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निवासी असमंजस में, आखिर कौन करेगा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का मेंटनेंस
हाउसिंगबोर्ड नगर निगम के बीच हैंडओवर को लेकर शुरु हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसका खामियाजा बोर्ड द्वारा बनाई गई कॉलोनी वासियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल इस उपजे विवाद की जड़ कॉलोनी की मौजूदा व्यवस्था है। निगम कॉॅलोनी की सुविधाओं को अधूरा बताते हुए हैंडओवर की प्रक्रिया से दूर है।
वही बोर्ड ईई पीसी अग्रवाल ने निगम से आपसी समझौता कर 24 लाख 22 हजार रुपए दिए, जिसके बाद निगम ने कॉलोनी हैंडओवर ले लिया, पर रखरखाव नहीं कर रहा है। यही वजह है कि लोगों को मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हाउसिंग बोर्ड की ओर से शहर में सामान्य आवास योजना, दीनदयाल योजना, आईएचएसडीपी योजना के अंतर्गत सैकडों मकान बनाए गए है। इनमें से ज्यादातर कॉलोनियां गहराई में बने होने की वजह से जल भराव की समस्या आम है। वही चिरंजीव दास नगर समेत कुछ और कॉलोनियों में सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को अपने ब्रोशर्स में दर्शाए गए पार्क सामुदायिक भवनों का निर्माण भी अधूरा है। कई कॉलोनियों में तो पार्क की जगह कांटों से पट गए है। निगम की ओर से इसके लिए पहले बोर्ड अपनी कॉलोनियों में उपभोक्ताओं के अनुरूप सुविधाएं मुहैया कराएंउसके बाद ही रखरखाव जवाबदारी स्वीकार करेगी, जबकि हाउसिंग बोर्ड ने इसकी सारी प्रक्रिया दो साल पहले ही पूरी कर ली थी।
निगम और बोर्ड दोनों वसूल रहे जल कर
यहांरहने वालों से जल कर दोनों विभागों द्वारा वसूल की जा रही है। वही इस बारे में जब निगम के आयुक्त से बात की गई तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही, जबकि हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन अभियंता ने बताया की, उपभोक्ताओं से दाेनों विभागों की ओर से जल कर की राशि ली जा रही है। कुछ उपभोक्ता नियमित तौर पर बोर्ड को तो कुछ नगर निगम को इसका भुगतान कर रहे है।
फैक्ट फाइल
Q. आपने हैंडओवर को लेकर जो दस्तावेज दिखाए थे वे अधूरे है।
जवाब-नहीं सभी दस्तावेज कम्पलीट है, उन्होंने हमसे 24 लाख 22 हजार रुपए लेकर पांच कुछ कॉलोनियां का हैंडओवर लिया था।
Q. आप के द्वारा कराएं गए कार्य अधूरा है, जल भराव की समस्या है।
जवाब- जी नहीं हमने वहां नाली की व्यवस्था कराई है। आप चल कर स्वयं देख सकते है।
Q. सूखे में जलभराव अवलोकन मुश्किल है, आपने सामुदायिक भवन गार्डन का निर्माण भी नहीं कराया है।
जवाब- इनका निर्माण किया गया त