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स्ट्रीट लाइट में लगा दें एलईडी तो हर साल बचेंगे सवा करोड़ रुपए

6 वर्ष पहले
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लोकेंद्र सिंह ठाकुर | रायगढ़ @singhlokendra

शहरकी सड़कों में लगे 7 हजार से अधिक खंभों में एलईडी बल्ब से निगम की बिजली खपत 31 लाख यूनिट तक कम की जा सकती है और निगम के बिजली के बिल में भी सालाना सवा करोड़ रुपए तक बचाए जा सकते हैं। निगम द्वारा शहर में सड़क और गली माेहल्लों को रोशन करने के लिए कुल 72 सौ स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। जिससे हर साल बिजली की खपत 45 लाख 83 हजार यूनिट है।निगम के रिकार्ड में इसका सालाना खर्चा करीब एक करोड़ 60 लाख है। स्ट्रीट लाइट में नगर निगम द्वारा वर्तमान में सोडियम बल्ब, सीएफएल और एलईडी बल्ब का उपयोग किया जा रहा है। बिजली विभाग और जानकारों के मुताबिक यदि इसकी जगह इन सभी पर एलईडी बल्ब लगा दिया जाए, तो हर साल 31 लाख 80 हजार यूनिट बिजली बचाई जा सकती है जिससे निगम को भी बिजली बिलके रूप में करीब सवा करोड़ की बचत भी हो सकेगी।शहर के 48 वार्डों में स्ट्रीट लाइट के लिए जिस बल्ब का उपयोग किया जा रहा है। उसमें 250 वाट के सोडियम, 85 वाट के सीएफएल और 45 वॉट के एलईडी बल्ब शामिल है। सबसे अधिक संख्या सीएफएल और फिर सोडियम बल्ब की है। रोजाना 10 लाख 16 हजार किलो वॉट तो हर महीने 3 लाख 65 हजार यूनिट बिजली की खपत होती है। वहीं सिर्फ सौ एलईडी बल्ब है, रोजाना 540 किलो वॉट बिजली और महीने में 1 लाख 6 हजार यूनिट की खपत है। सभी को मिला कर देखा जाए तो यह 45 लाख यूनिट सालाना होती है। जिसके लिए निगम को हर माह एक बड़ी राशि विद्युत मंडल को देनी पड़ती है। हाल ही में निगम द्वारा करीब ढेड़ करोड़ रुपए बिजली बिल -शेष|पेज14



काभुगतान किया गया लेकिन इसके बावजूद करीब 2 करोड़ का भुगतान अभी भी शेष है।



00 3 साल में हो जाएगा पैसा वसूल.......

शहर की सभी सड़कों पर एलईडी लगा दे तो 3 साल के बिजली बिल की बचत से ही इसकी भरपाई की जा सकती है शहर में वर्तमान में सिर्फ सौ एलईडी लाइट लगाए गए है, जबकि 71 सौ और एलईडी लाइट की आवश्यकता है। जिसके लिए 3 करोड़ 55 लाख की लागत से एलईडी खरीदा जा सकता है, जो कि 3 साल की बचत होने वाली 93 लाख यूनिट बिजली के बराबर है।

यहां लगी हैं, एलईडी लाइट .....

शहरमें हाल ही में बनी सड़कों पर सौ एल ईडी लाइट लगाई गई है। इसमें कलेक्ट्रेट , बोइरदादर, सर्किट हाऊस, गोपी टॉकिज के सामने की सड़कें शामिल है। बाकि अन्य स्थानों में सीएफएल और सोडियम बल्ब है। वहीं निगम के कर्मचारियों की माने तो सीएफएल, सोडियम बल्ब में आए दिन परेशानियां होती है और अमूमन हर माह में करीब 25 सोडियम बल्ब 40 से 50 सीएफएल खराब हो जाते हैं।

बचत से हो सकते है कई काम

{म्यूनिसपलस्कूल के स्टॉफ का साल भर का वेतन

{ निगम के मोहर्रिरों का 14 माह का वेतन

{ राजस्व निरीक्षकों का 16 माह का वेतन

{ शहर की सफाई व्यवस्था का 2 माह का खर्च

कहां कितनी खपत

नामसंख्या यूनिट

सोडियम बल्ब- 25 सौ - 27 लाख

सीएफएल बल्ब- 46 सौ - 16 लाख 80 हजार

एलईडी बल्ब - एक सौ 1 लाख 92 हजार

चक्रपथ की स्ट्रीट लाइट में अब भी लगे हैं सोडियम बल्ब।

कलेटाेरेट के सामने स्ट्रीट लाइट में हाल ही में लगाए गए हैं एलईडी ब्लब।

दाम और काम दोनों में बेहतर...

सामान्यसोडियम बल्ब की तुलना में एलईडी को जानकार और इलेक्ट्रीकल इंजीनियर बेहतर मानते हैं इनके मुताबिक एलईडी लाइट सोडियम के मुकाबले काफी बेहतर होती है। 250 वॉट का एक सोडियम बल्ब करीब साढ़े चार हजार रुपए में बाजार में मिलता है जबकि 45 वॉट का एक एलईडी बल्ब करीब पांच हजार का है। यदि दक्षता की बात करे तो 45 वॉट का एक एलईडी, इस सोडियम बल्ब के बराबर है। साथ ही सोडियम बल्ब में किसी प्रकार का कोई वारंटी नहीं है, जबकि एलईडी बल्ब में करीब दो साल की वारंटी भी कंपनी निर्माताओं द्वारा दी जा रही है।