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मोबाइल पर गेम का शौक था, अपना गेम बना कर डाला गूगल स्टोर में
रोहनगर्ग ओपी जिंदल स्कूल में कक्षा दसवीं के छात्र हैं लेकिन कुछ अलग करने के जुनून के कारण इन दिनों चर्चा में है।
स्मार्टफोन पर गेम खेलते-खेलते मोबाइल एप बनाने की धुन सवार हुई और बना दिया टिक-टैक-टो। रोहन ने नौ खानो में क्रास जीरो मार्क लगा कर खेले जाने वाले पुराने गेम तैयार कर गुगल प्ले में डाला है। 100 से ज्यादा डाउनलोड के बाद यूजर्स रिव्यू में 4.9 रेटिंग मिलने से वे उत्साहित हैं। कहते हैं कि पहला प्रयास था, अब आगे और भी बड़े गेम्स बना कर अपलोड करूंगा।
यूं तो पहले भी यह गेम इंटरनेट पर उपलब्ध है लेकिन पहली बार शहर के एक किशोर द्वारा गेम तैयार कर अपलोड किए जाने की चर्चा शहर में खूब हो रही है।
रोहन कहते हैं कि कक्षा आठवीं में एचटीएमएल (हाइपर टैक्स्ट मार्कअप लैंगवेज, एक कंप्यूटर प्रोग्राम) पाठ्यक्रम का हिस्सा था। इसे पढ़ने के बाद कंप्यूटर में कुछ अलग करने की धुन सवार हुई। पापा के स्मार्टफोन पर गेम्स खेलते हुए लगा कि क्यों अपना गेम एप्लीकेशन बना कर डाला। जर्मनी में रहने वाले एक हमउम्र रिश्तेदार ने रास्ता भी बता दिया। एडम पॉर्चर, एक अमेरिकन ट्यूटर से दो महीने का एंड्रायड हैंडल सिस्टम फॉर डेवलपिंग एंड्रायड एप्स कोर्स (ऑनलाइन) किया। लगभग छह माह के प्रयास के बाद तैयार हो गया टिक-टैक-टो गेम एप्लीकेशन। गुगल में लिंक रजिस्ट्रेशन और सारी औपचारिकताएं के बाद इस गेम को रजिस्टर कर लिया गया।
क्यों चुना टिक-टैक-टो
रोहनकहते हैं कि यह ऐसा गेम है जो हर भारतीय युवा ने अपने स्कूल के जमाने में खेला होगा। बचपन की यादों से जोड़ने के लिए उन्होंने इस गेम को तैयार किया। वे आगे भी रेसिंग, पजल्स और स्पोर्ट्स से जुड़े गेम्स बनाएंगे। इस गेम को महीने भर में अपडेट किया जाएगा। डिफिकल्टी लेवल (आसान, मध्यम और कठिन लेवल) सेट किया जाएगा। पढ़ाई पर इससे ज्यादा असर नहीं पड़ता क्योंकि कंप्यूटर सिलेबस का हिस्सा है। शुरुआत में एंड्रायड पर अच्छी रेटिंग से रोहन उत्साहित हैं और कहते हैं कि 15 वर्ष तक का कोई किशोर यदि ऐसे एप्लीकेशन बनाए तो यंग डेवलपर का सम्मान भी मिलता है। एप्लीकेशन हिट हो जाए और डाउनलोड्स की संख्या अच्छी हो तो गुगल प्ले इसके लिए आपको राशि भी देता है।
खेलते-खेलते हुई धुन सवार