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आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंचकर्म से होगा मरीजों का इलाज
जिलेके आयुर्वेदिक अस्पताल के साथ ही दो अन्य केंद्रों पर मरीजों का अब पंचकर्म से इलाज किया जा सकेगा। केरल की प्राकृतिक चिकित्सा छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों के बाद रायगढ़ में भी लोगों को उपलब्ध है। चिकित्सकों के मुताबिक लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण इस लाभ कम ही लोगों को मिल पा रहा है। इस पद्धति में पांच अलग-अलग तरीकों से रोगों का उपचार किया जा रहा है। पहले सिर्फ रायपुर में इस पद्धति से उपचार किया जा रहा था, लेकिन हाल ही में बिलासपुर रायगढ़ में इसे शुरू किया गया है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पंचकर्म के माध्यम से इलाज लोगों में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। नगर के जिला चिकित्सालय के आयुष विंग, आयुर्वेद अस्पताल पुसौर के आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र में इसकी सेवा पिछले कुछ महीनों से शुरू की गई है। आयुर्वेद विभाग ने इस सुविधा के लिए लगभग छह लाख रुपए खर्च कर एक सेटअप तैयार किया है। एलोपैथ के साथ ही अब धीरे-धीरे आयुर्वेद की तरफ भी जिले के लोगों की रूचि बढ़ने लगी है। पंचकर्म में विभिन्न रोगों का उपचार अलग-अलग चरणों में होता है। इसमें स्नेहन, शोधन, शिरोधरा, बस्ती नश्य के जरिए मरीजों को चिकित्सा दी जाती है।
पंचकर्म के लाभ
{नश्य-भाप केजरिए सर्दी खांसी तपेदिक के उपचार किया जाता है।
{बस्ती-आंतरिक हिस्सेका उपचार किया जाता है। इससे पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं।
{ शिरोधरा- क्वाथऑयल से सिर की मालिस कर मानसिक रोगों का इलाज करते हंै।
{ शोधन-शरीर परभाप प्रवाहित कर रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाई जाती है
{स्नेहन- आयुर्वेदिकऑइल से पूरे शरीर की मालिस कर ब्लड सर्कुलेशन सामान्य होता है।
मरीजों के लिए पंचकर्म लाभकारी
^पंचकर्म कई रोगों के लिए लाभकारी है। इसमें हम पांच तरीके से रोगों का उपचार करते है, इसमें सभी महत्वपूर्ण है। इसमें शिरोधरा से क्वाथ ऑइल से उपचार स्नेहन से पूरे शरीर की मालिश कर उपचार किया जाता हैं। जो काफी लाभकारी है। निशिराठिया, जिलाआयुर्वेद अधिकारी