाथ, अशोक यादव, गुरू चरण भट्ट, सावन चौहान, श्रवण सिदार, अरूण कातोरे, कौशलेश मिश्रा, आशीष ताम्रकार, चंद्र प्रकाश पांडेय और शरद शराफ ने सावित्री देवी जिंदल नामकरण पर आपत्ति दर्ज कराई। कुछ पार्षद वोटिंग के दौरान उठकर बाहर चले गए।
इन पर भी हुआ विवाद
- नेताप्रतिपक्ष द्वारा 2014/15 नगर पालिका निगम रायगढ़ के पुनरीक्षित आय व्यय का बजट पेश करने पर कहा कि जब प्रस्तावों को शासन ने स्वीकृति दे दी है तो फिर बजट पेश क्यों किया जा रहा है।
- इसी तरह उन्होंने पिछले छह महीने से बिना प्रावधान के हुए कार्यों काे गलत बताते हुए कार्रवाई की मांग की और लाल टंकी पर भी सवाल खड़े किए।
- साथ ही जयंत ठेठवार के द्वारा बजट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई प्रावधान नहीं रखने पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि रायगढ़ वासियों को प्रदूषण से बचाने के लिए इस पर काम करना चाहिए और डस्ट बीन योजना, शासकीय स्कूलों में मरम्मत के लिए भी प्रावधान रखने चाहिए। जिस पर सभी पार्षदों ने हामी भरी।
- बजट पर पार्षद बब्बल पांडेय सुनील थवाईत ने क्षेत्रवाद का आरोप लगाया।
- सुगम चंद फरमानिया ने सवाल उठाए कि निगम की जितनी आय हो रही है उतना व्यय क्यों नहीं हो रहा।
- सीएसआर मद से होने वाले निर्माण कार्याे पर नामकरण पर जमकर बवाल हुआ और आने वाले दिनों में इसे किसी विशेष योगदान देने वाले व्यक्ति के खिलाफ करने की मांग रखी गई।
- एल्डरमेन आलोक सिंह ने जिंदल नामकरण की बात महापौर, सभापति अन्य सदस्यों पर सीएम से छिपाने की बात कही।
- महापौर सभापति के साथ आयुक्त से पार्षद अनूप रतेरिया ने इतवारी बाजार में निर्माण गार्डन का उदाहरण देते हुए कहा कि निगम के पदाधिकारी पार्षद को भी इस बात की जानकारी देना उचित नहीं समझते कि उनके वार्ड में क्या निर्माण हो रहा है। लिहाजा भविष्य में इस तरह की निर्माण होने पर पार्षदों को भी अवगत कराने की बात कही।
निगम के अंतिम बजट 2014-15 पर एक नजर
- अनुमानित आय396.63करोड़ रुपए
- अनुमानितव्यय 397.56करोड़ रुपए
-अनुदानआय प्राप्त होने की अनुमानित आय 334.07करोड़रुपए
-निगमके साधनों से आय प्राप्त करने का लक्ष्य 393.78कराेड़रुपए
- निगमकर्मियों के लिए वेतन एरियर्स, महंगाई भत्ता आकस्मिकता व्यय 183.80करोड़रुपए जो शुद्ध आय का 46.67प्रतिशत है।
-2014/15 केबजट आय में आय रुपए 396.64करोड़रुपए से नगर के विकास कार्य, मरम्मत रख रखाव के लिए 359.44करोड़खर्च करने का प्रावधान है। जो कुल आय का 90.62प्रतिशतहै।
नगर निगम की अंतिम सामान्य सभा| खर्राघाट पुल नामकरण प्रस्ताव गिरा औंधे मुंह, बगैर पार्किंग व्यवस्था के दुकान बनाने के प्रस्ताव का विरोध।