737 परिवारों को Rs. 108 करोड़ का मुआवजा चेक दे रहा एसईसीएल

5 वर्ष पहले
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एसईसीएल छाल क्षेत्र की प्रस्तावित खुली खदान के प्रभावितों को मुआवजा देना शुरू कर दिया गया। मंगलवार को एसईसीएल प्रबंधन ने जीएम के चेंबर में प्रभावित ग्रामीणों को बुलाकर मुआवजा दिया। खदान से 737 जमीन मालिक प्रभावित हैं। इनके मध्य लगभग 108 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में वितरित किया जाना है।

धरमजयगढ़ ब्लॉक के छाल क्षेत्र के ग्राम पुसल्दा, चंद्रशेखरपुर, छाल, नवापारा, बांधापाली और खेदापाली की निजी 338 हेक्टेयर जमीन में एसईसीएल छाल क्षेत्र अंतर्गत खुली परियोजना खोली जानी है। खदान के लिए जिन किसानों की जमीन ली गई है उन्हें शासन की स्वीकृति और कोल इंडिया से राशि दिए जाने के बाद एसईसीएल ने मुआवजा देना शुरू कर दिया है। मंगलवार को एसईसीएल के जीएम आरके अमर ने अपने चेंबर में प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण शुरू कर दी। अब कंपनी प्रभावित पंचायतों में शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को मुआवजा राशि का चेक वितरित करेगा। जीएम ने बताया कि छाल खुली खदान के प्रभावितों के मध्य लगभग 108 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में वितरित किया जाएगा।

कोयले की कमी होगी दूर - बहुत जल्द छाल खुली खदान से कोल उत्पादन शुरू हो जाएगा। इससे जिले में कोयला उत्पादन बढ़ेगा। छाल खुली खदान से सालाना 6 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होगा। अभी जो कंपनियां कोरबा या ओडिशा की खदानों से कोयला ला रहे हैं, उन्हें ट्रांसपोर्टेशन में व्यर्थ खर्च नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी।

प्रभावित को मुआवजा वितरण करते एसईसीएल के जीएम

बिजारी कोल माइंस

में लगेगा समय
छाल में ही एसईसीएल का एक और बिजारी कोल माइंस प्रोजेक्ट भी शामिल है, लेकिन इस खदान को शुरू होने में अभी समय लगेगा। दरअसल, पुनर्वास की बाधाएं झेल रहा है। इसके चलते अब तक कुछ भी फैसला नहीं हो सका है। वर्तमान में औद्योगिक घराने कोयले की कमी से जूझ रहे हैं। इसी कमी की वजह से कई उद्योग बंद हो चुके हैं, लेकिन एसईसीएल की छाल खुली खदान और बिजारी कोल माइंस के शुरू होने के बाद एक बार फिर कंपनियां पटरी पर लौट आएंगी।

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