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गोढ़ी तमनार में चल रहा रेत का अवैध उत्खनन, अफसर अनजान
गर्मीका मौसम नजदीक और नदियों से पानी कम होते ही नदी के आसपास के इलाकों से रेत का अवैध उत्खनन होना शुरू हो गया है। खासकर तमनार, केलो नदी रायगढ़, एकताल पुसौर केलो नदी तट पर, जहां देर शाम से ही खनन का काम किया जा रहा है।
खासकर तमनार के कोढ़ी नदी किनारे रेत माफियाओं के द्वारा जेसीबी लोडर लगाकर ट्रैक्टर और डंपर में रेत की सप्लाई कर रहे है, वहीं ग्रामीणों का दावा है कि माइनिंग विभाग के अफसरों से उन्होंने इसकी शिकायत की है, पर अधिकारी चुप्पी साध रखे हैं। इसके अलावा सरिया क्षेत्र में भी नदी नालों के करीब रेत निकाली जा रही है। पिछले साल भी जिले में रेत का जमकर खनन और अवैध परिवहन हुआ था। एक-दो बड़ी कार्रवाई कर खनिज अमला खाना पूर्ति की कार्रवाई की। कलेक्टर रायगढ़ ने अवैध रेत उत्खनन को देखते आम लोगों को होने वाले परेशानी को ध्यान में रखते हुए रेत खदानों की जगह रेट तय कर दिए थे। लेकिन इसका पालन कहीं होता नजर नहीं आया। अवैध रेत उत्खनन से सप्लायर मोटी रकम कमाने में लगे हुए है तो आम लोगों को अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही है। बहरहाल बात करें कोढ़ी की तो यहां नदी किनारे शाम से ही ट्रैक्टरों का आना-जाना शुरू हो जाता है।
जिले में अवैध रेत उत्खनन से केवल माफियाओं को ही इसका लाभ मिल रहा है। शासन को तो रायल्टी का पैसा मिलता है ही ग्राम पंचायतों को। अगर शासन से रेत खदान की अनुमति दी जाती है तो इससे मिलने वाली रायल्टी ग्राम पंचातयों को मिलता। रायल्टी से मिलने वाली पैसे से ग्राम पंचायतों का विकास कार्य किए जा सकते हैं। मगर जिला प्रशासन के अफसरों का रेत माफियाओं से मिलीभगत से स्वीकृति दिलवाने के लिए ध्यान नहीं दिया जाता।
इन जगहों को मंजूरी दिलाने विभाग ने भेजा है प्रस्ताव
माइनिंगअफसर शिव शंकर नाग ने बताया कि जिले में 8 अन्य जगहों को भी रेत खदान की मंजूरी देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। मगर मंजूरी नहीं मिली है, जो प्रस्ताव भेजे गए है उसे पिछले साल भी राज्य शासन को भेजा गया था। मगर मंजूरी नहीं मिली। इस वर्ष इसे स्वीकृति मिलने की आस लगाई जा रही है। बहरहाल जिन जगहों को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इसमें बायंग, कंचनपुर, पामगढ़ खरसिया, पांझर रायगढ़, तमनार, बासनपाली तमनार, बरभौना खरसिया और बाराडोली पुसौर शामिल है।
इन जगहों पर मिली है रेत खदान की मंजूरी
जिलेमें तेरह जगहों पर रेत खदान की मंजूरी दी गई है। इसमें से 4 खदानें 4 हेक्टेयर से कम क्षेत्र की है तो 9 जगहों को पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की मंजूरी मिली हुई हैं। इसमें प्रमुख रूप से कछार, महलोई, जरेकेला, कसडोल, एकताल, बोकरामुड़ा, उसरौट, तारापुर, घूघवा, नवापारा सिंहपुरी, रक्सापाली और केसला बुडिया को ही रेत खदान की स्वीकृति हैं। ग्राम पंचायतों द्वारा इसका संचालन किया जा रहा है।
केलो नदी के तट पर हो रहा अवैध उत्खनन।
अधिक दाम पर भी बेच रहे रेत
रेतकी कमी और खदानों की लीज नहीं होने के कारण पिछले साल रेत की मारामारी हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने इस पर हस्तक्षेप किया और रेत के दाम तय कर दिए, लेकिन इसके लिए कोई मॉनिटरिंग टीम नहीं बनाई गई। इस कारण इस नियम का फायदा लोगों को नहीं हुआ और इस साल भी यह काम दोबारा शुरू हो गया। जहां खदानों की स्वीकृति मिली है वहां भी तय दाम के हिसाब से लोगों को रेत नहीं मिल रहा हैं। जहां अवैध उत्खनन हो रहे हैं वहां तो दाम आसमान छू रही हैं।
हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई
माइनिंगअफसर शिव शंकर नाग ने कोढ़ी गांव से कोई शिकायत नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि उनके द्वारा कई बार सूचना दी गई है। बहरहाल आरोपों को नकारने के बाद माइनिंग अफसरों ने इंस्पेक्टर सुपरवाइजर को मामले की जांच कर रेत तस्करों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।