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अमूल की तर्ज पर सहकारिता का सहारा ढाई साल में 5 गुना हुआ दूध उत्पादन

5 वर्ष पहले
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अमूल की तर्ज पर सहकारिता का सहारा लेकर पिछले ढाई साल में दूध का उत्पादन 5 गुना तक जा पहुंचा है। सरकारी से सहकारी डेयरी होने के बाद जिले में भी छग राज्य दुग्ध महासंघ द्वारा संचालित डेयरी में दुग्ध उत्पादक समितियों की संख्या बढ़ी है और नेशनल डेयरी फेडरेशन से ट्रेनिंग लेने के बाद इससे जुड़े किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है। उत्साहित करने वाली बात यह है कि न केवल दूध उत्पादकों की संख्या बढ़ी है बल्कि उत्पादन भी पहले से बेहतर हुआ है।

शहर के राजीव नगर में संचालित शासकीय डेयरी का अप्रैल 2013 में छग राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा टेक ओवर किया गया था। सालों से वेटरनरी डिपार्टमेंट द्वारा चलाने के बाद शासन ने रायगढ़ डेयरी के संचालन के लिए भी फेडरेशन को जिम्मा दिया था। फेडरेशन ने पहले दिन से ही दूध के दाम बढ़ाकर समय-समय पर इसमें बढ़ोतरी जारी रखी और दूसरी ओर डेयरी के विस्तार एवं दूध के उत्पादन व संग्रहण के लिए भी प्रयास जारी रखा। हैंडओवर के समय रायगढ़ डेयरी से करीब 46 समितियां जुड़ी हुई थी और इससे रोजाना करीब साढ़े 3 हजार लीटर दूध का उत्पादन हुआ करता था लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। पहले बरमकेला व सारंगढ़ तक ही सिमटी दूध उत्पादक समितियां वर्तमान में पुसौर, लैलूंगा, रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ मेें भी काम करने लगी हैं और डेयरी से जुड़ी समितियों एवं दूध उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या को बढ़ाने के लिया किया गया प्रयास दिखने लगा है। फेडरेशन से जुड़ी समितियों की संख्या बढ़कर जिले में वर्तमान में 138 तक जा पहुंची है और बीते डेढ़ साल से दुग्ध महासंघ ने इन समितियों से 2-2 सदस्यों को नेशनल डेयरी फेडरेशन आणंद गुजरात में ट्रेनिंग देकर सहकारिता का पाठ पढ़ाया। ट्रेनिंग में विशेषज्ञों द्वारा ग्रामीणों को सहकारिता से जुड़कर दूध उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आमदनी के गुर सिखाए गए और अब इसका असर भी देखने को मिलने लगा है।

शहर के राजीव नगर में संचालित शासकीय डेयरी में सप्लाई के पहले जांच करते कर्मचारी।

18 हजार लीटर पहुंचा उत्पादन
18 हजार लीटर पहुंचा उत्पादन
सारंगढ़ में नया चीलिंग सेेंटर

सारंगढ़ बरमकेला मार्ग जिले में पहले से मिल्क रूट रहा है और यहां दूध उत्पादन अधिक होने से फेडरेशन ने भी इसे रायगढ़ लाने की जगह वहीं पर स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग के लिए व्यवस्था की है। सारंगढ़ में 9500 लीटर का चीलिंग सेंटर बीते साल लगाने के बाद लेन्ध्रा, गोबरसिंघा और बरपाली में भी कुल 9 हजार लीटर क्षमता वाले बल्क मिल्क कूलर लगाए हैं।

सहकारी समितियों एवं इनसे जुड़े किसानों की संख्या में बढ़ोतरी से दूध का उत्पादन भी पहले से करीब 5 गुना तक बढ़ गया है और वर्तमान में दूध का संग्रहण रोजाना 18 हजार लीटर तक जा पहुंचा है। हालांकि इसके साथ बिक्री के आंकड़ों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से रोजाना करीब 15 से 16 हजार लीटर दूध जिले से बाहर भेजना पड़ रहा है।

मनरेगा से बढ़ाएंगे दूध का उत्पादन
छग को दूध उत्पादन में सरप्लस स्टेट बनाने के लिए शासन ने एक टास्क फोर्स बनाई थी और इस कमेटी ने अपनी जो अनुशंसा दी है। उनमें मनरेगा में भी दूध उत्पादक समितियों के लिए काम करने कहा है। इसके लिए गांवों में दुधारू पशुओं हेतु शेड बनाने, यूरिन टैंक निर्माण, अजोका इकाई एवं चारे के लिए ब्लाक प्लांटेशन जैसे काम भी अब कराए जाएंगे, ताकि दूध का उत्पादन बढ़ सके।

गुजरात में ट्रेनिंग के बाद समितियों एवं किसानों का हौसला बढ़ा है। जिले में रोजाना 18 हजार लीटर दूध का कलेक्शन कर रहे हैं और इससे जुड़ी समितियों एवं किसानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। विनय कुमठेकर, असि. मै. रायगढ़ छग सदुम.

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