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रत्थो समेत 11 को एसईसीएल कंपनी में दी जाएगी नौकरी / रत्थो समेत 11 को एसईसीएल कंपनी में दी जाएगी नौकरी

Bhaskar News Network

Oct 16, 2016, 05:15 AM IST

Raigarh News - एसईसीएल के अफसरों के खिलाफ जुर्म दर्ज एसईसीएल के अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश पर छाल थाने में अपराध...

रत्थो समेत 11 को एसईसीएल कंपनी में दी जाएगी नौकरी
एसईसीएल के अफसरों के खिलाफ जुर्म दर्ज

एसईसीएल के अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश पर छाल थाने में अपराध दर्ज कर लिया गया। लात गांव में जमीन अधिग्रहण के बाद प्रभावितों को नौकरी देने की बजाए अधिकारियों ने कुछ स्थानीय लोगों से साठगांठ कर गांव के बाहर व पड़ोसी राज्यों के लोगों को नौकरी दी थी। जिसे लेकर पीड़ित भूषण सिंह राठिया ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर कोर्ट ने 26 अगस्त को मामले में तत्कालीन महाप्रबंधन, उपक्षेत्रीय महाप्रबंधक छाल, खान मैनेजर, भू -अर्जन अधिकारी सरपंच समेत रोजगार प्राप्त करने 7 लोगों पर जुर्म दर्ज करने के आदेश दिए थे।

जिस पर छाल थाना प्रभारी अमित शुक्ला द्वारा 15 सितंबर को सभी के खिलाफ 420,468 व 471 के तहत जुर्म दर्ज कर मामले में विवेचना की जा रही है। पीड़ित भूषण सिंह राठिया ने लात ओपन कास्ट माइंस के लिए 2005-06 में अपनी पैतृक जमीन 3.570 हेक्टेयर जमीन एसईसीएल को दी। जमीन के एवज में प्रथम अवार्ड पारित भूमि का मुआवजा मिला। जबकि दूसरा अवार्ड भूमि का मुआवजा उन्हें अबतक नहीं दिया गया है। इसके अलावा पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक दो एकड़ पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने प्रावधान है, लेकिन पीड़ित के 6 एकड़ शेष भूमि को किसी को नौकरी नहीं मिली।

जब पीड़ित ने इसके लिए भू-अर्जन अधिकार निराकार सतपथी से बात की तो नौकरी के लिए जमीन शेष नहीं होने की बात कही गई। जिस पर पीड़ित ने जीएम कार्यालय जाकर जानकारी मांगी तब उसे पता चला की उनकी जमीन को नौकरी दे दी गई है। इसके बार उसने सूचना के अधिकार के तहत रोजगार प्राप्त लोगों की विस्तृत जानकारी मांगी।



जिसमें एसईसीएल द्वारा लात गांव के कुल 226 लोगों की सूची उन्हें सौंपी गई। जिसमें 12 लोग एेसे पाए गए, जो गांव के थे ही नहीं। इतना ही नहीं पीड़ित का नाम भी सूची में शामिल था, लेकिन उसकी जगह कोई नौकरी कर रहा था। जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जिस पर कोर्ट ने मामले में संलिप्त सभी तत्कालीन अधिकारी, सरपंच समेत रोजगार करने वाले 6 लोगों पर एफआईआर के निर्देश जारी किए।

भास्कर में छपी खबर।

56 परिवारों को अब तक नहीं मिला रोजगार

लात गांव में 56 परिवार अभी भी ऐसे हैं, जिन्हें जीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गांव में न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है, न स्वास्थ्य सुविधाओं की, पीडितों के पास खेती करने के लिए जमीन भी शेष नहीं बची है। वनोपज पर आश्रित रहने वालों के लिए जंगल भी नहीं है। सभी खदान से निकलने वाले ट्रकों पर लेवलिंग का काम कर किसी तरह अपना गुजारा कर रोजगार के आस में बैठें हुए हैं।

इन पर मामला दर्ज

मामले में एसईसीएल तत्कालीन महाप्रबंधक, उपक्षेत्रीय प्रबंधक छाल, भू-अर्जन अधिकारी, खान मैनेजर, सरपंच मनटोरी बाई, नौकरी करने वाले तहसीलराम, राजकुमार, ओमप्रकाश, उमेद सिंह, राजकुमार, महेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार,फुल सिंह के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया है।

मुझे जानकारी नहीं है


संघर्ष किया तब मिला अधिकारी






भास्कर न्यूज | रायगढ़

धरमजयगढ़ ब्लाक में एसईसीएल के लात कोयला खदान के लिए अपनी 50 डिसमिल जमीन देने वाली आदिवासी महिला रत्थो बाई को हाईकोर्ट में लंबे संघर्ष के बाद एसईसीएल में नौकरी मिलेगी। रत्थो समेत 11 लोगों को नियुक्ति के लिए औपचारिकता पूरी करने के लिए एसईसीएल ने पत्र लिखा है। 7 अक्टूबर को कंपनी के बिलासपुर कार्यालय द्वारा जारी आदेश की कॉपी सभी संबंधितों के भेजी गई है। इसके साथ ही दूसरे मामले में भू विस्थापितों के बदले दूसरों को नौकरी देने के मामले में एक पीड़ित की याचिका पर हाईकोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया जिसके बाद मामला दर्ज कर लिया गया।

उपमहाप्रबंधक (खनन) छाल उपक्षेत्र, एसईसीएल बिलासपुर हेडक्वार्टर से जारी पत्र में रत्थो बाई समेत, हेमसागर, कौशल कुमार, दिलेश्वर, मनोज कुमार, लालजीत सिंह, नगेंद्र सिंह, ललेश्वर, लोचन सिंह, जयप्रकाश राठिया, केशव प्रसाद को पत्र लिखकर खदान के लिए अधिग्रहित भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा सरेंडर करने, पुलिस से चरित्र प्रमाण पत्र लेने, छाल औषधालय में मेडिकल फिटनेस जांच कराने, साक्षात्कार के लिए सहखातेदारों के साथ उपस्थित होने और अन्य जरूरत दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया है।

158 महिलाओं को नौकरी मिल सकती है- जुलाई की शुरुआत में कोरबा की ज्योति राठौर नामक महिला को एसईसीएल ने नौकरी दी जिसके बाद रत्थो बाई के संघर्ष को थोड़ी ताकत मिली। उल्लेखनीय है कि लात गांव की आदिवासी महिला रत्थो बाई 12वीं तक पढ़ी हुई है। उसने एसईसीएल को कोयला खदान के लिए सितंबर 2005 में 50 डिसमिल जमीन दी थी। ये कृषि भूमि थी। परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं था, तो रत्थो ने छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नौकरी मांगी। एसईसीएल ने रत्थो के आवेदन को यह कहते हुए खारिज किया कि आवेदक महिला है। उसने जनचेतना मंच समेत अन्य संगठनों से बात की और आखिरकार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जानकारी के मुताबिक कोल इंडिया की कोयला कंपनियों में महिलाओं को नौकरी नहीं देने के जिस नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।



नियम में संशोधन हुआ तो महिलाओं को नौकरी दूसरी महिलाओं को भी नौकरी मिलेगी। हालांकि जिन 11 लोगों को फिलहाल एसईसीएल नौकरी देने के लिए तैयार है उसमें सिर्फ रत्थो बाई ही महिला हैं। नए संशोधन के लागू होने में फिलहाल वक्त लग सकता है।

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