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पंजीयन के बाद भी नहीं बेच पा रहे धान किसान

7 वर्ष पहले
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समितियों के सर्वर ने दिया धोखा किसान नहीं बेच पा रहे हैं धान

समितियोंमें पंजीयन के बाद भी जिले के ज्यादातर किसानों का डेटा नहीं दिखाए जानें की शिकायतों के बाद मार्कफेड हरकत में आया है और साफ्टवेयर में आई खराबी से छूट चुके किसानों की एनआइसी से जानकारी मांगी है। किसानों के पंजीयन में समितियों की लापरवाही और सर्वर के धोखा देने के बाद अब किसान परेशान हो चले हैं।

धान खरीदने से पहले विपणन विभाग द्वारा कराए जा रहा पंजीयन किसानों के लिए अनिवार्य था।15 अक्टूबर से शुरू हुए पंजीयन की प्रक्रिया में सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद भी ज्यादातर किसानों का डेटा समितियों के सर्वर में नहीं दिखा रहा है।समितियों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीयन के साथ तहसील कार्यालयों में भी किसानों के पंजीयन की व्यवस्था की गई थी और पंजीयन के आखरी दिनों में एनआइसी में भी किसानों के पंजीयन का डेटा लोड कराया गया था लेकिन अब समितियों में किसानों का पंजीयन और रकबा नहीं दिखाए जाने की कई शिकायतें रही हैं और पंजीयन नहीं होने के कारण ऐसे किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं।

जिससे रोजाना इस तरह की शिकायतें सीएम जनदर्शन से लेकर कलेक्टर विपणन विभाग को मिल रही हैं लेकिन अब मार्कफेड ने जिले के ऐसी किसानों की जानकारी मांगी है और समितियों की लापरवाही या किसी तकनीकी खराबी के चलते पंजीयन से छूट चुके किसानों को अवसर देने की बात कही है।

छूटे किसानों का पंजीयन कराया जाएगा

अब तक साढ़े 8 हजार टन की खरीदी

धानखरीदी शुरू होने के बाद से अब तक जिले के 121 उपार्जन केन्द्रों में से आधे में ही खरीदी आरंभ हो सकी है और मंगलवार तक कुल 8 हजार 650 मिट्रिक टन धान की खरीद की जा सकी थी। वहीं करीब 45 से अधिक समितियों में बोहनी के लिए किसानों का इंतजार चलता रहा।

^समितियों के साफ्टवेयर में खराबी के कारण यह चूक हुई होगी।हम जिले के ऐसे किसानों का एनआइसी से डेटा ले रहे हैं।जो कि पंजीयन के बाद भी धान नहीं बेच पा रहे हैं।ऑफलाइन में दर्ज इन किसानों का भी पंजीयन कराया जाएगा। \\\'\\\' एसभारती दासन, एमडी,मार्कफेड छग

खरसिया के जोबी समिति में भी इसी तरह के एक मामले में 1 गांव के 18 किसानों का पंजीयन छूट गया।साफ्टवेयर में किसानों के रकबे और खसरा नम्बर की जानकारी सही तरीके से दर्ज नहीं हो सकी। जिसके बाद गलती सुधारने के लिए समिति ने जिला विपणन कार्यालय स