पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • फरार होने वाले बंदियों कैदियों को नहीं पकड़ पा रही है पुलिस

फरार होने वाले बंदियों कैदियों को नहीं पकड़ पा रही है पुलिस

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहरकी पुलिस जिला अस्पताल जिला जेल से फरार हो जाने वाले बंदियों कैदियों को पकड़ नहीं पाती। दावे तो खूब किए जाते हैं, मगर आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जो आरोपी एक बार यहां से भागने में कामयाब हो जाते हैं, उन्हें दोबारा पकड़ कर जेल के पीछे धकेलना पुलिस के लिए हमेशा टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पिछले महीने की 17 जनवरी को भी एक बंदी पुलिस जवानों को चकमा देकर पुरानी शनि मंदिर के पास से फरार हो गया। उसे दोबारा आज तक नहीं पकड़ा जा सका हैं। रायगढ़ के प्रभारी एसपी ने खाना पूर्ति के लिए लापरवाही बरतने वाले जवानों को निलंबित तो कर दिया, मगर बंदी को नहीं पकड़ने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया और पूर्व में भी फरार हुए बंदिया कैदियों को नहीं पकड़ पाने के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। बहरहाल 17 जनवरी को जिला अस्पताल के सामने से भागने वाले बंदी को पकड़ने के लिए पुलिस का दावा है कि आरोपी के घर, उसके रिश्तेदार, संबंधित सभी ठिकानों पर दबिश दी गई। मगर कहीं नहीं मिला। इसके अलावा फरार बंदी को पकड़ने के लिए मुखबिरों का छाल बिछाने का दावा पुलिस कर रही है। अब सवाल खड़ा होता है कि अगर पुलिस उसके संबंधित ठिकानों पर दबिश दे रही है और फरार बंदी नहीं मिल रहा है तो फिर उसे जमीन खा गई या फिर आसमान निगल गया। सूत्रों की माने तो पुलिस सिर्फ दावे कर रही है। अगर वाकई फरार बंदी को पकड़ने का प्रयास किया जाता तो शायद अब तक बंदी दोबारा जेल में होता। मगर खाना पूर्ति की वजह से कोतवाली पुलिस उसे पकड़ने में सफल नहीं हुआ है। पुलिस का हर बार यही दावा रहता है मगर आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि फरार होने वाले बंदी कैदियों के खिलाफ थानों में महज खाना पूर्ति के लिए जुर्म दर्ज किया जाता है। पकड़ने का प्रयास बिल्कुल भी नहीं किया जाता।

बंदियों के भागने से शहरवासियों के मन में उठ रहे कई सवाल

पिछले17 जनवरी को एक बंदी जिला अस्पताल में स्कैन कराने लाए जाने पर पुलिस कर्मियों को चकमा देकर भाग गया। जिसे अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। भले ही लापरवाही बरतने वाले जवान निलंबित किए जा चुके हैं। मगर आज तक एक सवाल शहरवासियों के मन में खटक रही है कि उक्त बंदी को पुलिस के जवान भगा दिए या वह भाग गया। दरअसल, सिटी स्कैन कराने के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में सिटी स्कैन के विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से बंदी को पुरानी शनि मंदिर के पास स्थित एक निजी क्लीनिक में ले जाया गया। स्कैन तो करा लिया गया था। रिपोर्ट लाना बाकी था। रिपोर्ट लेने के लिए पुलिस के जवान ने बंदी को भी साथ ले गया। खास बात यह है कि जिला अस्पताल में पांच जवानों की डयूटी लगाई गई थी, लेकिन रिपोर्ट लेने एक ही जवान बंदी को लेकर गया। ऐसी लापरवाही बरतने से पुलिस के जवानों पर आरोप लग रहे हैं कि जानबूझकर बंदी को फरार कर दिया गया।

जवाब नहीं दे रहे पुलिस अफसर

फरारबंदियों के नहीं पकड़ पाने के मामले में पुलिस अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं। कोई बाहर होने का हवाला दे रहे हैं तो कोई भी पकड़ने का प्रयास जारी होने का दावा कर रहे हैं। मगर सच्चाई यही है कि तो फरार बंदी को पकड़ने के लिए प्रयास किया जा रहा है ही पकड़ने की कोई योजना। इस तरह की कार्यशैली से पुलिस की कार्यशैली को लेकर ही उंगली खड़ी की जा रही है।

केस-3

2 जनवरी 2011 को भी दो कैदी हुए थे फरार

2जनवरी 2011 को भी जिला अस्पताल से दो कैदी फरार हो गए थे। इसमें से एक कैदी को कोतरलिया स्टेशन के पास पकड़ लिया गया था। लेकिन दूसरे को पकड़ने में सफलता आज तक नहीं मिली थी। इस मामले में तात्कालीन एसपी के द्वारा 5 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया गया था। लगातार जिला अस्पताल के कैदी वार्ड से फरार होने के बाद भी जिला पुलिस कैदियों बंदियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आती।

केस-2

20 अगस्त 2012 को भी जिला जेल की दीवार फांद कर कैदी फरार

20अगस्त 2012 की रात जेल के प्रहरियों को चकमा देकर दुष्कर्म का आरोपी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया था। जेल प्रबंधन फरार होने की सूचना जूट मिल चौकी को दी थी। आज तक इस मामले में आरोपी को पुलिस नहीं पकड़ पाई है। 376 का आरोपी मोहम्मद हारून उर्फ भोलू उम्र 19 वर्ष निवासी सिद्धी विनायक कालोनी रायगढ़ जेल की दीवार फांदकर भागने में सफल हो गया था। आरोपी पर पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म करने का आरोप था। जिसे कोर्ट ने 10 नवंबर 2010 को जिला जेल में दाखिल किया था।

केस 1

16 जुलाई को फरार हुआ आज तक नहीं पकड़ाया

16जुलाई 2014 को भी जिला अस्पताल से एक विचाराधीन कैदी हाथों में लगे हथकड़ी को खोल कर फरार होने में कामयाब हो गया था। जिसको कोतवाली पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई है। उक्त आरोपी को धरमजयगढ़ पुलिस ने अपहरण के मामले में गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया था। फरार बंदी का नाम सद्दाम पिता शमसुद्दीन हुसैन 22 निवासी अंबिकापुर हैं। उक्त बंदी को खून की उल्टियां और पेट दर्द होने की वजह से जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था।