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महापौर को 1 लाख 80 हजार रु. जमा करने के लिए 3 दिन का अल्टीमेटम
पिछलेपांच साल के कार्यकाल में कुछ कार्यों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले महापौर महेंद्र चौहथा आखिरी दौर में विवादों में घिर गए हैं। महापौर रहते हुए उन्हें दिए गए सरकारी वाहन में स्वीकृति से ज्यादा डीजल का उपयोग करने पर निगम के कमिश्नर ने नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर एक लाख 80 हजार रुपए जमा कराने के निर्देश दिए हैं। महापौर ने पांच वर्षों में शासन द्वारा तय मात्रा से तीन हजार लीटर से ज्यादा डीजल वाहन में डलवाया और उपयोग किया है। नोटिस में कहा गया है कि समय पर राशि जमा नहीं की गई तो महापौर पर कार्रवाई की जाएगी।
महापौर अपने सरकारी वाहन में हर महीने 65 लीटर डीजल ले सकते हैं, लेकिन महेंद्र चौहथा ने लगभग उससे दोगुनी मात्रा में तेल का उपयोग किया है। सूत्रों की माने तो शासकीय काम में कम और घरेलू राजनीतिक उपयोग के लिए ज्यादा वाहन का प्रयोग किया गया। इसकी वजह से महापौर महेंद्र चौहथा ने लिमिट से एक गुना ज्यादा ईंधन की खपत कर दी। अब 3060 लीटर डीजल की कीमत करीब एक लाख 80 हजार रुपए उनसे नगर निगम वसूल कर रहा है। महापौर को इस राशि को तीन दिन के भीतर जमा करना होगा। अन्यथा नगर निगम उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी कर सकती है।
निरीक्षण के कारण हुई खपत
वहींमहापौर महेंद्र चौहथा का कहना है अधिक डीजल खपत निरीक्षण के कारण हुई। नगर निगम पिछले पांच साल के दौरान शहर विकास का कार्य सबसे अधिक किया। जिसकी वे सतत मॉनिटरिंग कर रहे थे। लगातार निर्माण कार्यों पर निगरानी रखने और घूम घूम कर नजर रखने की वजह से उन्होंने लिमिट से अधिक मात्रा में डीजल की खपत की। उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप कि उन्होंने निजी पार्टी कार्यक्रम के लिए अधिक उपयोग किया। इसे वे सिरे से खारिज कर रहे हैं।
लैपटापभी नहीं किया जमा
महापौरमहेंद्र चौहथा को नगर निगम की ओर से एक लैपटाप भी दिया गया था। जिसका उपयोग वे नगर निगम के कार्यों के लिए करते थे, लेकिन आचार संहिता लगने के बाद भी उन्होंने अब तक उक्त लैपटाप को जमा निगम के पास नहीं किया है। कमिश्नर ने इसमें भी नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर जमा करने का निर्देश दिया।