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जनवरी से बच्चों को पोलियो ड्राप की जगह लगेगा पेंटावेलेंट टीका

7 वर्ष पहले
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रायगढ़। नए साल से बच्चों को ज्यादा इंजेक्शन लगवाने से मुक्ति मिलेगी, क्योंकि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अब बच्चों को 6 की जगह महज 3 इंजेक्शन लगाए जाएंगे। जिले के सरकारी अस्पतालों में जनवरी से पेंटावैलेंट वेक्सीन बच्चों को लगाई जाएगी। एक इंजेक्शन 3 बार लगने से अब बच्चे 5 गंभीर जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रहेंगे। राष्ट्रीयस्तर पर शुरू होने जा रहे टीकाकरण कार्यक्रम अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग जिले के सभी सरकारी, सामुदायिक प्राथमिक अस्पतालों से बच्चों को टीके लगना शुरू करेगा।
अभी तक एक साल के बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए दो अलग-अलग टीके लगाए जाते हैं। जनवरी से शुरू होने जा रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम अंतर्गत बच्चों को सिर्फ 3 इंजेक्शन लगाया जाएगा। नवजात शिशु के जन्म उपरांत 24 घंटे के भीतर एक हेपिटाइटिस बी के लिए इंजेक्शन लगाया जाता है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
24 घंटे के भीतर यही इंजेक्शन बच्चों को लगाए जाएंगे। इसके बाद 6 सप्ताह, 10 सप्ताह 14 सप्ताह में डीपीटी और हेपेटाइटिस बी के अलग-अलग दो टीके लगाए जाते थे। पेंटावैलेंट टीका बच्चे को लगने वाली दो सुइयों की संख्या कम करेगा। बावजूद इसके मासूम बच्चों को 5 गंभीर रोग गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी से भी बचाव करेगा। हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी से होने वाले गंभीर रोग जैसे निमोनिया, मैनिंजाइटिस (मस्तिष्क ज्वर), सेप्टिसेमिया (संक्रमण), एपिग्लोटाइटिस और सेप्टिक आर्थराइटिस से रोकथाम करता है।
इन राज्यों में प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया: पोलियो टीकाकरण की जगह पेंटावेलेंट टीकाकरण का प्रयोग देश के दो राज्यों में किया गया था। तमिलनाडु और केरल राज्य में केंद्र सरकार ने इसका प्रयोग किया। यहां सफल होने के बाद अन्य राज्यों में जनवरी से शुरू हो रहा है।
इन राज्यों मेें शुरू होगी योजना-टीकाकरण मेंहुए बदलाव एक साथ देश के कई राज्यों में शुरू होगा। इसमें दिल्ली, छत्तीसगढ़, एमपी, असम, बिहार, झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से जनवरी 2015 से एक साथ इन राज्यों में नए नियमों के तहत बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा।

''राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को 6 की जगह 3 टीका लगाए जाएंगे। देश के कई राज्यों के साथ यह योजना छत्तीसगढ़ में भी शुरू हो रही है। भले ही टीके की संख्या कम हो गई है, लेकिन उतनी ही बीमारियों से बच्चों को बचाएगा। '' डॉ.एचएस उरांव, सीएचएमओ
हीब का लगेगा इंजेक्शन, गरीबों को होगा अधिक फायदा
अबसरकारी अस्पताल में बच्चों को हीब का इंजेक्शन लगाया जाएगा। हीब इंजेक्शन की कीमत सबसे अधिक होता है, गरीब चाह कर भी इसे नहीं लगवा पाते है। यह इंजेक्शन वायरस, निमोनिया, मस्तिष्क बुखार से पीड़ित बच्चों को लगाया जाता है। भारत में करीब 33 प्रतिशत बच्चों की मौत इन्हीं बीमारियों की वजह से होती है। अब टीकाकरण में इसको नियमित रूप से शामिल करने पर सबसे अधिक फायदा गरीबों को होगा। टीका काफी महंगा होने के कारण अभी तक गरीबों के बच्चों इससे वंचित रह जाते थे। अब सरकार की ओर से मुफ्त में लगने वाले टीके से उनके बच्चों भी बीमारी की चपेट में आने से बच सकेंगे।
ऐसे लगता है मासूमों को टीकाकरण
अब
{24घंटे के भीतर हेपिटाइटिस बी का एक इंजेक्शन
{06 सप्ताह बाद डीपीटी का एक इंजेक्शन
{10 सप्ताह बाद हेपिटाइटिस बी का एक इंजेक्शन
{14 सप्ताह बाद हीब का लगेगा एक इंजेक्शन
पहले
{24घंटे के भीतर हेपिटाइटिस बी का एक इंजेक्शन
{6 सप्ताह बाद डीपीटी का एक इंजेक्शन और हेपिटाइटिस बी का एक
{10 सप्ताह बाद डीपीटी का एक और हेपिटाइटिस बी का एक
{14 सप्ताह बाद डीपीटी का एक और हेपीटाईटीज बी का एक ।