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अब कैदियों को दर्जी बनने दिया जाएगा प्रशिक्षण

5 वर्ष पहले
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जिला जेल के कैदियों को कौशल उन्नयन योजना के तहत कपड़ा सिलने और फर्नीचर बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। सजा पूरी होने के बाद उन्हें स्वरोजगार के योग्य बनाने के लिहाज से टेलरिंग व कारपेंटरी सिखाई जाएगी। इस योजना पर काम फरवरी से होना था लेकिन कैदियों की ज्यादा संख्या और जगह कम होने के कारण इसे जेल में नए बैरक बनने के बाद अप्रैल से शुरू किया जाएगा। अब जिला जेल के कैदियों को हुनरमंद बनाने की कवायद शुरू हुई है। अप्रैल महीने से शुरू होने वाली योजना की शुरुआत में एक दर्जन टेलरिंग मशीन मुहैया कराने के साथ-साथ बढ़ई से संबंधित सामान भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि बंदियों को दोनों कार्य में पूरी तरह से पारंगत कराया जा सकते। बंदियों को कारपेंटरी और टेलरिंग का प्रशिक्षण पहले भी दिया गया है लेकिन जगह के अभाव और लगातार बढ़ते बंदियों की संख्या के चलते प्रशिक्षण केंद्र को बंद कर दिया गया। ऐसे में एक बार फिर से जेल में इसकी शुरुआत होने से गुनाह के रास्ते में उतरने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिल जाएगा। जेल प्रशासन का मानना है कि कौशल उन्नयन योजना के तहत न केवल बंदियों को हुनर सीखने को मिलेगा बल्कि इससे होने वाली आय से कैदियों की कमाई भी हो जाएगी।



बंदियों को दर्जी और बढ़ई का प्रशिक्षण देने के पीछे मकसद समाज में इन्हें पहचान दिलाते हुए आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे जब अपनी सजा पूरी कर जेल से बाहर निकले तो रोजगार के लिए यहां वहां न भटके बल्कि अपनी दुकान खोल अपने परिवार का गुजर बसर अपने मेहनत के दम पर कर सके।

माह अप्रैल 2016 से बंदियों को टेलरिंग और कारपेंटर का कार्य सिखाने ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बाहर निकलकर स्वयं का रोजगार शुरू कर सके। जीएस शौरी, जेल अधीक्षक

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