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ट्रस्ट की धर्मशालाओं का बुरा हाल सामाजिक का हो रहा सही उपयोग

7 वर्ष पहले
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रायगढ़। शहर में सेठ महाजनों ने जनसुविधा की भावना के साथ धर्मशालाओं का निर्माण कराया, ताकि मुसाफिरों को सस्ते में ठहरने की भरपूर सुविधा मिल सके, लेकिन वर्तमान में इनका पालन महज चंद धर्मशालाओं के माध्यम से ही किया जा रहा, तो कुछ ने लोकप्रियता को आधार बनाकर इनका व्यवसायीकरण कर दिया है।
वर्तमान में स्थानीय अग्रवाल समाज द्वारा संचालित पंचायती धर्मशाला इसके लिए निशुल्क सेवा देने से भी पीछे नहीं है, लेकिन ट्रस्ट की बूजी स्वयं की रतेरिया धर्मशाला में खुलेआम व्यवसायी अपनी दुकान चला रहे हैं। समाज कल्याण के लिए पूरे शहर में सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट के माध्यम से कई प्रकार की सेवा संस्थाएं चलाई जा रही है। वही शादी ब्याह अन्य सामजिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए भवन का व्यवसायीकरण कर दोहरा लाभ लिया जा रहा है।
पंचायती धर्मशाला स्टेशन चौक : स्टेशन चौक स्थित पंचायती धर्मशाला अग्रवाल समाज के लोगों की ओर से संचालित की जा रही है। भवन में कुल 45 कमरे हैं। जो शुरुआत में साधारण थे, आधुनिकता को ध्यान में रखते हुए समाज के लोगों ने पूरे भवन का कायाकल्प कर दिया है। इस धर्मशाला में गर्म पानी की कॉमन टीवी, कमरों की साफ सफाई के साथ सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। धर्मशाला में एक साथ दो शादियां हो सके ऐसी व्यवस्था है।
वही इनके द्वारा दशकर्म, स्वास्थ्य संबंधी शिविर बाहर से जरूरतंमद लोगों को निशुल्क सेवा भी देती है। साथ ही मृत्यु के बाद अस्थि रखने की संपूर्ण व्यवस्था धर्मशाला में की गई है। प्रतिमाह धर्मशाला का कुल खर्च 40 से 50 हजार रुपए है, जबकि व्यवस्थापकों द्वारा शादी में महज पहले तल का चार हजार दूसरे तल का आठ हजार रुपए लिए जाते हैं। मुसाफिरों के लिए यहां 100 से 150 रुपए मामूली किराए पर कमरे भी उपलब्ध होते हैं।

बूजी भवन, बूजी भवन चौक : सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट का योगदान शहर में सार्वजनिक हित के प्रतिष्ठानों के लिए कम नहीं है। स्कूल, कालेज, सरकारी भवनों में अनेक भवन ट्रस्ट द्वारा बनवाए गए हैं। ट्रस्ट के आधिपत्य की ही एक धर्मशाला है बूजी भवन धर्मशाला, लेकिन यहां अब लोगों को तो सामाजिक कार्यों के लिए जगह मिलती है और ही मुसाफिरों को कमरा। 11 माह पहले भवन का उपयोग शादी ब्याह जैसे अनेक कार्यक्रमों में उपयोग किया जाता था, जिसका किराया महज दाे हजार रुपए प्रतिदिन निर्धारित था। भवन में कुल 12 कमरे हैं। पहले तल मेें तीन कमरे एक हॉल और आंगन था। वही दूसरे तल में कुल नौ कमरे थे, जिनमें मध्यमवर्गीय परिवार के घरों के शादी ब्याह और छोटे कार्यक्रम होते थे।
शुरुआत में इसका किराया प्रतिदिन पांच सौ रुपए था, इसके बाद एक हजार हुआ। बाद में यह बढ़कर दो हजार रुपए किया गया था।

शहर में14 धर्मशालाएं संचालित- हरियाणा धर्मशाला, पंचायती धर्मशाला, रतेरिया धर्मशाला, धनसिंह, सिंधी पंचायती, सिंधु भवन, देवांगन धर्मशाला,डेढ़-राज धर्मशाला, अग्रोहा भवन, अग्रसेन भवन, नीलांचल, अघरिया सदन, बू जी भवन, जंजघर जैसी कुल 14 धर्मशालाएं संचालित है।
सीधी बात| सहयोग की बजाय, कागजों में उलझा रखा है...
राजेश भारद्वाज, जनसंपर्कअधिकारी, सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट

Q. ट्रस्ट का उद्देश्य तो समाज कल्याण है, फिर धर्मशाला का व्यवसायिक उपयोग क्यों किया जा रहा है।
^ भवन किराए से नहीं उठ रहा था, इसलिए मजबूरन हमें इसका व्यवसायीकरण करना पड़ा।
Q. फिर ट्रस्ट का उद्देश्य तो पूरा ही नहीं होता।
^भवन पुराना हो गया है, समय के साथ-साथ लोगों की पंसद भी बदल गई है।
Q. आपको भवन में नई सुविधा मुहैया करानी चाहिए थी।
चूंकि भवन काफी पुराना है, निर्माण की अधिक गुंजाइश नहीं है।
Q. फिर भी आपको दुकान की बजाए, सुविधाओं पर ध्यान देना था।
इसके लिए ट्रस्ट ही सब कुछ कर रहा है, लेकिन प्रशासन हमें सहयोग करने की बजाए, कागजी कार्रवाई में उलझा रखा है।
रतेरिया धर्मशाला व बूजी भवन को नोटिस : कलेक्टोरेट में बैठक के बाद निगम आयुक्त ने दोनों धर्मशालाओं को व्यवसायीकरण बंद करने सोमवार को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा पंचायती धर्मशाला के संचालक ने भवन के नीचे चल रहे अपनी सात दुकानों काे खाली करने का फरमान जारी किया है। ताकि शहर में आने वाले मुसाफिरों की सुविधाओं के हिसाब से इन दुकानों का सदुपयोग किया जा सके।
तीन ऑडिट के बाद भी दस्तावेज सही : ट्रस्ट के जनसंपर्क अधिकारी ने बातचीत के दौरान बताया कि, जिला प्रशासन 2006 से लगातार सभी दस्तावेजों की ऑडिट कराया जा रहा है। कलेक्टर अमित कटारिया ने भी अपने कार्यकाल में ऑडिट कराया था। साथ ही सभी दस्तावेजों की जांच 2011-12 में की गई इसके बावजूद उन्हें कुछ नहीं मिला।