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निरंतर अभ्यास ही सफलता का मूल मंत्र है : आनंद

6 वर्ष पहले
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रायगढ़| सहायककलेक्टर गौरव कुमार सिंह के दिशा निर्देश में जिंदल ओडिटोरियम में सुपर - 30 आनंद कुमार की कार्यशाला का आयोजन किया गया। “भविष्य दृष्टी युवा सृष्टि कार्यक्रम में आयोजित इस कार्यशाला में लगभग पांच हजार युवाओं ने भाग लिया कलेक्टर ने विधार्थियों के प्रति क्षमता अनुरूप लक्ष्य निर्धारण, रूचि अनुसार विषय चयन, प्रतियोगी परीक्षा की तेयारी के लिए मार्ग दर्शन प्रदान करने के उद्देश से “भविष्य दृष्टी युवा सृष्टि” कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है

कार्यक्रम का शुभ आरंभ सुपर - 30 के आनंद कुमार को स्मृति चिन्ह जिला पंचायत के सीईओ निलेश कुमार क्षीरसागर एवं सहायक कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने प्रदान किया गया तथा विधायक रायगढ़ द्वारा श्रीफल एवं साल भेंटकर सम्मानित किया गया। कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुये कहा की इस कार्यशाला के माध्यम से प्रशासन का उद्देश है कि प्रतयोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को एक दिशा मिले और सफलता के लक्ष्य को पूर्ण कर आगे बढ़ें आनंद कुमार ने कार्यशाला में विधार्थियों को कहा की मेहनत करने से खुशियाँ जरुर मिलती है इसके लिये उन्होंने चार गुरु मंत्र दिये, प्रबल प्रयास सुबह उठते ही अपना उद्देश बना लें क्योंकि स्वामी विवेकनद ने कहा है कि जैसे सोंचोगे वैसा बनोगे इसी उद्देश के साथ काम करना चाहिए, दूसरा मंत्र कड़ी मेहनत करें क्योंकि आज जो सुपर - 30 की पहचान है,वो कड़ी मेहनत के वजह से है, इसलिए विधार्थियों को कड़ी मेहनत करने की सलाह दी। तीसरा मंत्र असीम धर्य रखना चाहिए, चौथा मंत्र सकारात्मक सोंच से एवं निरंतर अभ्यास ही सफलता का मूल मंत्र है इन चार मंत्रों का प्रत्येक विधार्थियों को अपने जीवन में अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह प्रदेश के युवाओं के उज्वल भविष्य के लिए सार्थक प्रयास कर रहे हैं और इसका सकारत्मक लाभ युवाओं को मिल रहा है।

जिला प्रशासन की विशेष पहल एवं सहायक कलेक्टर गौरव कुमार सिंह के अथक प्रयास की सराहना करते हुए कहा की भविष्य में इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन होते रहना चाहिए। कार्यशाला में सुपर - 30 के आनंद कुमार ने अपने संस्था के मेहनती, प्रगतिशील एवं लक्ष्य पूर्ण विधार्थियों की सफलता कहानी बयां की उन्होंने अपने संस्था सुपर - 30 के संतोष कुमार के बारे में बताया की, बिहार राज्य के एक छोटे से गांव से है,जहां तो बिजली एवं पानी की सुविधा थी। उसके माता पिता सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरन पोषण करते थे,लेकिन पिता की इच्छा थी की बेटा पढाई कर आगे बढे और ऊँचे मुकाम तक पहुंचे, संतोष ने सुपर - 30 के माध्यम से आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया और अथक प्रयास से वर्तमान में संतोष यूरोप में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं इसी तरह अनूप बिहार के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रहता था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब थी,दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी, माँ ने अथक मेहनत कर अनूप को पढाया और सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार के पास ले कर आई, वहीं से अनूप की जिंदगी करवट लेली, आज वो आईआईटी मुंबई से पढाई पूरी कर के अपनी एक छोटी सी कंपनी चला रहा है

कार्यशाला में आनंद कुमार ने कहा की सुपर - 30 में पिछले 12 सालों में 30 के 30 बच्चों का चयन एनआइटी एवं आईआईटी में लगातार होता रहा है उन्होंने बच्चों को इंटरनेट के माध्यम जैसे फेसबुक एवं निजी वेबसाइट से संपर्क कर अपनी सवालों का समाधान कर सकते हैं। कार्यशाला में लगभग 5000 विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने भाग लिया और कार्यशाला का लाभ उठाया इस अवसर पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास , जिला शिक्षा अधिकारी, रोजगार अधिकारी, कार्यक्रम के नोडल अधिकारी राजेश डेनियल, बड़ी संख्या में विधार्थी, शिक्षक एवं अभिभावक उपस्थित थे

जिंदल ऑडिटोरियम में कार्यशाला के दौरान मौजूद छात्र अन्य।