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कालोनी बनाने हाउिसंग बोर्ड के िलए शहर में नहीं है सरकारी जमीन
2007 से अब तक योजना के अंतर्गत बनाएं गए मकान
रायगढ़|अन्य शहरोंकी तरह हाउसिंग बोर्ड रायगढ़ में भी कई बड़े प्रोजेक्ट लांच कर सकते हैं, मगर शहरवासियों का दुर्भाग्य कहें कि बोर्ड के पास जमीन ही नहीं है। 2007 में हाउसिंग बोर्ड के गठन के बाद से इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को शहर के बीच नो प्रॉफिट नो लॉस स्कीम के तहत मकान की सुविधा प्रदान कराना है। शासन भी इसके तहत उन्हें प्रतिवर्ग फुट एक रुपए के हिसाब से जमीन उपलब्ध कराती है, लेकिन शहर में कहीं भी जमीन नहीं है। वहीं विभाग प्रमुख की माने तो शासन जब तक जमीन नहीं देगा नया प्रोजेक्ट लांच कर पाना संभव नहीं है। शहर के मध्यमवर्ग के लोगों के लिए हाउसिंग बोर्ड में कई बढ़े प्रोजेक्ट लांच किए, जिनका लाभ लगभग साढ़े चार हजार लोगों को मिल रहा है। वही अटल विहार योजना अंतर्गत लगभग 500 मकानों वाली सर्वसुविधा युक्त नई कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है। अबतक कुल चार हजार 800 मकानों को लेकर अलग-अलग नामों से अावासीय परिसरों का विकास कर चुकी है। वर्तमान में नगर के मध्य आशियाना बना पाना हर किसी के लिए आसान नहीं है।
इसके निर्माण में मंहगे रा-मटेरियल जमीन आसमान छू रही कीमतें मध्यम वर्ग के लोगों के बजट से बाहर है। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड को जमीन भी नहीं मिल रही जिससे कई लोगों को परेशानी हो सकती है।
जमीनप्राप्त करने बोर्ड की प्रक्रिया
जमीनप्राप्त करने हाउसिंग बोर्ड ने पटवारी आरआई के माध्यम से पूरे जिले की खाक छनवा ली है। इसके बावजूद उनके मुताबिक कही भी जमीन उपलब्ध नहीं है। बोर्ड पहले इनके माध्यम से उपलब्ध जमीन का रिकार्ड खसरा नंबर समेत सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही शासन से इसकी मांग करते है। इसके बाद वे जमीन की उपयोगिता को ध्यान में रखकर बोर्ड को आवंटित किया जाता है। वर्तमान परिस्थितियां एेसी नहीं है, प्रशासन को ही इसके लिए ठोस कदम उठाना होगा।
संभावनाएं हैं, पर जमीन नहीं.........
^नगरकी जरुरतों को ध्यान में रखते हुए और मकान बनाने की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में प्रोजेक्ट होने के बावजूद हमारे पास जमीन की कमी है। शासन जबतक जमीन मुहैया नहीं कराएगी नया प्रोजेक्ट कैसे लांच कर सकते है। पीसीअग्रवाल, ईईहाउसिंग बोर्ड रायगढ़
शहर विस्तार पर ध्यान
दिनपर दिन सिकुड़ते जा रहे शहर के विस्तार पर जिला प्रशासन को बेहतर कदम उठाने की जरूरत है। नगर