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आरटीओ उड़नदस्ता का तो अघोषित ऑफिस बंद हुआ और अवैध वसूली

7 वर्ष पहले
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रायगढ़। आरटीओउड़नदस्ता द्वारा जिले की सड़कों पर ओवरलोड अंडरलोड वाहनों से अवैध वसूली का कारोबार अब भी बेरोकटोक चल रहा है। कोतरा रोड में सुभाष नगर स्थित एमअाईजी नंबर 5 कमरे का अघोषित उड़नदस्त आरटीओ का दफ्तर अब भी ठेकाकर्मियों से आबाद है वहीं छातामुड़ा चौक-कोसमनारा पर लग उड़नदस्ता का पाइंट आम दिनों की तरह चल रहा है। उड़नदस्ता टीम के अघोषित दफ्तर में ट्रांसपोर्टरों का आना जाना बना हुआ था। आरटीओ का कर्मचारी फोन पर बातचीत भी कर रहा था।

शनिवार दोपहर 2.30 बजे छातामुड़ा बायपास मार्ग कोसमनारा बाबाधाम के सामने स्थित आरटीओ का वाहन का खड़ा था। तीन दिनों पहले दो आरटीओ कर्मचारी और चार ठेका कर्मचारी थे जबकि शनिवार को इसके विपरीत परिवहन विभाग के चार कर्मचारी और दो ठेका कर्मी यहां सड़क पर खड़े नजर आए। वाहनों की लंबी कतार लगी थी।

वाहन के कागजातों की फाइल पर चिपका टोकन ट्रक के भीतर से ही देखा और वाहनों को जाने दिया। जिन वाहनों के पास टोकन नहीं था उससे लोड के मुताबिक एक से दो हजार रुपए वसूले जा रहे थे। एमएच 12 एफसी 8746 का वाहन पहुंचा, उसके पास टोकन या स्टीकर उपलब्ध नहीं था। उक्त ट्रक महाराष्ट्र से रांची जा रही थी। आरटीओ कर्मियों द्वारा उससे एक हजार रुपए लिए गए। इस वाहन के पीछे ही एक ट्रक सटा हुआ था। इस ट्रक के ड्राइवर के पास भी टोकन उपलब्ध नहीं था। इससे आरटीओ कर्मचारियों ने 800 रुपए लिए।
सीजी नंबर की कुछ वाहनों को भी रोका, लेकिन चालकों ने अपने मालिक या ट्रांसपोर्टर्स का नाम बताया और कर्मचारियों ने वाहन जाने दी। भास्कर की टीम को तस्वीर लेता देख एक ठेका कर्मचारी ने फोन पर किसी से बातचीत की। दस से पंद्रह मिनट बाद ही एक सफेद रंग का स्कार्पियो वाहन मौके पर पहुंचा और आगे थोड़ी दूर पर खड़ा हुआ। कुछ बातें हुई और फिर वाहन वह शख्स वहां से चला गया। इसके बाद सभी कर्मचारी आरटीओ के वाहन में बैठ गए और किसी भी वाहन पर चेकिंग नहीं की।
दोपहर 3 बजे रिपोर्टर फोटो जर्नलिस्ट मौके पर ही थे। ठेके के गुर्गे ने कहा कि आप लोग अपना काम कर लिए तो जाइए। जब हमने कहा कि यहां से भगाने वाले तुम कौन होते हो तो उन्होंने कहा जो भी है बैठकर समझौता कर लेते हैं। समझौता करवाने आप कौन होते हो तो, इसी बीच आरटीओ कर्मचारी ने उस युवक को वाहन के भीतर से इशारा कर वापस बुला लिया।

ओवरलोड है दुर्घटनाओं की वजह : ओवरलोडवाहनों से शहर आउटर में सड़क दुर्घटना बढ़ गई है। आए दिन ट्रक और माल वाहकों के बीच में भिड़ंत हो रही है। इसमें लोगों की जान भी जा रही है। आरटीओ और पुलिस ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्लानिंग नहीं की। ओवरलोड वाहनों पर सिर्फ दिखावे की कार्रवाई की है। पुलिस अधिकारियों ने भी इसे स्वीकार किया कि ओवरलोड वाहनों से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।
समय से पहले टूट रहीं शहर की सड़कें: जानकारों की माने तो नेशनल हाइवे सड़कों की दुर्दशा, बायपास और शहर की सड़कें अक्सर खराब मिलती है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि क्षमता से अधिक वजनी वाहनों का आवागमन। सड़कों में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं। इंजीनियर भी स्वीकार कर रहे हैं कि भारी वाहनों की वजह से सड़कों की लाइफ खत्म हो रही है। जो सड़क पांच साल चलनी चाहिए, वह दो साल में दम तोड़ रही है।
हमारेपेट पर क्यों लात मार रहे हो
जबहमारे रिपोर्टर फोटो जर्नलिस्ट ने अवैध वसूली का भंडाफोड़ करने उड़नदस्ता के अघोषित चेक पोस्ट पर पहुंचे तो चार आरटीओ कर्मियों के साथ दो गुर्गे काम कर रहे थे। फोटो खींचते देख पहले तो इधर उधर हुए। मगर बाद में वे हमारे पास आकर बोले हमारे पेट पर लात क्यों मार रहे हो।


