हरिहरन की कर्णप्रिय गजलों से महका चक्रधर समारोह

4 वर्ष पहले
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केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री व सांसद विष्णुदेव साय ने गणेश चतुर्थी पर शुक्रवार की शाम शास्त्रीय नृत्य और संगीत के 33वें चक्रधर समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने शहर के रामलीला मैदान में समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐतिहासिक चक्रधर समारोह ने देश में एक विशिष्ट पहचान बनाई है जिसमें छग एवं रायगढ़ की कला पारखी जनता का योगदान है।

उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह के इस प्रतिष्ठित मंच में कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। इस समारोह की यश कीर्ति की खुशबू दूर दूर तक फैल रही है। संगीत की नित नई परम्परा विकसित हुई है। संगीत के क्षेत्र में राजा चक्रधर सिंह का योगदान अविस्मरणीय है और उन्होंने राजा चक्रधर सिंह के अवदानों का स्मरण किया। उन्होंने आगे कहा कि चक्रधर समारोह में जनता की प्रमुख भागीदारी रही है। राजा चक्रधर की कला परम्परा को कला साधकों को आगे बढ़ाना है और आज प्रतिष्ठित समारोह की ख्याति देश व विदेशों में फैल रही है।देश के प्रख्यात कलाकार उस्ताद बिस्मिल्ला खां, यशु दास, कवि सुरेंद्र दुबे, डोना गांगुली, हेमा मालिनी, ग्रेसी सिंह सहित अन्य कलाकारों ने इस मंच पर अपनी प्रस्तुति दी है। वहीं जयपुर घराने की कत्थक की प्रस्तुति के बाद समारोह की पहली संध्या में पद्मश्री हरिहरन ने मंच संभाला। उन्होंने एक से बढ़कर एक गजल गाए। जब उन्होंने झूम ले... हंसबोल ले, यारी अगर है जिंदगी... व कई गजलों से चक्रधर समारोह की पहली संध्या की छटा को बनाए रखा।

गणेश वंदना और जयपुर घराने की कत्थक की प्रस्तुति के बाद समारोह की पहली संध्या में पद्मश्री हरिहरन ने मंच संभाला।

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