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डीजल खर्च भी नहीं निकल रहा इसलिए बंद हुई सिटी बस सेवा

5 वर्ष पहले
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डेढ़ लाख से भी अधिक आबादी और 40 किलोमीटर क्षेत्र के शहर में सड़कों पर दौड़ने वाली सिटी बसों का डीजल खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है। 20 में से 5 बसों के साथ शुरू हुई सेवा अब 2 बसों पर ही सिमट गई है। नुकसान के कारण बस संचालक बस सेवा जारी रखने के मूड में नहीं हैं।

एक बार फेल होने के बाद दोबारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना सिटी बस सेवा का सीएम डा. रमन सिंह के हाथों शुभारंभ हुआ था, तो इसे शहरवासियों के साथ-साथ दूर दराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए सौगात होने का ही दावा किया गया था। आवश्यक सवारी के न मिलने और पर्याप्त तैयारी नहीं होने के कारण सेवा योजना दम तोड़ रही है। शुरुआत से ही संबंधित विभाग ने बसों के परिचालन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। खासकर न तो रूट चार्ट निर्धारित किए जा सके थे, और न ही किराया राशि तय की गई थी। फलस्वरूप सिर्फ 5 बसों को ही सड़कों पर उतारा जा सका। जबकि शेष 15 बसे उर्दना पुलिस लाईन में धूल खाती ही नजर आई। इस दौरान बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने बसों की संख्या बढ़ाने पर कोई ध्यान देने में दिलचस्पी नहीं ली। लिहाजा बसों की संख्या बढ़ने के बजाय अब और सिमट कर दो पर जा पहुंची है, जिसे भी समय पर चलाना जरूरी नहीं समझा जा रहा है। इधर बस मालिकों ने बस के परिचालन से तौबा करना शुरू कर दिया है। इसके पीछे सवारी की कमी है, जिसके कारण डीजल खर्चा भी वसूल नहीं हो पा रहा है।

जिला परिवहन विभाग लगातार कम होते बसों की संख्या से चिंतित होकर अब बस मालिकों की क्लास लेने में लगा हुआ है, लेकिन इस बीच बस संचालकों का साफतौर से कहना है कि न तो डीजल का खर्चा और न ही ड्राइवर का वेतन दे पा रहे है। ऐसी स्थिति में बसों का परिचालन संभव हो तो आखिर कैसे।

बिना किसी योजना के सिटी बसों को चालू करने का खमियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है। शुरुआत में भी इक्का दुक्का बसें नजर आती थी और वर्तमान में भी यही स्थिति बनी हुई है। इस वजह से लोग अब मजबूरी में ही सही, लेकिन ऑटो का ही सहारा लेते दिखाई दे रहे है। इस एवज में उनकी जेबें तो ढीली हो रही है, साथ ऑटो चालकों की मनमानी का भी सामना करना पड़ रहा है।

हमें बता दे हम क्या करें
यात्री परेशान, ऑटो का ही सहारा
बस मालिकों का कहना है कि उन्हें डीजल का भी खर्चा नहीं मिल पा रहा है। वे क्या करें मजबूर हैं। वैसे मामला गंभीर है। इसलिए अब फिर से बैठक लेकर सभी बसों का चालू करने दबाव बनाया जाएगा। वीके अनंत, जिला परिवहन अधिकारी

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