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बढ़ रही बेरोजगारी, पांच साल में 1461 को मिली नौकरी, 73 हजार अब भी बेरोजगार

4 वर्ष पहले
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तेजी से बेरोजगारी बढ़ रही है, बीते पांच सालों में सिर्फ 1461 को नौकरी मिली है, वहीं अब भी जिले में 73 हजार अब भी बेरोजगार घूम रहे हैं। इस दौरान कुल 74 हजार 461 लोगों ने रोजगार कार्यालय में पंजीयन कराए थे। सबसे अधिक बेरोजगार 2015 और 2016 में पंजीकृत हुए हैं।

शासन के स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत संबंधित विभाग हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी परिणाम शून्य है। जिले में बेरोजगार युवक युवतियों को रोजगार के काबिल बनाने अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आवास और भोजन की भी सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इसके बावजूद यह आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो बीते पांच सालों में रोजगार कार्यालय में 74 हजार से अधिक बेरोजगारों का पंजीयन हो चुका है।

2015-16 में सबसे अधिक करीब 40 हजार बेरोजगारों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें एक फीसदी से भी कम बेरोजगारों को नौकरी मिल सकी हैं। शेष अभी भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। रोजाना जिला रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों की कतार पंजीयन के लिए लगी रहती है। युवाओं को इस बात की आस रहती है कि शासन से कोई नौकरी मिले तो उनका भविष्य संवर जाए लेकिन जिले में शासन के साथ विभागीय अमला बेरोजगारों को नौकरी दिलाने में पिछड़ता जा रहा है।

नाम मात्र के लगे कैंपस में प्राइवेट कंपनियों में छोटी नौकरी पाने के लिए लगती है बेरोजगारों की लंबी कतार।

दो साल से नहीं लगा रोजगार मेला
दो साल से रोजगार मेला भी नहीं लगाया गया है। जिससे बेरोजगार पंजीयन के बाद भी काम की तलाश में भटक रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर व्यक्ति को रोजगार मिलना मुश्किल है। वर्ष 2013, 2014 और 2015 में लगातार तीन साल तक रोजगार मेला लगाया गया था। इन तीन सालों के दौरान 64 कंपनियों के द्वारा 1461 बेरोजगारों को रोजगार दिया।

मंदी ने भी बढ़ाई बेरोजगारी
रायगढ़ जिले में वर्तमान में 12 पॉवर प्लांट व 130 से अधिक उद्योग संचालित है, लेकिन औद्योगिक मंदी की वजह से इसमें से कई ने दम तोड़ दिए हैं। जब उद्योग चल रहे थे तब कुछ हद तक इसमें बेरोजगारों को नौकरी मिल जाती थी, लेकिन बीते दो सालों से यहां बेरोजगारों को काम देना तो कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है।

प्लेसमेंट कैंप में नहीं दिखाते रुचि
सरकारी नौकरी के आस में पंजीकृत बेरोजगार विभाग द्वारा लगाए जाने वाले प्लेसमेंट कैंप के प्रति रुचि नहीं दिखाते है। कैंप में निजी कंपनी वाले ही कर्मचारी की नियुक्ति के लिए आते हैं। कई कंपनी बाहर की होने व सम्मानजनक वेतन नहीं मिलने के कारण कैंप में इंटरव्यू के बाद भी युवा काम करने के लिए इच्छुक नहीं होते।

वर्ष 2015 से राज्य शासन ने बेरोजगारी भत्ता भी बंद कर दिया है। इसकी वजह से अब बेरोजगार युवक, युवतियां पंजीयन करना भी कम कर दिए हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने और उच्चतर माध्यमिक या उससे आगे की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले बेरोजगारों को हर माह एक हजार रुपए दिया जाता था, लेकिन राज्य शासन के पास फंड की कमी होने की वजह से बेरोजगारी भत्ता बंद कर दिया गया। योजना के बंद होने से युवावर्ग भी अब रोजगार कार्यालय में पंजीयन करने रुचि नहीं ले रहे हैं।

नहीं मिल रहा बेरोजगारी भत्ता, कम हो रहे पंजीयन
वर्ष बेरोजगार पुरुष महिला नौकरी

2013 1078 9725 1345 560

2014 8578 5557 3021 775

2015 28828 14961 13867 146

2016 20245 12494 7751 00

2017 5913 3590 2323 00

लगातार बढ़ते बेरोजगारी के आंकड़े
पंजीकृत बेरोजगारों की तुलना में जॉब बहुत कम है। हम हर सप्ताह प्लेसमेंट कैंप चला रहे हैं। जिसका लाभ बेरोजगारों को मिल रहा है। हां यह जरूर है कि बीते दो सालों में हमने कोई रोजगार मेला आयोजित नहीं किया है। प्रमोद जैन, जिला रोजगार अधिकारी,

पंजीयन की तुलना में जॉब कम है
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