बिना ऑडिट के सालों से चल रहा है अंत्यावसायी विभाग
जिला अंत्यावसायी विभाग बीते 13 सालों से आडिट के बिना ही चल रहा है। सहकारी समिति होने के कारण विभाग को हर साल बैलेंस शीट पेश कर सहकारिता विभाग से ऑडिट कराना जरूरी होता है और पेट्रोल पंप में होने वाले करोड़ों के लेनदेन के रिकार्ड पेश करने होते हैं लेकिन अब एससी कमीशन की फटकार के बाद विभाग ने आडिट कराने के लिए वित्तीय प्रलेख तैयार करने शुरू कर दिए हैं।
सरकारी पेट्रोल पंप का संचालन करने वाले अंत्यावसायी विभाग ने सालों से नहीं हुई ऑडिट के बाद अब जाकर इसकी तैयारी शुरू की है और हफ्ते भर पहले जिले में ट्राइबल पेट्रोल पंप एवं अंत्यावसायी विभाग के पूर्व सीइओ के विवादित कार्यकाल की जांच के लिए आई एससी कमीशन के दौरे के बाद आडिट की सुगबुगाहट बढ़ी है। दरअसल सहकारी समिति होने के कारण जिला अंत्यावसायी विभाग पर सहकारिता विभाग के ही नियम-कानून लागू होते हैं और उसके मुताबिक हर साल विभाग को अपनी आडिट करानी जरूरी होती है।
इसके लिए विभाग की ओर से नियमानुसार सहकारिता विभाग को आवेदन देना होता है और वित्तीय पत्रक पेश कर समिति की आय-व्यय का आडिट कराना होता है लेकिन पूर्व सीइओ आरसी शर्मा ने अपनी गलतियां छिपाने के लिए सालों से आडिट नहीं कराई थी और साल 2003 के बाद से अब तक बिना आडिट के ही विभाग में कामकाज चल रहा था लेकिन अब विभाग ने अपनी छवि सुधारने के लिए पुराने रिकार्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं और सहकारिता विभाग द्वारा आडिट के लिए मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कर्मचारियों ने मेहनत शुरू कर दी है।
पेट्रोल पंप में 26 साल से जांच नहीं .....
अंत्यावसायी विभाग द्वारा ट्राइबल पेट्रोल पंप का संचालन किया जाता रहा है लेकिन हर साल होने वाली आडिट बीते 26 सालों में एक बार भी नहीं हुई। विभाग के पूर्व सीइओ आरसी शर्मा ने ऑडिट के लिए कोई कदम नहीं उठाया और सालों तक पेट्रोल पंप बिना किसी हिसाब-किताब के चल रहा है।
हितग्राहियों को लोन देने में भी कंजूसी ....
एससी एसटी हिताग्राहियों को विभाग द्वारा स्वरोजगार हेतु विभिन्न योजनाओं के तहत लोन उपलब्ध कराया जाता है लेकिन सरकारी अनुदान के साथ मिलने वाले इस लोन का टार्गेट भी बीते 10 सालों में कभी पूरा नहीं किया जा सका था लेकिन कलेक्टर की फटकार के बाद इस बार विभाग द्वारा 95 प्रतिशत लोगों को लोन दिया जा चुका है, जबकि अभी दो माह से ज्यादा का समय बचा है।
ऑडिट कराने के लिए विभाग द्वारा वित्तीय प्रलेख तैयार किए जा रहे हैं। पेट्रोल पंप की भी आडिट 25 सालों से नहीं हुई है। आयोग ने भी इसके लिए अपनी आपत्ति जताई थी और विभाग भी जल्द ही अपनी आडिट की प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास करेगा।\\\'\\\' पीके शर्मा, सीइओ, अंत्यावसायी विभाग