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मात्र दो पौधे मिले, 3.35 की बजाए साढ़े 4 लाख का एक पौधा

7 वर्ष पहले
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आमापालफलोउद्यान की जांच जिला पंचायत सीईओ ने पूरी कर ली है। जांच में जो बात सामने आई उसके अनुसार वन विभाग को एक पौधा 3 लाख 35 हजार के बजाए साढ़े 4 लाख रुपए का पड़ा। दरअसल मौके पर जांच अधिकारी को 7 पौधे भी नहीं मिले। हालांकि वन विभाग ने यहां 23 लाख रुपए नहीं, बल्कि करीब साढ़े 9 लाख रुपए को खर्च किया है। बहरहाल सीईओ ने कलेक्टर को रिपोर्ट सौंप दिया है। अब आगे की कार्रवाई कलेक्टर मुकेश बंसल करेंगे।

25 जुलाई को दैनिक भास्कर द्वारा आमापाल फलोउद्यान का मामला उजागर किया गया था। इसके बाद कलेक्टर ने इस मामले की जांच का जिम्मा जिला पंचायत के सीईओ को सौंपा था। भास्कर को मौके पर जहां 7 पौधे मिले थे, वहीं जांच अधिकारी को महज दो पौधे मिले है। वन विभाग के खर्च पर 7 पौधे के हिसाब से एक पौधे की कीमत भास्कर टीम ने जहां 3 लाख 35 हजार रुपए आंकी थी, वहीं सीईओ के जांच में इसकी कीमत और बढ़ गई। जांच में यह बात सामने आई है कि विभाग ने 9 लाख 38 हजार 618 रुपए खर्च किए है। इस हिसाब से एक जिंदा पौधे की कीमत साढ़े 4 लाख रुपए से भी अधिक पड़ रही है। जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर वन विभाग ने इंदिरा विहार के तर्ज पर आमापाल विवेकानंद फलोद्यान बनाया है। 4 साल पहले इसका निर्माण शुरू हुआ था। तात्कालीन डीएफओ आशुतोष मिश्रा, कलेक्टर अशोक अग्रवाल तात्कालीन एसपी स्व. राहुल शर्मा इस उद्यान में फूल के पौधे लगाकर इस उद्यान का स्वरूप दिया था। शुरुआती दौर में इसमें करीब 10 लाख रुपए खर्चकर 459 पौधे और 2 हजार 841 फूल के पौधे लगाए गए। इनमें पौधों में गुलाब, बैगेनबोगिया, करम, गुलमोहर, आम, काजू, बादाम, बिही सहित अन्य फूल फल शामिल थे। 2012 में कलेक्टर ने सीएसआर मद से गार्डन के विकास के लिए 13 लाख 67 हजार रुपए दिए। वन विभाग के अफसरों ने पैसों का खर्च तो शो कर दिया पर पौधों के रखरखाव में ध्यान नहीं दिया। इस वजह से मौके से जहां उद्यान का गेट चोरी हो गया वहीं चौकीदार को तनख्वाह नहीं मिलने की वजह से उसने नौकरी छोड़ दी। लिहाजा देखरेख की अभाव में आम, बादाम काजू के 7 पेड़ बचे है। अब सीईओ ने जांच की तो मामला और भी गंभीर हो गया। भले ही वन विभाग द्वारा इसमें करीब दस लाख रुपए खर्च करना पाया गया है, मगर पौधे जीवित दो ही मिले हैं।

25 जुलाई को छपी खबर।

^मैने जांच किया है। मौके पर दो पौधे 15/20 फूल मिले है। गेट चोरी हो गया