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प्रबल ज्ञान, सकारात्मक सोच, परिश्रम एवं धैर्य से मिलती है कामयाबी

6 वर्ष पहले
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कैरियर कार्यशाला में छात्राओं ने भरा नया जोश

भास्करन्यूज|रायगढ़

शिक्षाऐसा ज्ञान है जो व्यक्ति के अज्ञानता को मिटाकर ज्ञान की ज्योति जलाता है। शिक्षा जिसके पास है उसकी उन्नति का मार्ग प्रशस्तकर व्यक्तित्व की शोभा बढ़ाता है। शिक्षित व्यक्ति, शिक्षित परिवारों से सभ्य एवं सुसंस्कृत समाज बनता है। जीवन में शिक्षा का महत्व सबसे अधिक है। शिक्षा वह साधन है जो समाज को केवल शिक्षित नहीं करती वरन व्यक्ति के आत्मीय विकास में भी अहम योगदान निभाती है। उक्त बातें आज सहायक कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने कार्मेल कन्या की छात्राओं को संबोधित किया।

भविष्य दृष्टि-युवा सृष्टि कार्यक्रम में आज सृजन प्रशिक्षण भवन में एक दिवसीय कैरियर मार्गदर्शन कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें कार्मेल कन्या की 150 छात्राएं एवं शिक्षिकाएं उपस्थित थी। सहायक कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि बालिकाएं समाज की निर्माता है। उन्हें समाज में आगे बढऩे के लिए शिक्षित होना जरूरी है।

एक बालिका के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित होता है। आगे चलकर यही बालिका प|ी, मां, बहन अनेक रूप लेती है। इसके साथ ही परिवार में अपनी अहम भूमिका निभाती है। सहायक कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि बालिकाएं समाज की निर्माता है। उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करें ताकि वह अच्छा कैरियर बनाकर और ऊंचे मुकाम तक पहुंच सके और अपने घर-परिवार एवं समाज का नाम रोशन कर सके।

सहायक कलेक्टर श्री सिंह ने कैरियर मार्गदर्शन में छात्राओं को शिक्षा के चार गुरू मंत्र दिए। प्रबल ज्ञान पिपासा, सकारात्मक सोच, निरंतर अथक परिश्रम एवं असीम धैर्य इन चारों मंत्रों को जीवन में अनुशरण कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी कैरियर के क्षेत्र में असफल हो तो उन्हें निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए सफलता अवश्य मिलेगी। एक छात्र और विद्यार्थी के जीवन में कितनी ही क्षणिक शारीरिक, प्राकृतिक और वैचारिक बाधाएं आए, लेकिन अपना आत्मविश्वास प्रत्येक परिस्थिति में बनाये रखे और विजय प्राप्त करें। श्री सिंह ने कहा कि सफलता हासिल करने के लिए अपने आप में जुनून पैदा करें परीक्षा तो जटिल है, ही कठिन बशर्ते कि आप अपने मन में ठान ले कि हमें आईएएस बनना है इसके लिए सुनियोजित तरीके से मन से जूट जाए।

उन्होंने कहा कि जिस दिन हम अपने मन में यह ठान ले कि असफलता सफलता की ओर हमारा एक बढ़ता हुआ कदम है, तब हम परिस्थितियों के मोहताज नहीं होंगे। परिस्थितियों को हम अपने अनुरूप ढालने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए रणनीति और प्रस्तुतिकरण पर ध्यान देना होगा। इस अवसर पर प्राचार्य राजेश डेनियल उपस्थित थे।