सारंगढ़ कॉलेज को जिम्मेदारी
भास्कर
पड़ताल
कॉलेज में प्रयोगशाला नहीं और 18 से होगी प्रायोगिक परीक्षाएं
पुसौर और बरमकेला के कॉलेजों में प्रयोगशाला नहीं और 18 फरवरी से छात्रों के प्रायोगिक परीक्षाएं ली जाएंगी। शुक्रवार को दैनिक भास्कर की टीम ने दोनों कॉलेजों की पड़ताल की। कॉलेज में न तो स्वयं का प्रयोगशाला और न ही व्यवस्थित कमरे हैं। इतना ही नहीं कॉलेज में बिना प्रायोगिक अभ्यास के परीक्षा भी लेने की तैयारी की जा रही है। कॉलेज में मौजूद अतिथि प्रोफेसरों ने बताया कि लैब की बजाए छात्रों को क्लास रूम में सिर्फ प्रयोग विधि सीखा रहे हैं।
दोनों ही ब्लॉकों में आनन-फानन में आधी-अधूरी व्यवस्था के बीच उच्च-शिक्षा विभाग ने कॉलेज तो शुरू कर दिए, लेकिन दो साल बाद भी न तो यहां छात्रों की बैठक व्यवस्था करा सकी और न ही व्यवस्थित प्रयोग शाला। पुसौर नवीन कॉलेज को हाई स्कूल के द्वारा उधार में प्रयोगशाला तो दिया गया है, लेकिन न तो यहां पर्याप्त संसाधन है, और न ही कॉलेज के मापदंड अनुरूप रसायन और उपकरण। जिसके अभाव में छात्रों में सिर्फ प्रयोग विधि बताई जा रही है। वनस्पति शास्त्र की बेसिक जानकारी के लिए दिखाए जाने वाले स्लाइड और माइक्रोस्कोप भी नहीं है। इस दौरान मौजूद रसायन शास्त्र की प्रोफेसर रेशमा पटेल बताती है कि स्कूल का लैब है, लेकिन बीएससी की कक्षाओं में होने वाले प्रयोग के लिए संसाधन नही हैं। ऐसे में छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही दे रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल बरमकेला कॉलेज में बना हुआ है। यहां भी बीएससी के छात्रों के लिए प्रयोगशाला नहीं है, और इसी माह की 18 तारीख से उनकी परीक्षाएं ली जानी है। दोनों कॉलेजों में बीए, बीकॉम और बीएससी मिलाकर कुल साढ़े 565 छात्र अध्ययनरत है, जिनमें से करीब 212 छात्र-छात्राएं बीएससी प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाओं में है।
बेटियों में पढ़ने की ललक है। इसका अंदाजा कालेज की इस क्लास को देखकर लगाया जा सकता है। सुविधाहीन होने के बावजूद यहां छात्राें की अपेक्षा छात्राओं की संख्या ज्यादा थी।
कॉलेज में संसाधनों का अभाव है, लेकिन पढ़ाई नियमित हो रही है। सुबह में बीए व बीकॉम और दोपहर में बीएससी की कक्षाएं लगाई जाती है। अभिषेक प्रधान, अतिथि प्रोफेसर , पुसौर कॉलेज
दोनों कॉलेजों की जिम्मेदारी सारंगढ़ कॉलेज को सौंपी गई है। जिनके पास खुद भी न तो पर्याप्त प्रोफेसर और न ही संसाधन है। ऐसे में नए कॉलेजों में स्थाई प्रोफेसर और संसाधन की पूर्ति कर पाना मुश्किल है। इसके बावजूद सारंगढ़ कॉलेज प्रबंधन ने बरमकेला कॉलेज में स्थाई प्रोफेसरों और प्रयोग से संबंधित थोड़े बहुत संसाधन उपलब्ध कराए हैं।
प्रक्रिया अब तक है अधूरी
पुसौर और बरमकेला ब्लॉकों में कॉलेज भवन के निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण किया जा चुका है। पुसौर में बोरोडीपा के नजदीक करीब 10 एकड़ जमीन और बरमकेला में भी निर्धारित स्थान में सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण किया जाना है, लेकिन यह प्रक्रिया भी अबतक अधूरी है।
स्कूल का लैब भी अव्यवस्थित
कॉलेज को प्रयोग के लिए हाई स्कूल ने अपना लैब उधार दिया है। वह भी जर्जर अवस्था में है। भवन की छत उखड़ गई है। थोड़े बहुत उपकरण है, तो वह भी टूटे फूटे है। जो बीएससी के उपयोग में नहीं लाए जा सकते हैं। प्रोफेसरों ने बताया कि स्कूल के शिक्षक भी बच्चों को क्लासरूम में सिर्फ प्रयोग विधि सिखाते हैं।
अतिथि प्रो. संभाल रहे मोर्चा
पुसौर कॉलेज में 10 और बरमकेला में 4 अतिथि प्रोफेसर किसी तरह मोर्चा संभाले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश भर में प्रोफेसरों की कमी है, जिसमें सर्वाधिक रिक्तियां जिले में है। ऐसे में जिले की उच्च-शिक्षा कॉलेज प्रबंधकों के लिए चुनौती बनी हुई है। वहीं महत्वपूर्ण विषयों में अतिथि प्रो. अपना योगदान दे रहे हैं।