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आरटीओ दफ्तर में कर्मचारी आम लोगों को बताते हैं नियम कानून, एजेंटों को दे रखी है खुली छूट

7 वर्ष पहले
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रायगढ़. आरटीओ दफ्तर में वैसे आम लोगों के लिए सरकारी नियम तो लागू होता है, मगर एजेंटों के लिए नियम लागू नहीं होता। ये नजारा भास्कर ने अपनी आंखों से शुक्रवार की दोपहर 1.30 बजे दफ्तर में आम ग्राहक बन कर देखा।

जब रिपोर्टर पीड़ित बनकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए तहसील कार्यालय के सामने स्थित आरटीओ के दफ्तर पहुंचा तो वहां उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि ऑनलाइन सुविधा प्रारंभ हो गई है, आप एप्लाई कर दो। आप को खुद खुद ड्राइविंग टेस्ट के लिए तारीख दी जाएगी।
इसके पहले बैंक जाकर चालान पटा दो, तारीख मिलने के बाद ड्राइविंग टेस्ट के लिए जाना, इसी तरह जब वाहन के नाम ट्रांसफर करवाने की बात कही गई तो जवाब मिला कि वाहन का क्रेता विक्रेता साथ में आइए, सभी दस्तावेज लेकर आना फिर हो जाएगा। कब आना है, ठीक से जवाब भी नहीं मिला। इसी समय कुछ एजेंट भी सक्रिय थे,जो बाबू के साथ बैठकर जानकारी भी दे रहे थे और बाबुओं ने झोला में भरकर रखे फार्मों का बंडल निकाला और उसे टेबल में पटक दिया।

साहब 300 लेते हैं तो बाबू 100 रुपए

एक एजेंट ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि एजेंट के ड्राइविंग लाइसेंस फार्म में हस्ताक्षर करने के लिए साहब जहां 300 रुपए लेते है तो वहीं बाबू मैडम द्वारा 50 से 100 रुपए फाइल आगे बढ़ाने या ड्राइविंग लाइसेंस ओके करने के लिए लिया जाता है। इसी तरह नाम ट्रांसफर करवाने के नाम पर साहब 100 रुपए लेकर अपना सील मोहर बिना क्रेता विक्रेता की उपस्थिति में एजेंट से लेते है। यहां बाबू पूरा कार्य करने के लिए एक फार्म में 50 रुपए ऐंठते है। हर तरह के काम में साहब बाबू का रेट फिक्स है।
एजेंटों के पास फर्जी सील भी

एजेंट ने नाम छुपाने की शर्त पर बताया कि शहर के एक नामी डॉक्टर का फर्जी सील भी इनके पास उपलब्ध है, जो लाइसेंस में मेडिकल फार्म अटैच होने वाले में डॉक्टर का सील लगाकर खुद हस्ताक्षर कर देते है। लिहाजा इस तरह अन्य मेडिकल दस्तावेजों में भी इसका उपयोग कर दिया जाता है।

वैसा का वैसा ही चल रहा काम

भास्करद्वारा टोकन सिस्टम से अवैध उगाही का मामला उजागर करने के बाद भी कोतरा रोड सुभाष नगर स्थित एमआईजी नंबर 5 का अघोषित आरटीओ उड़नदस्ता टीम का दफ्तर बंद हुआ है, ही कोसमनारा स्थित बाबा धाम के सामने मुख्य सड़क में आरटीओ कर्मचारियों के साथ बैठने वाले उनके गुर्गे हटाए गए है।

कुल 50 एजेंट सक्रिय

आरटीओदफ्तर में कुल छोटे बड़े समेत करीब 50 एजेंट सक्रिय रहते है, जो परिवहन विभाग के सरकारी कर्मचारियों को कमीशन खिल कर अपना पूरा काम कराते है। दिन समय कोई भी एजेंट अपना काम करा लेते हैं। आम जनता से अधिकारी कर्मचारी सीधे पैसे वसूल नहीं कर पाते। लिहाजा इन एजेंटों के माध्यम से आरटीओ दफ्तर के लोग लक्ष्मी दर्शन करने में व्यस्त हैं।