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दीपावली के पहले ले रहे खोवा-छेने के सैंपल, रिपोर्ट आने तक खा चुके होंगे

4 वर्ष पहले
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सीधी बात | अंकित गुप्ता, फूड सेफ्टी ऑफिसर रायगढ़

सालभर कार्रवाई करते हैं
शहर समेत जिले के होटलों में मिलावटी खोये की सप्लाई को लेकर कार्रवाई तब होगी जब आम लोग इसका उपयोग कर चुके होंगे। दीपावली के 10 दिन पूर्व जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने सैंपलिंग की कार्रवाई शुरू की है।

सैंपल की रिपोर्ट को रायपुर से आने में दो माह का समय लगता है। ग्राहक को मिठाइयां खाने के बाद पता चलता है कि फलां होटल की मिठाई मिलावटी थी। पिछले तीन चार दिनों से जिला प्रशासन की संयुक्त टीम शहर के होटल व डेयरी में जांच कर रही है। प्रदेश के अधिकांश जिलों से ऐसे सैंपल रायपुर भेजे जाते हैं, वहां जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है, इसमें तीन माह का समय लग जाता है।

जरूरी मसालोंं में भी हो रही है मिलावट-किसी भी खाद्य वस्तु व मसालों में मिलावट किडनी से लेकर लीवर को बीमार करने के लिए पर्याप्त है। हल्दी, मिर्च, नमक व रसोई में काम आने वाली वस्तुओं की जांच भी कभी-कभार की जाती है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि मिलावटी वाले संदेह वस्तुओं का सैंपल तो ले लिया जाता है, लेकिन इसे जांच करने के लिए उच्च स्तरीय लैब तक नहीं है।

मैगी के सैंपल की जांच की बात जब सामने आई तो केमिकल के लिए इंतजार किया गया। जब तक केमिकल नहीं आया, मैगी की जांच नहीं हो सकी। -शेष |पेज 18

जब केमिकल आया तो मैगी में सीसा है कि नहीं, यही जानने में 10 दिन लग गए थे। इसी तरह फलों की जांच भी लंबे समय तक अटकी रही।

इस साल अब तक 48 सैपलिंग, 20 प्रकरण को कोर्ट में किया चालान

फूड सेफ्टी विभाग की आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जनवरी से लेकर अब तक बिना लाइसेंस, एक्सपायरी डेट व मिलावटी पदार्थों की शिकायत मिलने पर करीब 720 कार्रवाई कर चुके हैं। इस दौरान 48 सैपलिंग की गई। जिसमें 14 को अमानक श्रेणी में पाया गया। वहीं 20 प्रकरणों का कोर्ट में चालान पेश किया गया। शेष प्रकरणों में भी कोर्ट में चालान करने का दावा अधिकारी कर रहे हैं। असुरक्षित खाद्य सामग्री व बगैर लाइसेंस दुकान चलाने पर पांच लाख रुपए जुर्माना से लेकर आजीवन कारावास का प्रावधान है। इसके बावजूद सबूतों के अभाव में अब तक किसी मिलावटखोर को कैद नहीं हुई है। कोर्ट में केस कमजोर होने के कारण मिलावटखोर बच जाते हैं। सूत्रों के अनुसार कमजोर सबूत पेश करने में अधिकारियों व दुकानदारों की मिलीभगत होती है।

महीने में चार या पांच सैंपल का ही टारगेट

खाद्य अफसरों को महीने में चार या पांच सैंपल लेने का टारगेट मिला हुआ है। यानी सालभर में केवल 60 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। जानकारों के अनुसार इतने सैंपल भी नहीं लिए जाते। जब सैंपल को जांच के लिए भेजा जाता है तो रिपोर्ट आने में एक महीने लग जाते हैं। स्टाफ की कमी से भी जांच प्रभावित हो रही है।



त्योहार पर बढ़ा मावे का उत्पादन

हॉटल के वर्कशॉप में जांच करते हुए फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी।

ऑनलाइन नहीं देख सकते रिपोर्ट
प्रदेश में मिलावटी वस्तुओं की जांच व इसकी रिपोर्ट देखने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास मिलावटी वस्तुओं के एकमुश्त डाटा भी नहीं है, जिससे मिलावटी वस्तुओं को आसानी से जाना जा सके। ऑनलाइन सिस्टम नहीं होने के कारण लोग कई उत्पादों का उपयोग करते रहते हैं।

सजा का प्रावधान इस तरह
मिस ब्रांडिंग : तीन लाख रुपए तक जुर्माना। बैच नंबर, कैलोरी की गणना, वेज या नॉन वेज की जानकारी नहीं होना।

सब स्टैंडर्ड : पांच लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान। मानक मात्रा से कम कैलोरी या तत्व मिलना।

भ्रामक विज्ञापन : 10 लाख रुपए तक जुर्माना। जैसे गंगोत्री का शुद्ध गंगाजल।

अनहाइजनिक : एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान। गंदगी के बीच खाद्य सामग्री पकाना।

असुरक्षित : एक लाख से जुर्माना और आजीवन कारावास भी।

(असुरक्षित व बगैर लाइसेंस वाला केस सीजेएम व बाकी केस एडीएम कोर्ट में चलता है।)

शनिवार को खाद्य एवं औषधि विभाग की अलग अलग टीम ने पांच ब्लॉकों में कार्रवाई की और मिठाई दुकानों से सैंपल ली। इसमें खरसिया से अंकित डेयरी एवं गोकुल स्वीट्स, बरमकेला के विजय स्वीट्स, रायगढ़ शहर में श्याम स्वीट्स, हॉट चिप्स, चावला स्वीट्स और छप्पन भोग में जांच कर मिठाइयों की जांच के लिए नमूना लिया गया। इसके अलावा इस टीम द्वारा घरघोड़ा व तमनार नगर के होटलों व मिठाई दुकानों में भी जांच की गई। कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुधा चौधरी, अंकित गुप्ता, सरिया पटेल, विमल सिंह व किशन ठाकुर के नेतृत्व में अलग अलग जगहों पर कार्रवाई की गई।

शनिवार को एक साथ पांच ब्लॉकों में की गई कार्रवाई
विभाग त्यौहार के सप्ताह भर पहले ही क्यों कार्रवाई करती है? जबकि रिपोर्ट महीने बाद आती है?

-ऐसा नहीं है, हमारी टीम साल भर कार्रवाई करती है।

आपकी गतिविधियां सिर्फ त्यौहार के पहले ही देखने को मिलती है?

-आप कार्यालय आइए हम आपको अपने साल भर के की गई कार्रवाई के साक्ष्य दिखाएंगे।

क्या फायदा लोगों के मिठाई खाने के बाद आपकी रिपोर्ट आती है?

-यह समस्या जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में है, इसके लिए मोबाइल वेन लाया जा रहा है, जिसके बाद मौके पर ही सैंपल की जांच कर मिठाई जब्त की जाएगी।

आपकी वेन को आने में काफी समय है, इस बार भी आपकी रिपोर्ट लोगों के मिठाई खाने के बाद ही आएगी?

-हमें कार्रवाई के बाद फर्म को नोटिस देकर, 30 इंतजार करना होता है, इसके बाद ही केस पुटअप होता है।

तब तक व्यक्ति मिलावटी मिठाई खाकर बीमार हो जाएगा, जिम्मेदारी किसकी होगी?

-शासन स्तर पर पहल जारी है, इसमें बदलाव के लिए मोबाइल वेन लाया जा रहा है।

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