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नाबालिगों से प्रचार कराने पर हो सकती है 6 साल की कैद
नगरीयनिकाय चुनाव में नाबालिगों से चुनाव प्रचार करवाना उम्मीदवारों को महंगा पड़ सकता है। ऐसा करने पर संबंधित की उम्मीदवारी भी खतरे में पड़ सकती है। दोषी पाए जाने पर छह साल तक हवालात के पीछे भी जाना पड़ सकता है। क्योंकि कानूनी प्रावधान में ऐसा है। राज्य निर्वाचन आयोग से जारी गाइड लाइन में साफ तौर पर नाबालिगों को चुनाव प्रचार से दूर रखने की हिदायत दी गई है। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए बाल श्रम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया है। गाइड लाइन सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलाें को भी भेज दी गई है। बाल श्रम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत चुनाव कार्य में बच्चों से काम लेने वाले किसी भी राजनैतिक दल या नेता पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत संबंधित को छह साल तक की सजा का प्रावधान है। यह भी प्रावधान है कि ऐसे बच्चों से उनकी स्वेच्छा से भी कोई काम नहीं ले सकता है। उनके माता-पिता भी इसके लिए अनुमति नहीं दे सकते। चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव पर्ची बंटवाने, कुर्सी टैंट लगवाने, झंडा बैनर हाथ में पकड़कर प्रचार करवाने, रैली और सभा में ऐसे बच्चों को शामिल करने को आचार संहिता का उल्ल्घंन माना जाएगा।