रायगढ़। जिले की 9 महत्वपूर्ण खस्ताहाल सड़कों को दुरुस्त करने के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा शासन को भेजे गए 6 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को शासन ने रिजेक्ट कर दिया है। सड़क सुधार का प्रस्ताव किन कारणों से रिजेक्ट किया गया इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों को नहीं है। आमतौर पर विभाग शासन को मार्च के महीने में प्रस्ताव बना कर भेजता है इसलिए लोगों को सड़क की दशा सुधरने के लिए छह महीनों तक इंतजार करना पड़ेगा।
विभाग का कहना है कि एक बार रिजेक्ट हुआ तो क्या प्रस्ताव फिर से भेजा जाएगा। जिले की प्रमुख 30 किमी की लंबाई वाले 9 सड़कें पीडब्लूडी के आधिपत्य की हैं। ये सड़कें पिछले कई महीनों से जर्जर हालत में हैं। इन सड़कों को सुधारने के लिए विभाग ने राज्य शासन को 5 करोड़ 99 लाख रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन शासन ने इसे हरी झंडी नहीं दी। इन सड़कों की दुर्दशा केवल दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं बल्कि सड़कों से लगे ग्रामीणों के लिए मुश्किल की वजह बनी हुई हैं।
इनका भेजा था प्रस्ताव हाटी-खरसिया मार्ग 3 किमी 75 लाख रुपए, छाल-घरघोड़ा मार्ग 3 किमी 75 लाख रुपए, नंदेली-पेंड्रवा मार्ग 4 किमी 65 लाख रुपए, तमनार-घरघोड़ा मार्ग 2.5 किमी 45 लाख रुपए तमनार-लैलूंगा मार्ग 4 किमी 65 लाख रुपए, खरसिया बायपास-1 8 किमी 80 लाख रुपए, खरसिया बायपास-2 2.5 किमी 80 लाख रुपए,सिंघनपुर कोसीर मार्ग 2.6 किमी 39 लाख रुपए शामिल हैं। खस्ता हाल सड़क को दूरुस्त करने लगेगा समय।
वाहनों ने सड़कों को किया खराब : हाटीखरसिया, खरसिया-नंदेली-पेंड्रवा मार्ग, तमनार घरघोड़ा खरसिया क्षेत्र में भारी संख्या में उद्योग स्थापित है। इन उद्योगों में रोजाना बड़ी संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही होती है। लिहाजा ओवरलोड वाहनों की वजह से सड़क समय से पहले दम तोड़ देती है। इसका नतीजा यह होता है कि आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
इस मामले में खरसिया विधायक उमेश पटेल कहते हैं कि जिले की कुछ सड़कों की मरम्मत का प्रस्ताव हमने भी भेजा था, लेकिन उस पर विचार नहीं हुआ। पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़कों के सुधार का प्रस्ताव बना कर भेजा जाना और शासन द्वारा उसे रिजेक्ट किया जाना निराशाजनक है। जिले की सड़कों की हालत खराब है। समझ नहीं आता है कि सरकार क्या करती हैं। सड़कों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से नहीं किया जाता है। हम लोगों ने कुछ सड़कों का मामला विधानसभा में भी उठाया था।
धनागर-भूपदेवपुर गांव में 900 मीटर की सड़क बिल्कुल खराब है। इसके लिए 300 मीटर का प्रस्ताव भेजा गया है। विभाग के एस्टीमेट में सड़क की चौड़ाई को कम और लंबाई को भी ज्यादा बताया गया है। इससे पता चलता है कि कितनी भर्राशाही है। इस गलत प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया और जब हमने अवगत कराया तो शासन के अधिकारी कह रहे हैं कि जो प्रस्ताव भेजा गया था उससे ज्यादा राशि नहीं मिलेगी। विधायक कहते हैं कि जो प्रस्ताव भेजा गया यदि वो गलत है तो उसे सुधारने के बाद स्वीकृति दी जानी चाहिए।
साल में एक बार भेजा जाता है प्रस्ताव : पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा बनाए जाने वाली सड़कों की मरम्मत के लिए शासन को साल में एक बार मार्च टू मार्च महीने एक बार वार्षिक मरम्मत स्वीकृति के तहत भेजा जाता है। इसके बाद साल में दोबारा सड़कों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजने का प्रावधान नहीं है। शासन स्वीकृति दें तो ठीक नहीं तो इसके लिए अगले साल का इंतजार करना पड़ता है।
'' सड़कें सुधारने के लिए हमने प्रस्ताव तो भेजा था, लेकिन शासन ने प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी है। हर छह महीने में हम सड़क सुधार या निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजते हैं। छह महीने बाद इस सड़कों के सुधार का प्रस्ताव फिर से भेजा जाएगा।'' वीडीबोपचे, ईईपीडब्ल्यूडी ।