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पीएचई से छीनकर जिला पंचायत को सौंपा टायलेट निर्माण कार्य
निर्मलभारत अभियान के बाद अब स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में टायलेट बनाए जाने हैं। शासन के निर्देश के बाद अब जिले में भी यह काम पीएचई से छीनकर जिला पंचायत को सौंपा गया है और योजना से संबंधित सारे दस्तावेज जमा कराएं जा रहे हैं।
लक्ष्य के अनुरूप निर्मल ग्राम बनाने में नाकाम रहे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से योजना का जिम्मा छीन लिया गया है। अब यह जिम्मेदारी जिला पंचायत को सौंपी गई है। केंद्र सरकार ने सालों से ग्रामीण इलाकों में टायलेट निर्माण के लिए काम कर रहे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कामकाज की गहन समीक्षा की थी, जिसमें विभाग द्वारा हितग्राहियों को सहीं तरीके से लाभान्वित नहीं करने और योजना में व्यापक भ्रष्टाचार की बात सामने आई थी। टायलेट निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जब गांवों में निर्मल भारत अभियान का असर नहीं दिखा तो केन्द्र सरकार ने इसमें व्यापक-शेष|पेज 14फेरबदल
कर डाले हैं।गांवों में शौचालय बनाने के काम में विभाग बदलने के साथ-साथ योजना का नाम भी बदल दिया गया है। निर्मल भारत अभियान के बाद स्वच्छ भारत अभियान से टायलेट बनाने की जिम्मेवारी पीएचई से छिन ली गई है और इस काम को पूरा कराने की जिम्मेदारी जिला और जनपद पंचायतों को सौंपी गई है। बीते महीने आदेश जारी होने के बाद राज्य के सभी जिलों में यह जिम्मा पंचायतों के अधीन करने की पहल शुरू हो गई है और जिले में भी इस योजना से संबंधित सभी दस्तावेज जिला पंचायत को हैंड ओवर किए जा रहे हैं।
क्यों बदली व्यवस्था...
गांवोंमें टॉयलेट बनाने के लिए पीएचई से योजना को छीनकर जिला पंचायत के सुपुर्द किया गया है। क्योंकि ग्राम पंचायतों में टायलेट की ,जरूरत एवं मानिटरिंग के लिए जिला पंचायत कहीं अधिक बेहतर काम कर सकता है। मिशन के तहत सभी जिलों से साल भर का वर्किंग प्लान मांगा गया है। प्रपोजल भेजने के बाद प्रारंभिक तैयारियां भी शुरू हो गई है, जिससे आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
^गांवों में टायलेट बनाने की योजना का क्रियान्वयन अब पीएचई की जगह जिला पंचायत से किया जाएगा। योजना से संबंधित सारे दस्तावेज जिपं को हैंड ओवर किए जा रहे हैं।\\\'\\\' केएसकरसोलिया’’ईई, पीएचई