रायगढ़। पीडब्लूडी के जिम्मे वाली रायगढ़-पत्थलगांव सड़क जर्जर हो गई है। लगभग 109 किलोमीटर लंबी सड़क पहले एक निजी कंपनी को बीओटी के तहत दी गई थी। सुधार चौड़ीकरण के साथ ही इस सड़क की लगातार मरम्मत की जाती थी लेकिन पिछले लगभग एक वर्ष से पीडब्ल्यूडी द्वारा हैंडओवर लिए जाने के बाद तो इसमें सुधार कराया जा रहा है और ही ऐसी कोई योजना है। यातायात के दबाव के बीच इस सड़क पर चलना लोगों के लिए एक परेशानी से कम नहीं है। विभाग चाहता है कि इस सड़क को दो साल तक बीओटी के तहत दिया जाए लेकिन बड़ी लागत और दो सालों में रिकवरी की न्यूनतम संभावना के कारण कोई भी कंपनी इसमें रूचि ले ऐसा लग नहीं रहा है।
पहले ऐसी थी व्यवस्था : वर्ष2001 के दौरान हुए अनुबंध के मुताबिक फरवरी 2002 से अगस्त 2013 तक रायगढ़-पत्थलगांव मार्ग की इस सड़क की बिल्ड-ओन-ट्रांसफर (बीओटी) के तहत जिंदल कंपनी ने देखरेख की। शुरुआत में लगभग नौ करोड़ 28 लाख रुपए में कंपनी ने सड़क का निर्माण कराया। इस अवधि में जिंदल ने अनुबंध की शर्तों के तहत किए गए मेनटेनेंस पर 56 करोड़ रुपए खर्च किए।
कंपनी ने टोल बेरियर लगा कर 59 करोड़ 27 लाख रुपए वाहनों से वसूले। कंपनी के मुताबिक एक बड़ा सेटअप और अनुबंध के बाहर कई काम पर भी खर्च किया गया। इस सड़क के रखरखाव पर एक औसत खर्च का अनुमान लगाएं तो लगभग चार करोड़ 33 लाख रुपए सालाना खर्च किए गए। जमा-खर्च जो भी रहा हो लेकिन इस मार्ग पर सड़क अच्छी थी और यातायात सुगम।
पिछले लगभग एक वर्ष से बीओटी की अवधि खत्म होने के बाद सड़क की हालत लगातार खराब हुई लेकिन पीडब्लूडी ने पेच वर्क या मेनटेनेंस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया।
विभाग के पास नहीं है योजना : सूत्रों के मुताबिक विभाग चाहता है कि कोई भी कंपनी इस सड़क को दो सालों तक बीओटी के तहत करार पर ले ले। जानकारों के मुताबिक अब इतनी लंबी सड़क को बनाया जाए तो 30 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च होगी पर बेरियर से दो सालों में इतनी राशि वसूल पाना संभव नहीं होगा। वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार सड़क की मरम्मत या सुधार के लिए विभाग द्वारा कोई प्रस्ताव या योजना नहीं बनाई गई है।
सड़क के रख रखाव पर सालाना 4 से 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इतनी बड़ी राशि आमतौर पर पीडब्ल्यूडी किसी सड़क के मेनटेनेंस पर कभी खर्च नहीं करता है। हाय-तौबा मचने पर कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद सीएसआर मद से तात्कालिक उपाय किए जाते हैं।
लोगों को झेलना पड़ता है प्रदूषण : सड़क पूरी तरह से टूट कर उखड़ चुकी है। बावजूद इस सड़क में वाहनों की कतार लगी रहती है। धूल के कारण बाइक सवार दुर्घटना का शिकार होते हैं। इससे आवाजाही करने वाले लोगों को प्रदूषण की समस्या से दो चार होना पड़ता है। वहीं सड़क की दुर्दशा दयनीय हो जाने की वजह से रात में इस सड़क से सफर करना मुमकिन नहीं है।
यात्रा में लगता ज्यादा समय : रायगढ़ से पत्थलगांव की दूरी लगभग 108 किमी है।सड़क ठीक थी तो सामान्य परिस्थितियों में इस दूरी को तय करने में ढाई घंटे लगते थे वहीं अब इसमें 4 घंटे का समय लगता है। जशपुर में रेलवे सुविधा नहीं होने के कारण लोग मुंबई, कलकत्ता देश के अन्य कोने में ट्रेन से जाने के लिए रायगढ़ पहुंचना पड़ता है। वहीं इस हाइवे पर दूसरे राज्यों से वाहन भी आते-जाते हैं।
पीडब्ल्यूडी से उम्मीद बेकार: रायगढ़ पत्थलगांव 108 किमी लंबी सड़क के गुणवत्तापूर्ण निर्माण की उम्मीद बेमानी है। लगभग तीन साल पहले केलो डेम लाखा का निर्माण हुआ तो जंगल किनारे से डायवर्सन मार्ग निकाला गया। विभाग ने ठेकेदार से लगभग साढ़े चार किमी लंबी इस सड़क को बनवाया, जिस पर लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह सड़क बनने के बाद तीन महीनों में ही बह गई। बनाएंगे, फिलहाल तो नहीं बना पाए है।
सीधी बात : बीड़ी बोपचे, ईई पीडब्ल्यूडी
सवाल: रायगढ़से पत्थलगांव सड़क की हालत खराब हो गई है। मरम्मत के लिए क्या योजना है।
जवाब.फिलहालतो कोई योजना नहीं है।
सवाल: तोकब तक बनाएंगे।
जवाब. मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में बनाया जाएगा।
सवालबीओटीअनुबंध समाप्ति के बाद क्या अब इस सड़क की देखरेख पीडब्ल्यूडी करेगा।
जवाब.बीओटीके लिए कार्रवाई राज्य स्तर से चल रही है। फिलहाल जब तक करार नहीं हो जाता, देखरेख तो हम ही करेंगे।
सवाल: मतलबइस सड़क की मरम्मत के लिए विभाग की रूचि नहीं है।
जवाब. रूचि कैसे नहीं रहेगी, प्रस्ताव बना कर भेजा जाएगा।
पिछले छह माह से सड़क लगातार खराब हो रही
0 हजार लोग सफर करते हैं
09 करोड़ में जिंदल ने कराया था निर्माण
110 किमी. है इस हाइवे की लंबाई
बीओटी अनुबंध खत्म होने के बाद भी पीडब्ल्यूडी को नहीं फिक्र ।
50 से ज्यादा बसें हर रोज चलती हैं इस पर ।