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कथक के घुंघरू के बाद कवियों के राष्ट्रप्रेम और व्यंग्य में डूबी रात

5 वर्ष पहले
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चक्रधर समारोह की आठवीं शाम बनारस घराने के मुंबई से आए तबला वादक कालीनाथ मिश्र के तबलों की थाप की धूम रही तो कवियों की व्यंग्यों से मौजूद लोगों को लोटपोट होने पर मजबूर कर दिया। एक-एक कर देश के अलग-अलग स्थानों से आए कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए छत्तीसगढ़ के पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे ने लोगों को हर पल अपने व्यंग्य से हंसाते रहे तो कवि सुमित मिश्र ने वीर रस की कविताओं से लोगों में जोश भर दिया।

इसके बाद छत्तीसगढ़ के कवि अर्जुन सिसोदिया ने अपने छत्तीसगढ़ी कविता और हास्य कला की प्रस्तुति दी। नौजवानों की पंसद हाशिम फिरोजाबादी ने भी लोगों को कार्यक्रम में जोड़े रखा राष्ट्र प्रेम पर आधारित कविताओं के माध्यम से अपनी शुरुआत की और अलग-अलग विधाओं में अपनी कविता प्रस्तुत किए। उन्होंने मातृत्व प्रेम पर आधारित कविताओं पर खूब वाहवाही बटोरी। इतना ही नहीं प्रत्येक के जीवन में बहन बेटी और प|ी से जुड़ी भावुक पंक्तियां भी सुनाई। लोगों ने उनकी प्रस्तुतियों को खूब सराहा इसके बाद कविताओं पर गीत लेकर प्रमोद तिवारी की प्रस्तुतियों को लोगों का प्यार मिला।

इसी तरह मीर अली मीर की मनमोहक प्रस्तुतियों से समारोह में मौजूद लोगों को कार्यक्रम में जोड़े रखा। कार्यक्रम में देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों के कवियों को सुनने भारी संख्या में प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी से लेकर शहरवासी मौजूद रहे।

चक्रधर समारोह की आठवीं शाम कवियों के व्यंग्यों का आनंद लेते प्रशासनिक अधिकारी व शहरवासी।

समारोह में सुमित के ओज और हाशिम की देशभक्ति
चक्रधर समारोह में डा. सुरेंद्र दुबे को सुनने बड़ी संख्या में लोग आए ही थे साथ ही आज मंच पर ओरछा के युवा कवि सुमित मिश्रा ने अपनी कविताओं से लोगों को उद्वेलित कर दिया। फिरोजाबाद से आए हाशिम फिरोजाबादी ने हिंदुस्तान छोड़ दे जैसी कविता सुनाकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

रायगढ़ घराने से कथक
रायगढ़ घराने से चित्रांशी पणिकर ने कथक की पारंपरिक प्रस्तुति दी। अपनी नृत्य कला में पहचान बनाने वाली चित्रांशी ने कथक के अलग-अलग विधाओं से समारोह में मौजूद लोगों को तालियां बटोरी। नृत्य प्रस्तुतियों का समापन ठुमरी से हुआ।

देश के अलग-अलग स्थानों से कवियों ने दी अपनी प्रस्तुतियां
कालीनाथ मिश्रा द्वारा तबला वादन करते हुए।

चक्रधर समारोह की आठवीं शाम कवि दिनेश, हासिम, सुमित मिश्रा व सुरेंद्र दुबे हास्य व्यंग्य सुनाते हुए। ज्यादातर कवि पहली बार रायगढ़ आए।

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