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आरईएस की लापरवाही से 80 भवन अधूरे

7 वर्ष पहले
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(कहीं शासकीय भवनों में लेंटर नहीं ढला, तो कहीं दीवारों पर नहीं हुआ प्लास्टर।)
रायगढ़। शिक्षा और ट्राइबल विभाग के अधीन लगभग 80 स्कूल भवनों का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) द्वारा कराया जा रहा है। विभाग की ढिलाई के कारण दो साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी काम पूरे नहीं हुए हैं। ये भवन प्राइमरी मिडिल स्कूलों के लिए बनने हैं। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से एक ओर जहां विद्यार्थियों को भवन नहीं मिल पा रहे हैं वहीं देर के कारण निर्माण की लागत बढ़ गई है, जिसके बाद आरईएस ने शिक्षा ट्राइबल विभाग से अतिरिक्त फंड मांगा है।
लागत बढ़ गई इसलिए आरईएस ने निर्माण कार्य बंद भी कर दिया है। स्कूलों के भवन निर्माण की प्रमुख एजेंसी आरईएस का काम बिल्कुल ढीला है। पिछले चार सालों में शिक्षा ट्राइबल विभाग ने लगभग 80 स्कूल भवनों के लिए आरईएस को डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी थी, लेकिन कछुआ गति से काम करने के कारणना तो इनका निर्माण पूरा हो सका और ना ही दोनों विभागों ने इसमें कोई तत्परता दिखाई। जिससे निर्माण के लिए दी गई राशि में से आरईएस भी 73 लाख रुपए खर्च नहीं कर सका। अब स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इनका निर्माण पूरा होने का इंतजार है वहीं निर्माण की लागत बढ़ जाने के कारण 56 भवनों के लिए आरईएस ने अपने हाथ खींच लिए हैं और दोबारा से एस्टीमेट बनाकर शिक्षा विभाग से अतिरिक्त फंड मांगा है।

लागत बढ़ने से नुकसान : सालों पहले स्वीकृत हुए इन भवनों के निर्माण के लिए जो राशि जारी की गई थी उसकी लागत अब भवन निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ जाने से बढ़ गई है। इस कारण अब शासन को भी अतिरिक्त खर्च करना होगा।
4 भवनों का प्रस्ताव निरस्त
शिक्षाविभाग द्वारा आरईएस को सौंपे गए स्कूल भवनों के काम में से कुछ में तो जनपद स्तर पर जमीन भी मुहैया नहीं कराई जा सकी। जिससे खरसिया के नहरपाली और जबलपुर गांव के भवन का प्रस्ताव वापस कर दिया। वहीं 2 भवनों का जमीन विवाद के कारण काम शुरू नहीं किया जा सका और इसकी राशि शिक्षा विभाग को वापस कर दी गई।
5 साल से लटके हैं काम
आरईएसद्वारा जिन स्कूल भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। उनमें ज्यादातर तो साल 2011 एवं 2012 के हैं लेकिन इनमें से कुछ स्कूल भवनों का प्रपोजल तो वर्ष 2008 और 2009 का भी है। सारंगढ़ के गंतुली और खरसिया के तेलीकोट मिडिल स्कूल भवन इसके उदाहरण हैं।
जनप्रतिनिधियों और पीएचई विभाग के अफसरों के लापरवाही के कारण पंडरीपानी में स्कूल भवन का निर्माण अभी तक अधूरा है।
केस 1- रायगढ़ के पंडरीपानी में प्राइमरी व मिडिल स्कूल के लिए जनवरी 2012 में शिक्षा विभाग ने 10 लाख रुपए आरईएस को जारी किए। अनुबंध के अनुसार अगस्त 2013 तक काम पूरा करना था लेकिन अब तक भवन की ढलाई ही पूरी हो सकी है और 8 माह से काम बंद है। पुसौर के टिनमिनी में पौने चार लाख रुपए की लागत से नए शाला भवन के लिए 3 साल पहले प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन आरईएस इसमें काम ही शुरू नहीं कर सका जिससे वर्क आर्डर केंसल कर 4 महीना पहले शिक्षा विभाग को राशि वापस कर दी गई।
केस 2 : पुसौर के टिनमिनी में पौने चार लाख रुपए की लागत से नए शाला भवन के लिए 3 साल पहले प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन आरईएस इसमें काम ही शुरू नहीं कर सका जिससे वर्क आर्डर केंसल कर 4 महीना पहले शिक्षा विभाग को राशि वापस कर दी गई।
ब्लॉक वार निर्माणाधीन भवन
विकासखंड लंबित भवन

- खरसिया 20
- सारंगढ़ 4
- रायगढ़ 4
- पुसौर 1
- तमनार 5
- घरघोड़ा 5
- धरमजयगढ़ 7
- लैलूंगा 25
- बरमकेला 8
कुल 80
सीधी-बात| हैंडओवर में हुई देरी
केके किंडो, ईई,आरईएस
Q.आरईएस द्वारा कितने स्कूल भवनों का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जा सका है।
उत्तर- जिले में करीब 80 स्कूल भवनों के निर्माण कार्य चल रहे हैं। 6 में काम पूरा हो चुका है।
Q. स्वीकृति के बाद भी 4-4 सालों से काम क्यों लटके हुए हैं।
उत्तर - ज्यादातर काम 2 साल पहले जनपद स्तर से हैंडओवर हुए हैं। इसलिए पेंडिंग संख्या ज्यादा है।
Q. पंडरीपानी स्कूल भवन का काम 3 साल में भी क्यों पूरा नहीं हो सका है।
उत्तर - काम रूकने की तो जानकारी नहीं है पता करके आपको बताता हूं।
Q.लागत बढ़ने से कितने स्कूल भवनों के लिए अतिरिक्त रकम मांगी गई है।
उत्तर- हमने शिक्षा विभाग से 57 स्कूलों के लिए अतिरिक्त रकम मांगी है।
Q. लंबित भवनों को पूरा करने के लिए आपके पास क्या वर्किंग प्लान है।
उत्तर- मार्च 2015 तक सबको पूरा करने की कोशिश करेंगे।


4 भवनों का प्रस्ताव निरस्त : शिक्षाविभाग द्वारा आरईएस को सौंपे गए स्कूल भवनों के काम में से कुछ में तो जनपद स्तर पर जमीन भी मुहैया नहीं कराई जा सकी। जिससे खरसिया के नहरपाली और जबलपुर गांव के भवन का प्रस्ताव वापस कर दिया। वहीं 2 भवनों का जमीन विवाद के कारण काम शुरू नहीं किया जा सका और इसकी राशि शिक्षा विभाग को वापस कर दी गई।
5 साल से लटके हैं काम : आरईएसद्वारा जिन स्कूल भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। उनमें ज्यादातर तो साल 2011 एवं 2012 के हैं लेकिन इनमें से कुछ स्कूल भवनों का प्रपोजल तो वर्ष 2008 और 2009 का भी है। सारंगढ़ के गंतुली और खरसिया के तेलीकोट मिडिल स्कूल भवन इसके उदाहरण हैं।

जनप्रतिनिधियों और पीएचई विभाग के अफसरों के लापरवाही के कारण पंडरीपानी में स्कूल भवन का निर्माण अभी तक अधूरा है।