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डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी एक्ट के तहत नहीं होती कार्रवाई
शहरकी सड़कों पर रातभर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान तो है ही, शहर की सड़कें भी खराब हो रही हैं। ओवरलोड वाहन कई बार सड़क पर लोगों की जान भी लेते हैं। लगभग दो वर्ष पूर्व राज्य में सड़कों की खस्ता हालत को देखते हुए छत्तीसगढ़ के परिवहन मंत्री राजेश मूणत भड़के थे और उन्होंने कहा था कि ओवरलोड पर रोक लगाई जानी चाहिए और बात बने तो डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। इस फरमान के बाद ट्रांसपोर्टर्स में हड़कंप मचा लेकिन रायगढ़ जिले में आरटीओ या यातायात विभाग ने इस एक्ट के तहत एक भी कार्रवाई नहीं की।
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टरों ने कई बार ओवरलोड परिवहन पर रोक लगाने के फरमान जारी किए हैं लेकिन इस पर संबंधित विभागों ने ज्यादा रूचि नहीं ली है। ट्रांसपोर्टर्स द्वारा ओवरलोड बंद करने से वाहन भाड़ा महंगा होगा और इससे महंगाई बढ़ेगी जैसे तर्क दिए जाने पर विभागों ने ओवरलोड परिचालन को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकृति दी हुई है। जानकारों के मुताबिक सड़कों का निर्माण उस पर चलने वाले वाहनों की अनुमानित संख्या और आरटीओ द्वारा तय वाहनों की परिवहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। ऐसी सड़कों पर जब वाहन परिवहन क्षमता से ज्यादा वजन लेकर चलते हैं तो सड़कों पर अतिरिक्त दबाव होता है और सड़कें जल्दी खराब होती हैं।
Q. शहर में ओवरलोड वाहन गुजर रहे हैं। कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
{{उत्तर : पुलिस और आरटीओ इस पर कार्रवाई करते हैं।
Q. यातायात विभाग ने एक बार डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की थी, आप क्यों नहीं कर रहे कार्रवाई।
{{मेरी ड्यूटी इस समय क्रिकेट लीग में लगी है। आकर इस पर कार्रवाई करूंगा।
Q. कितने दिनों में वापस आएंगे।
{{वापस आने में 15 दिन लग सकते हैं।
देर रात शहर के बीच से गुजरता ट्रक।
क्या है डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी एक्ट
मार्च1984 में देश में डैमेज टू पब्लिक प्रापर्टी एक्ट लाया गया। इसके सेक्शन 3 के मुताबिक सड़क या किसी भी सरकारी संपत्ति के नुकसान पर दोषी को छह माह से 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया। सामान्य कार्रवाई में आरटीओ या ट्रैफिक विभाग ओवरलोड परिवहन पर जुर्माना लगा कर छोड़ देते हैं, लेकिन इस अधिनियम के तहत वाहन चालक या वाहन स्वामी को न्यूनतम छह माह तक के कार