दैनिक भास्कर के रिपोर्टर फोटो जर्नलिस्ट छातामुड़ा बायपास मार्ग पर कोसमनारा स्थित बाबा धाम के सामने पाइंट लगाने वाले आरटीओ वाहन के पास पहुंचे। यहां जब अवैध वसूली की तस्वीरें खीचीं गई तो वहां आरटीओ विभाग की उपस्थित जवानों ने भी अपने सेल फोन से तस्वीर ली। जब हमने अपने पासपोर्ट फोटो बायोडाटा रख लेने की बात कही तो उन्होंने कहा कि आप लोग अपना काम कर रहे हैं और हम अपना। जब हमने उनको कहा कि आपका काम ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करना है कि हमारी तस्वीर लेना तो उनका जवाब था कि बड़े साहब बोलते हैं जो भी आएगा, उसकी तस्वीर रख लिया करो। इसलिए ले रहे हैं।

भिलाई निवासी मो. सज्जाद एमएच 12 एफसी 8746 कार चालक है। उसने बताया कि छत्तीसगढ़ के हर चेक पोस्ट में टोकन चल रहा है। इस ड्राइवर ने हमें पिछले तीन चार महीनों में विभिन्न जिलों के उड़नदस्ता द्वारा जारी किए गए टोकन स्टीकर दिखाए। महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ बॉर्डर घूसते ही सिस्टम चालू हो जाता है।
राजनांदगांव जिले का टोकन दुर्ग, भिलाई तक चलता है। इसके बाद रायपुर से महासमुंद के सराईपाली तक। फिर रायगढ़ जिले के सारंगढ़ बार्डर में अलग टोकन जारी हो जाता है जो छाल ऐडू तक काम आता है। इसके बाद जशुपर प्रवेश करने पर वहां का टोकन अंबिकापुर बार्डर तक काम आता है। फिर जाकर रांची तक वाहन पहुंचता है।
जब वह शनिवार को रायगढ़ सीमा में पहुंचा तो उसके पास इस महीने का टोकन उपलब्ध नहीं था। लिहाजा कोसमनारा अघोषित चेक पोस्ट के पास से उससे 1 हजार रुपए लिए गए। इसकी कोई रसीद दी गई ही कोई एंट्री की गई।
सड़कों पर वाहनों से अवैध वसूली, हो ही नहीं सकता
सीधी बात रवि शंकर, ज्वाइंट सेक्रेटरी, परिवहन विभाग छग
Q. आरटीओ उड़नदस्ता का अघोषित दफ्तर में ओवरलोड वाहनों काे चलाने की छूट देने के लिए कुछ रुपए लेकर टोकन बेच रहे हैं और चेक पोस्ट पर अवैध वसूली की जा रही है।
- बिल्कुल ऐसा नहीं हो सकता।
Q. इसके सारे सबूत हैं हमारे पास।
- मुझे उपलब्ध करा दें, कार्रवाई करेंगे।
Q. आपके विभाग वाले ठेका कर्मचारियों का भी सहारा लेकर वसूली कर रहे हैं।
- ठेका कर्मी से कैसे वसूली कराएंगे।
Q. आपके कर्मचारी वाहन के अंदर आराम से बैठे रहते है, ठेका कर्मी वसूली करने का काम व जांच करते हैं।
- एेसा आपको संभव लगता है।
Q. हमारे पास इसके भी सबूत है। ट्रक चालक टोकन दिखाते हैं और निकल जाते हैं और जिनके पास टोकन नहीं उनसे पैसे लिए जा रहे।

- आपके दैनिक भास्कर में ही मामला सामने आ चुका है। मुझे सबूत उपलब्ध करा दें। सही पाए जाने पर सब को सस्पेंड कर देंगे।

सब बंद हो गया, कोई ठेका कर्मी नहीं है
सीधी बात: पीएल ध्रुव, उड़नदस्ता प्रभारी रायगढ़
Q. अापको अघोषित दफ्तर न तो बंद हुआ न ही अवैध वसूली।
- टोकन बेचना बंद हो गया है।वसूली नहीं हो रही है। वहां जो रहते हैं। वो हमारा स्टाफ है।

Q. टोकन आज भी बेचा गया है, अघोषित चेकपोस्ट पर वसूली आज भी हुई है। ट्रक चालक वाहन से टोकन दिखा कर निकल गए। आपके कर्मचारियों ने कोई जांच नहीं की।
- टोकन नहीं बेचा गया है। कोई वसूली नहीं हुई है। सब बंद हो गया।

Q. हमने अपनी आंखों से देखा है ये सब कुछ।
- अाप पता नहीं क्यों गलत आरोप लगा रहे हैं।

Q. हम गलत आरोप लगा रहे हैं, हमारे पास अवैध उगाही का पूरा सबूत हैं।
- ऐसा हो ही नहीं सकता।
Q. आपके कर्मचारियों के साथ सिविल ड्रेस में वाहनों की जांच करने वाले कौन हैं
-हमारे कर्मचारी ही जांच करते हैं, वहां दूसरा कोई नहीं रहता।
Q. जब हम फोटो खींच रहे थे तो आपके ठेका कर्मियों के फोन पर ही आप आए थे। कुछ बोले और निकल गए।
- हां मैं जरूर आया था, लेकिन वहां कोई ठेका कर्मी नहीं था।
Q. आपके चार कर्मियों के साथ दो ठेका कर्मी थे, वे आपके लिए काम कर रहे थे।
- वहां कोई नहीं था, किसी ठेका कर्मी का सहयोग नहीं लिया जाता।
Q. ठेका कर्मी बता रहे थे, आरटीओ विभाग उनको पैसे देता है, जब वे कर्मचारी ही नहीं है तो पैसे क्यों दिए जाते हैं।
- कोई पैसा नहीं दिया जाता, बोलने वाले कुछ भी बोल देते हैं।

Q. अवैध वसूली कर रहे हो उसी पैसे में से उन्हें मजदूरी देते होगे।
- ऐसा कुछ नहीं है, जबर्दस्ती पीछे पड़े हो आप।