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... एम्स में एक और हार्ट ट्रांसप्लांट रहा सफल

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. देवीराम, महावीर, प्रीति, प्रवीण सिंह... के बाद एक और 35 वर्षीय युवक का एम्स में सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है।

अब तक देश में सबसे ज्यादा हार्ट ट्रांसप्लांट को अंजाम देने वाला एम्स की यह 30 वीं हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी थी। एम्स के कार्डिएक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर मिलिंद होटे की अगुवाई में 5 जनवरी को एम्स में दो दर्जन से अधिक डॉक्टर, नर्स, पारामेडिकल स्टाफ की टीम ने इस सर्जरी को अंजाम दिया। सर्जरी के दस दिन बीत जाने के बाद इसकी सफलता की उम्मीद और बढ़ गई है।

विभाग के एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि मरीज को डेढ़ साल पहले दिमाग में स्ट्रोक हुआ था, जिसकी वजह से सर्जरी के बाद उसे एलर्जी हो रही थी, इसलिए मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और अब उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। डॉक्टर ने कहा कि डोनर के अभाव से हार्ट सर्जरी कम हो रही है, अन्यथा एम्स इसके लिए हर कदम पर सक्षम और तैयार है।

पिछले दिनों 19 वर्षीय अनमोल की ब्रेन डेथ होने के बाद उसके परिजनों द्वारा अंगदान के कठोर लेकिन जीवनदायी फैसले ने राजधानी के लोगों में अंगदान के प्रति सकारात्मक बदलाव भर दिया है और इस घटना के बाद 20 लोगों ने ब्रेनडेथ होने पर अंगदान के लिए एम्स के अंगदान संस्थान ऑर्गन रिट्राइवल बैकिंग आर्गेनाइजेशन (आर्बो) में अपनी रजिस्ट्री कराई है।

ऑर्बो की प्रमुख डाक्टर आरती विज ने कहा कि 5 जनवरी को एक महिला मरीज की ब्रेन डेथ के बाद उनके परिजनों ने एम्स के सामने अंगदान करने की इच्छा जताई। इसके बाद ऑर्बो ने एम्स के किडनी व हार्ट विभाग को इसकी सूचना दी।

विभाग ने वेटिंग मरीजों को कॉल कर इसकी सूचना दी जिसमें से एक हार्ट फेल मरीज को कॉल की गई और वे तत्काल इसके लिए राजी हो गए। फिर छह घंटे की सर्जरी के बाद युवक में हार्ट का ट्रांसप्लांट कर दिया गया।

एम्स के सर्जरी विभाग प्रमुख डॉक्टर एम सी मिश्रा ने कहा कि उस दिन अंगदान से मिली दो किडनी का ट्रांसप्लांट एम्स में किया गया था जबकि इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलयरी साइंसेज में लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी में मिले अंग दूसरे के शरीर में तत्काल काम नहीं करता, इसमें समय लगता है।