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बिजली विभाग की नोटिस में सजा की अवधि गलत

6 वर्ष पहले
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{पांच सौ फार्मों में हुई गलत धारा की प्रिटिंग

{ विधि विशेषज्ञ बता रहे गलती है बढ़ी।

भास्करन्यूज | रायगढ़

धारा379 की जगह 375 का नोटिस विद्युत विभाग ने अपने पचास से भी अधिक उपभोक्ताओं काे भेजने के बाद भी सबक नहीं लिया। नई नोटिस बुक छपवाने की बजाए पुराने नोटिस में पेन सुधार कर अभी भी उपभोक्ताओं को वही नोटिस जारी कर रहा है। जबकि नोटिस में और भी त्रुटियां है, जिस पर विभाग की नजर अबतक नहीं पड़ी है। संबंधित अधिकारी का कहना है कि नोटिस हाल ही में छपवाई गई है, जिसकी संख्या करीब पांच सौ है।

गौरतलब है कि तीन दिन पहले दैनिक भास्कर के खबर प्रकाशन के बाद विद्युत मंडल को अपने धारा संबंधी त्रुटि की जानकारी तो हो गई, लेकिन अन्य त्रुटियों पर उनका बिलकुल भी ध्यान नहीं गया। दरअसल विभाग द्वारा जारी किए जा रहे नोटिस में धारा के साथ ही सजा के प्रावधान भी गलत प्रिंट है। इससे अंजान विभाग अपनी पूर्व गलती में पांच को पेन से सुधार कर नौ तो बना दिया, लेकिन सजा के प्रावधान पर उनका ध्यान नहीं गया।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले विभाग ने बकाया वसूल करने बैकुंठपुर निवासी गुलाबो देवी नामक महिला उपभोक्ता को यह नोटिस जारी किया था। जिस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 375 विद्युत अधिनियम की धारा 135 और 138 के तहत तीन गुना जुर्माना और दो वर्ष के सजा का उल्लेख किया गया है।

धारा 379 में सजा का प्रावधान 3 वर्ष का

बकायावसूल करने विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले नोटिस में दुष्कर्म की धारा के साथ-साथ सजा के प्रावधान भी गलत है। दरअसल भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत चोरी की धारा 379 में तीन साल के सजा तीन गुना जुर्माना राशि का प्रावधान है। जबकि विभाग ने अपने नोटिस में सिर्फ दो साल के सजा का उल्लेख नोटिस में किया है।

विद्युतअधिनियम 2003 है पर्याप्त

2003में आए विद्युत अधिनियम के तहत विद्युत अपराधों के लिए गैरजमानती धारा 135 और 138 का प्रावधान रखा गया है, जो पर्याप्त है, लेकिन विद्युत मंडल ने अपने नोटिस को और प्रभावी बनाने और के लिए 379 का उल्लेख किया है। लोक अभियोजन पंचानन गुप्ता के मुताबिक विभाग के अपने अधिनियम है तो फिर भारतीय दंड संहिता की धारा की कोई आवश्यकता नहीं है। धारा 135 और 138 ही पर्याप्त है।